कादियां-ब्यास रेल प्रोजेक्ट

100 साल बाद पुनर्जीवित हुआ कादियां-ब्यास रेल प्रोजेक्ट: रवनीत बिट्टू

100 साल बाद पुनर्जीवित हुआ ऐतिहासिक ‘कादियां-ब्यास’ रेल प्रोजेक्ट, 1400 करोड़ से बदलेगी पंजाब के माझा क्षेत्र की तस्वीर”

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

पंजाब के माझा क्षेत्र के लिए एक बड़ी और ऐतिहासिक खुशखबरी है। भारत सरकार ने ब्रिटिश काल से लंबित और लगभग 100 साल पुराने कादियां-ब्यास नई रेल लाइन प्रोजेक्ट को फिर से जीवित कर दिया है।

रेल एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री श्री रवनीत सिंह बिट्टू ने रेल भवन में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस महत्वाकांक्षी परियोजना की घोषणा की।

उन्होंने इस ऐतिहासिक कदम के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार जताते हुए कहा कि केंद्र सरकार पंजाब में रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर और क्षेत्रीय विकास को गति देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

प्रोजेक्ट की मुख्य विशेषताएं और रूट

प्रस्तावित रेल लाइन गुरदासपुर जिले के कादियां को अमृतसर जिले के ब्यास से जोड़ेगी। इस अहम परियोजना की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

  • कुल लंबाई: 39.68 किलोमीटर ब्रॉडगेज रेल लाइन।

  • अनुमानित लागत: लगभग ₹1,400 करोड़।

  • कार्यकारी एजेंसी: उत्तरी रेलवे (Northern Railway)।

  • प्रमुख स्टेशन: कादियां, धपाई, घुमान, बुटाला, सठियाला और ब्यास।

  • अत्याधुनिक सुविधाएं: इस रूट पर 2 क्रॉसिंग स्टेशन, 11 प्रमुख पुल, 121 लघु पुल, 54 रोड अंडर ब्रिज (RUB) और स्वदेशी ट्रेन टक्कर-रोधी प्रणाली ‘कवच’ (Kavach) लगाई जाएगी।

1928 में हुई थी शुरुआत, अब मिली संजीवनी

इस प्रोजेक्ट का इतिहास बेहद दिलचस्प है। श्री रवनीत बिट्टू ने बताया कि कादियां-ब्यास रेल लिंक की परिकल्पना ब्रिटिश काल में की गई थी।

वर्ष 1928-29 में तत्कालीन नॉर्थ-वेस्टर्न रेलवे ने इसे मंजूरी दी थी और 1930 के दशक तक इसका काफी काम भी हो गया था।

हालांकि, बाद में इसे बंद कर दिया गया। 2010-11 में इसे फिर से बजट में शामिल किया गया, लेकिन प्रक्रियागत बाधाओं के कारण यह अटका रहा। अब ₹1,400 करोड़ की संशोधित रिपोर्ट के साथ इसे नई गति प्रदान की गई है।

किसानों, व्यापार और सामरिक दृष्टि से होगा अहम

यह रेल लाइन केवल परिवहन नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन बनेगी:

  • आर्थिक विकास: किसानों को अपनी फसल के लिए बेहतर बाजार मिलेगा। लॉजिस्टिक्स और छोटे उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा।

  • रोजगार सृजन: निर्माण और संचालन के दौरान स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।

  • सामरिक महत्व: आपातकालीन परिस्थितियों में यह रेलखंड ‘अमृतसर-पठानकोट’ रूट के एक बेहतरीन वैकल्पिक मार्ग के रूप में काम करेगा।

धार्मिक पर्यटन को मिलेगी नई उड़ान

माझा क्षेत्र अपने ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों के लिए प्रसिद्ध है। इस रेल लाइन के बनने से देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं का सफर बेहद सुगम हो जाएगा।

यह रूट अहमदिया मुस्लिम समुदाय के जन्मस्थल कादियां, डेरा बाबा जैमल सिंह (ब्यास), श्री दरबार साहिब डेरा बाबा नानक, गुरुद्वारा अचल साहिब, गुरुद्वारा साहिब पातशाही पंजवीं (बुर्ज साहिब), पंडोरी धाम और शिरडी साईं मंदिर जैसे प्रमुख आस्था केंद्रों तक सीधी और आसान पहुंच सुनिश्चित करेगा।