Electricity meter in Delhi as DERC approves PPAC surcharge hike leading to costlier bills

दिल्ली वालों को झटका: महंगी हुई बिजली, जुलाई से बढ़ेंगे बिल

💡 दिल्ली वालों को बड़ा झटका: महंगी हुई बिजली, जुलाई से बढ़कर आएंगे बिल, जानिए आपके इलाके में कितना पड़ेगा असर”

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : श्रीमती शिल्पा की रिपोर्ट 

भीषण गर्मी के बीच दिल्ली के लाखों बिजली उपभोक्ताओं को एक बड़ा झटका लगा है। राजधानी में बिजली के बिल बढ़ने वाले हैं।

दिल्ली इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (DERC) ने बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम्स) को बिजली खरीद की बढ़ती लागत वसूलने की मंज़ूरी दे दी है।

इसके लिए ‘फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज’ (FPPAS), जिसे आमतौर पर PPAC कहा जाता है, में बढ़ोतरी की गई है।

‘The Politics Again’ की इस रिपोर्ट में आइए जानते हैं कि इस बढ़ोतरी का आपकी जेब पर कितना असर पड़ेगा और आपके इलाके में बिजली कितनी महंगी हुई है:

📊 किस कंपनी के ग्राहकों पर कितना पड़ेगा असर?

इस बढ़ोतरी का असर पूरी दिल्ली पर एक समान नहीं होगा। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि आपके इलाके में बिजली सप्लाई करने वाली कंपनी (Discom) कौन सी है। ‘टाइम्स ऑफ़ इंडिया’ की रिपोर्ट के अनुसार:

  • BSES यमुना (BYPL) – पूर्वी और मध्य दिल्ली: पूर्वी और मध्य दिल्ली के इलाकों में BSES यमुना पावर लिमिटेड से बिजली लेने वाले ग्राहकों को सबसे ज्यादा झटका लगेगा। यहां बिजली बिल में लगभग 5.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।

  • BSES राजधानी (BRPL) – दक्षिण और पश्चिम दिल्ली: दक्षिण और पश्चिम दिल्ली में सर्विस देने वाली BSES राजधानी पावर लिमिटेड के ग्राहकों के बिजली बिल में लगभग 3.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है।

  • टाटा पावर (TPDDL) – उत्तरी दिल्ली: टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड के ग्राहकों को बड़ी राहत मिली है। इन इलाकों में PPAC में बदलाव बहुत मामूली (15.9% से बढ़कर 16%) हुआ है, इसलिए यहां ग्राहकों पर असर न के बराबर होने की संभावना है।

📅 कब से लागू होंगी नई दरें?

संशोधित PPAC सरचार्ज इसी महीने यानी जून से लागू कर दिया जाएगा। इसका सीधा असर यह होगा कि बढ़ी हुई कीमतें अगले महीने जुलाई से ग्राहकों के घरों में आने वाले बिजली बिलों में दिखाई देने लगेंगी।

🤔 आखिर क्या है PPAC और क्यों बढ़ रहे हैं दाम?

  • PPAC क्या है: PPAC (Power Purchase Adjustment Cost) एक ऐसा सरचार्ज है जो बिजली वितरण कंपनियों को ईंधन (कोयला, गैस) और बिजली खरीदने की लागत में होने वाले उतार-चढ़ाव की भरपाई करने की सुविधा देता है।

  • दाम बढ़ने का कारण: चूंकि भारत में बिजली का उत्पादन मुख्य रूप से कोयले और प्राकृतिक गैस पर निर्भर करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय या घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों में कोई भी बढ़ोतरी सीधे बिजली की खरीद लागत को बढ़ा देती है।

  • कुल खर्च का 80%: दिल्ली में बिजली वितरण कंपनियों के कुल खर्च का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ बिजली की खरीद पर ही खर्च होता है। इसी अतिरिक्त बोझ को अब सरचार्ज के रूप में ग्राहकों से वसूला जाएगा।

नोट: देशभर की राजनीति, दिल्ली सरकार के अहम फैसलों और आम आदमी से जुड़ी हर बड़ी खबर के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल ‘द पॉलिटिक्स अगेन’ (The Politics Again) पर।