देशवासियों के साथ संस्कृत सुभाषित और सफलता का मंत्र साझा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

पीएम मोदी ने साझा किया संस्कृत सुभाषित, सफलता के बताए 6 गुण

पीएम मोदी ने दिया सफलता का अचूक मंत्र: संस्कृत सुभाषित के जरिए बताए जीवन के 6 अनमोल गुण “

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

जीवन में सफलता कैसे हासिल करें और कठिन चुनौतियों का सामना कैसे करें? इस महत्वपूर्ण सवाल का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को एक बेहद प्रेरणादायक ‘संस्कृत सुभाषित’ साझा किया।

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि ज्ञान, विवेक और दूरदर्शिता जैसे गुण ही मनुष्य की असली ताकत हैं, जो उसे हर परिस्थिति में विजयी बनाते हैं।

संस्कृत सुभाषित और उसके मायने

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर संस्कृत का यह श्लोक साझा किया:

“शास्त्रे प्रतिष्ठा सहजश्च बोधः प्रागल्भ्यमभ्यस्तगुणा च वाणी। कालानुरोधः प्रतिभानवत्त्वमेते गुणाः कामदुघाः क्रियासु॥”

इस सुभाषित का अर्थ समझाते हुए उन्होंने छह ऐसे सद्गुणों का जिक्र किया, जो किसी भी कार्य में ‘कामधेनु’ (सभी इच्छाएं पूरी करने वाली) के समान फलदायी सिद्ध होते हैं:

  1. प्रामाणिक ज्ञान (शास्त्रे प्रतिष्ठा): अपने विषय या कार्यक्षेत्र की गहरी और ठोस जानकारी होना।

  2. स्वाभाविक विवेक (सहजश्च बोधः): सही और गलत की पहचान करने की प्राकृतिक समझ।

  3. निर्भय आत्म-विश्वास (प्रागल्भ्यम): बिना डरे अपनी बात रखने और निर्णय लेने की क्षमता।

  4. प्रभावशाली वाणी (अभ्यस्तगुणा च वाणी): निरंतर अभ्यास से निखरी हुई और प्रभाव छोड़ने वाली बातचीत।

  5. दूरदर्शिता (कालानुरोधः): समय की मांग को पहचानने और भविष्य का सही आकलन करने की क्षमता।

  6. नई सूझ-बूझ (प्रतिभानवत्त्वमेते): हर परिस्थिति में नवाचार (Innovation) और नई सोच का प्रयोग करना।

कठिन चुनौतियों में भी मिलती है विजय

प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि ज्ञान, विवेक और दूरदर्शिता जैसे सद्गुण जीवन में सफलता का प्रमुख आधार हैं।

जिस व्यक्ति के पास ये छह गुण होते हैं, वह बड़ी से बड़ी और कठिन से कठिन चुनौतियों का सामना आसानी से कर सकता है।

ये गुण न केवल व्यक्तिगत जीवन में बल्कि व्यावसायिक और सामाजिक जीवन में भी सफलता की गारंटी बनते हैं।