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बंगाल में घुसपैठियों पर एक्शन: CM शुभेंदु का निर्णायक अभियान

🚨 पश्चिम बंगाल में घुसपैठियों के खिलाफ CM शुभेंदु अधिकारी का ‘निर्णायक युद्ध’: एक्शन में BSF और एजेंसियां, मास्टरमाइंड गिरफ्तार”

कोलकाता: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

पश्चिम बंगाल में अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों और उन्हें संरक्षण देने वाले सिंडिकेट के खिलाफ अब निर्णायक युद्ध का बिगुल बज चुका है।

राज्य की सत्ता संभालते ही मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) ने जिस सख्त अभियान का ऐलान किया था, वह अब पूरी तरह से जमीन पर उतर चुका है।

राज्य के गृह विभाग, पश्चिम बंगाल पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों और सीमा सुरक्षा बल (BSF) की संयुक्त कार्रवाई ने उन घुसपैठिया गिरोहों की नींद उड़ा दी है, जिन्होंने वर्षों से बंगाल की जमीन को अपने अवैध ठिकाने में तब्दील कर रखा था।

‘The Politics Again’ की इस विशेष रिपोर्ट में आइए जानते हैं इस महा-अभियान की पूरी इनसाइड स्टोरी:

🗺️ सीमा से लेकर शहरों तक सघन मैपिंग और फर्जी दस्तावेजों की जांच

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पुलिस महानिदेशक और खुफिया विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर इस ‘ऑपरेशन’ का पूरा ब्लूप्रिंट तैयार किया है।

  • विशेष जांच दल (SIT) गठित: उत्तर और दक्षिण 24 परगना, नदिया, मुर्शिदाबाद और मालदा जैसे संवेदनशील सीमावर्ती जिलों में विशेष टीमें तैनात की गई हैं।

  • फर्जी पहचान पर प्रहार: स्थानीय निकायों के माध्यम से उन संदिग्धों की पहचान की जा रही है, जो फर्जी वोटर कार्ड, आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों के सहारे बंगाल में छिपे बैठे हैं।

  • शहरी नेटवर्कों पर चोट: यह अभियान केवल सीमा तक सीमित नहीं है, बल्कि कोलकाता, हावड़ा और हुगली के जूट मिलों, निर्माण स्थलों और औद्योगिक इकाइयों में काम कर रहे मजदूरों के दस्तावेजों की भी अचानक जांच शुरू कर दी गई है।

🚓 उत्तर 24 परगना से 2 मास्टरमाइंड गिरफ्तार, सिंडिकेट का पर्दाफाश

इस सघन अभियान का असर जमीन पर दिखने लगा है। उत्तर 24 परगना से घुसपैठ कराने वाले दो बड़े मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया गया है।

ये लोग महज कुछ हजार रुपये लेकर सीमा पार कराने और घुसपैठियों के फर्जी भारतीय दस्तावेज तैयार कराने का संगठित धंधा चला रहे थे।

इनके पास से भारी मात्रा में नकली मुहरें और खाली दस्तावेज बरामद हुए हैं, जो यह साबित करता है कि यह एक बड़ा राष्ट्रीय सुरक्षा का संकट बन चुका था।

🛡️ सीमा पर अभूतपूर्व चौकसी, दिल्ली से ढाका तक हलचल

इस कड़ी कार्रवाई का असर कूटनीतिक स्तर पर भी महसूस किया जा रहा है:

  • BSF और पुलिस की संयुक्त गश्त: भारत-बांग्लादेश सीमा पर, विशेषकर नदीय और बिना तारबंदी वाले इलाकों में थर्मल कैमरे, ड्रोन और आधुनिक निगरानी तंत्र तैनात किये गये हैं। लक्ष्य स्पष्ट है— घुसपैठ को ‘शून्य’ (Zero) तक पहुंचाना।

  • ढाका में बौखलाहट: बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी और विपक्षी दलों ने इस कार्रवाई से बौखलाकर भारत विरोधी प्रदर्शन शुरू कर दिये हैं।

  • भारत का कड़ा रुख: भारत सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अवैध रूप से रह रहे विदेशियों का निर्वासन पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत होगा।

  • हाल ही में दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय बैठक में मानव तस्करी और अवैध आवाजाही पर दोनों देशों के बीच मिलकर प्रहार करने पर सहमति बनी है।

⚠️ असम का उदाहरण: क्यों जरूरी है यह सख्त कदम?

इस खतरे को समझने के लिए असम के धुबरी जिले के भोगडांगा और फेसकारकुटी जैसे गांवों की स्थिति देखना काफी है।

ये गांव तारबंदी के बाहर स्थित हैं और वहां रहने वाले भारतीय नागरिक वर्षों से घुसपैठ और चोरी का दंश झेल रहे हैं।

यह वास्तविकता देश को चेतावनी देती है कि यदि बंगाल में अभी कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो पूरे देश का जनसांख्यिकीय संतुलन (Demographic Balance) बिगड़ सकता है।

बहरहाल, पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का यह अभियान अब देश की सुरक्षा, संस्कृति और भविष्य की रक्षा का एक निर्णायक आंदोलन बन चुका है।

नोट: देशभर की राजनीति, राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों और ताज़ा बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल ‘द पॉलिटिक्स अगेन’ (The Politics Again) पर।

Santosh SETH

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