Ram Mandir donation controversy
🚨 अयोध्या राम मंदिर चंदे पर महासंग्राम: विपक्ष का चौतरफा हमला, यूपी चुनाव से पहले BJP के लिए बना नया सिरदर्द!
अयोध्या/लखनऊ: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश के अगले विधानसभा चुनाव में अब एक साल से भी कम समय बचा है। ऐसे में अयोध्या राम मंदिर के चंदे को लेकर उठे हालिया विवाद ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) को असहज स्थिति में डाल दिया है।
विपक्ष इस मुद्दे को लेकर लगातार हमलावर है और राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल अब राजनीतिक गलियारों से निकलकर धार्मिक दायरों तक पहुंच गए हैं।
‘The Politics Again’ की इस विशेष रिपोर्ट में आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर चंदे को लेकर यह पूरा विवाद क्या है और राजनीतिक दलों का इस पर क्या रुख है:
विवाद की असली शुरुआत तब हुई जब समाजवादी पार्टी (SP) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राम मंदिर में आने वाले चंदे के प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए इसकी उच्च स्तरीय जांच की मांग कर दी।
सपा का आरोप: अखिलेश यादव ने आरोप लगाया है कि श्रद्धालुओं द्वारा श्रद्धापूर्वक दिए गए करोड़ों रुपये के चंदे में भारी गड़बड़ी हुई है।
संजय राउत का दावा: शिवसेना (उद्धव गुट) के नेता संजय राउत ने भी इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया।
उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी ने मंदिर निर्माण के लिए 1 करोड़ रुपये का योगदान दिया था, इसलिए ट्रस्ट को जवाब देना चाहिए।
राउत ने कहा कि उद्धव ठाकरे इस पूरे मामले से बेहद व्यथित हैं और वे जल्द ही अयोध्या का दौरा कर सकते हैं।
विपक्ष के हमलों के बीच, यह मामला केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहा है:
PM को लिखी चिट्ठी: अयोध्या में भाजपा के प्रवक्ता रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर पूरे मामले की जांच किसी केंद्रीय एजेंसी से कराने की मांग कर डाली है।
उनका कहना है कि यदि चंदे में अनियमितता हुई है, तो यह श्रद्धालुओं की भावनाओं को गहरी चोट पहुंचाने वाला मामला है।
नृपेंद्र मिश्र का अचानक दौरा: मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र का अचानक अयोध्या दौरा हुआ।
उन्होंने तीन घंटे तक लंबी बैठक की। हालांकि, ट्रस्ट ने इसे सामान्य समीक्षा बताया, लेकिन इसे विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है।
महंत की मांग: मंदिर ट्रस्ट से जुड़े महंत कमल नयन दास ने भी कहा कि वर्तमान माहौल आरोप-प्रत्यारोप का है, इसलिए ऐसी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए जिस पर सभी पक्षों को भरोसा हो।
पूर्व लेखा प्रभारी के दावे: खुद को मंदिर का पूर्व लेखा प्रभारी बताने वाले महिपाल सिंह नाम के एक व्यक्ति ने भी आरोप लगाया है कि लंबे समय से चंदे में अनियमितताएं हो रही थीं और शिकायत करने पर उन्हें हटा दिया गया।
बढ़ते विवाद के बीच ‘राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ और भाजपा बचाव की मुद्रा में आ गए हैं।
चंपत राय का बयान: ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि एक प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के कर्मचारी और स्वयंसेवक चंदे की गिनती में पूरी ईमानदारी से लगे हैं और अभी तक किसी भी गड़बड़ी की कोई जानकारी सामने नहीं आई है।
पीयूष गोयल का विपक्ष पर तंज: केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने इसे विपक्ष की साजिश करार दिया। उन्होंने कहा कि यूपी की जनता अखिलेश यादव के आरोपों को गंभीरता से नहीं लेती।
उन्होंने दावा किया कि भाजपा ने प्रदेश को नई दिशा दी है और 2027 में पार्टी फिर से भारी बहुमत के साथ सत्ता में लौटेगी।
निष्कर्ष: सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने भी इस पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट मांगी है। ऐसे समय में जब भाजपा एक बार फिर राम मंदिर के भावनात्मक मुद्दे को 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में अपना आधार बनाने की तैयारी कर रही थी, तब चंदे को लेकर उठे ये सवाल विपक्ष को एक नया और धारदार हथियार देते दिखाई दे रहे हैं।
नोट: देशभर की राजनीति, चुनावी रणनीतियों और अयोध्या से जुड़ी हर बड़ी खबर के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल ‘द पॉलिटिक्स अगेन’ (The Politics Again) पर।
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