PM Modi Sanskrit Subhashita

पीएम ने साझा किया संस्कृत सुभाषित: ‘प्रकृति के साथ संतुलन हमारी संस्कृति’

पीएम मोदी ने साझा किया संस्कृत सुभाषित, बोले- ‘प्रकृति के साथ संतुलन और सभी जीवों का कल्याण ही हमारी संस्कृति’

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार (8 जून 2026) को प्रकृति संरक्षण और विश्व कल्याण का संदेश देते हुए देशवासियों के साथ एक प्राचीन संस्कृत सुभाषित साझा किया।

‘The Politics Again’ की राष्ट्रीय डेस्क के अनुसार, प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रकृति के साथ गहरा संतुलन स्थापित कर सभी जीवों का सतत कल्याण करना ही भारतीय संस्कृति की मूल भावना रही है।

एक्स (X) पर पीएम का संदेश: ‘प्रगति और समृद्धि के पथ पर भारत’

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस सुभाषित को पोस्ट करते हुए लिखा कि इसी व्यापक और समावेशी दृष्टि के साथ आज भारतवर्ष प्रगति और समृद्धि के पथ पर निरंतर आगे बढ़ रहा है।

पीएम द्वारा साझा किया गया संस्कृत श्लोक:

“प्रकृति के साथ संतुलन बिठाकर समस्त जीवों का कल्याण हो, यही हमारी संस्कृति की मूल भावना रही है। इसी व्यापक दृष्टि से आज भारतवर्ष प्रगति और समृद्धि के पथ पर निरंतर आगे बढ़ रहा है।

यावच्चतस्रः प्रदिशश्चक्षुर्यावत् समश्नुते। तावत् समैत्विन्द्रियं मयि तद्धस्तिवर्चसम्॥”

क्या है इस श्लोक का अर्थ?

इस श्लोक के निहितार्थ को समझाते हुए बताया गया कि हमें ऐसी समृद्धि प्राप्त करनी चाहिए जो चारों दिशाओं में विस्तृत हो और दूरदर्शिता से परिपूर्ण हो। विकास का यह मॉडल ऐसा होना चाहिए जहाँ:

  • प्रकृति के साथ हमारा पूर्ण सामंजस्य स्थापित हो।

  • पर्यावरण पूरी तरह से संरक्षित रहे।

  • पृथ्वी पर मौजूद सभी जीवों का सतत कल्याण (Sustainable Welfare) सुनिश्चित हो सके।

प्रधानमंत्री का यह संदेश ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन (Climate Change) से निपटने और सतत विकास (Sustainable Development) के लक्ष्यों को हासिल करने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।