राम मंदिर चढ़ावा चोरी: 8 लोगों पर नामजद FIR दर्ज, 6 हिरासत में
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बड़ा एक्शन: 8 लोगों पर FIR दर्ज, 6 हिरासत में; CCTV में कैद हुई थी डकैती”
अयोध्या: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले में उत्तर प्रदेश सरकार और प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है।
‘The Politics Again’ की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देशों और एसआईटी (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर इस मामले में बड़ी कार्रवाई की गई है।
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य श्री कृष्ण मोहन की तहरीर पर अयोध्या थाने में 8 नामजद और कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली गई है।
CCTV फुटेज बनी अहम सुबूत, 6 आरोपी हिरासत में
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी सीसीटीवी (CCTV) कैमरों में चढ़ावे के पैसे चुराते और गबन करते हुए स्पष्ट रूप से दिखाई दिए हैं।
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हिरासत: पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 6 लोगों को हिरासत में ले लिया है, जिनसे सघन पूछताछ जारी है।
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हिरासत में लिए गए लोगों में लव कुश, अनुकल्प मिश्रा और 4 अन्य कैश गिनने वाले कर्मचारी शामिल हैं।
FIR में किन-किन के नाम हैं शामिल?
पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर में पैसा गिनने वाली टीम के मुखिया से लेकर कर्मचारियों तक के नाम शामिल हैं:
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सुभाष श्रीवास्तव (पैसा गिनने वाली टीम का मुखिया)
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रामाशंकर यादव उर्फ टिन्नू
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मनीष यादव (टिन्नू यादव का भतीजा, यह भी कैश गिनता था)
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अनुकल्प मिश्र
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अविनाश शुक्ला
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करुणेश पांडेय
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लवकुश मिश्र
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रमा शंकर मिश्र
प्रशासन का स्पष्ट मानना है कि इस मामले में बड़े पैमाने पर और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, जिन अन्य लोगों के नाम सामने आएंगे, उन्हें भी एफआईआर में नामजद किया जाएगा।
इन सख्त धाराओं (BNS) के तहत दर्ज हुआ मुकदमा
यूपी सरकार के निर्देश पर इस पूरे नेटवर्क के खिलाफ नए आपराधिक कानून ‘भारतीय न्याय संहिता’ (BNS) की कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है:
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BNS धारा 316 (5) – आपराधिक विश्वासघात: यदि कोई लोक सेवक, बैंकर, एजेंट या कर्मचारी अपने पद का दुरुपयोग करके संपत्ति में विश्वासघात करता है, तो उसे 10 साल तक की कैद और जुर्माने की सजा का प्रावधान है।
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BNS धारा 317 (4) – चोरी का माल खरीदना/व्यापार: यह चोरी के सामान की आदतन खरीद-फरोख्त से संबंधित है। यह एक गंभीर और गैर-जमानती अपराध है।
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BNS धारा 317 (5) – चोरी की संपत्ति छिपाना: यदि कोई जानबूझकर चोरी की गई संपत्ति को छिपाने, ठिकाने लगाने या ले जाने में मदद करता है, तो 3 साल तक की जेल, जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं।
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BNS धारा 61 – आपराधिक षड्यंत्र: यह आपराधिक साजिश (Criminal Conspiracy) रचने से संबंधित है (पूर्व की IPC धारा 120B के समान)।
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BNS धारा 3 (5) – साझा आशय: (पूर्व IPC की धारा 34 के समान) जब कई व्यक्ति मिलकर किसी अपराध को एक समान आपराधिक इरादे (Common Intention) से अंजाम देते हैं, तो हर व्यक्ति को उस अपराध के लिए उसी तरह जिम्मेदार माना जाएगा।
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जैसे कि उसने वह अपराध अकेले किया हो। इसके साथ ही धारा 306 के तहत भी आरोप तय किए गए हैं।
अयोध्या पुलिस अब इस पूरे रैकेट की गहराई से जांच कर रही है ताकि रामलला के दरबार में हुए इस बड़े विश्वासघात के सभी दोषियों को कानून के शिकंजे में लाया जा सके।











