PM Modi EAC Meeting

पीएम की EAC-PM के साथ बैठक: वैश्विक संकट और ऊर्जा सुरक्षा पर मंथन

वैश्विक संकट के बीच भारत की अर्थव्यवस्था को ‘बूस्टर डोज’ की तैयारी: पीएम मोदी ने EAC-PM के साथ की उच्च स्तरीय बैठक “

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

पश्चिम एशिया (West Asia) में गहराते तनाव और वैश्विक स्तर पर मची आर्थिक उथल-पुथल के बीच भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत रखने की दिशा में बड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।

‘The Politics Again’ की आर्थिक डेस्क की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के सदस्यों के साथ एक बेहद अहम बैठक की।

इस उच्च स्तरीय बैठक का मुख्य उद्देश्य वैश्विक अनिश्चितताओं और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी समस्याओं के बावजूद भारत की विकास दर (Economic Growth) को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की रणनीतियों पर मंथन करना था।

बैठक के मुख्य एजेंडे और नीतिगत उपाय

सूत्रों के अनुसार, दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं के सामने खड़ी चुनौतियों के बीच भारत की आर्थिक गति को न केवल बनाए रखने बल्कि उसे और बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण नीतिगत उपायों पर चर्चा हुई। बैठक के प्रमुख बिंदु इस प्रकार रहे:

  • आर्थिक गति और स्थिरता: व्यापक आर्थिक स्थिरता (Macroeconomic Stability) को बनाए रखते हुए विकास को नई गति देने के तरीकों पर विचार किया गया।

  • ईज ऑफ डूइंग बिजनेस: देश में व्यापार करने की सुगमता (Ease of Doing Business) को और अधिक बेहतर बनाने के लिए नए सुधारों की रूपरेखा पर चर्चा हुई।

  • जीवन स्तर में सुधार: नागरिकों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने के लिए डिजाइन किए गए विशेष सुधारों पर भी जोर दिया गया।

पश्चिम एशिया संकट और ऊर्जा सुरक्षा पर चिंता

EAC-PM के सदस्यों ने बदलते अंतरराष्ट्रीय आर्थिक वातावरण और भारत पर इसके पड़ने वाले संभावित प्रभावों को लेकर प्रधानमंत्री के सामने अपना विस्तृत आकलन साझा किया।

  • होर्मुज जलडमरूमध्य और अमेरिका-ईरान तनाव: यह बैठक ऐसे नाजुक समय में हुई है जब दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) में व्यवधान से जूझ रही हैं।

  • अमेरिका-ईरान संघर्ष और महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) के बंद होने की आशंकाओं ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारी अनिश्चितता पैदा कर दी है।

  • व्यापार और ऊर्जा पर असर: बैठक में विशेष रूप से इस बात पर ध्यान केंद्रित किया गया कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का वैश्विक बाजारों, व्यापार प्रवाह (Trade Flows) और भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर क्या असर पड़ सकता है।

परिषद के सदस्यों ने प्रधानमंत्री को अवगत कराया कि वर्तमान भू-राजनीतिक (Geopolitical) घटनाक्रम भारतीय अर्थव्यवस्था और व्यापक वैश्विक परिदृश्य को किस तरह प्रभावित कर सकते हैं और भारत को इन झटकों से बचाने के लिए क्या ‘शॉक एब्जॉर्बर’ (Shock Absorber) नीतियां अपनानी चाहिए।

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