साणंद सेमीकंडक्टर प्लांट में काम करती हुईं आदिवासी बेटियां

पीएम मोदी ने साणंद सेमीकंडक्टर हब में आदिवासी बेटियों की तारीफ की

साणंद सेमीकंडक्टर हब: ‘मेड इन इंडिया’ चिप बना रहीं आदिवासी बेटियां, पीएम मोदी ने की जमकर तारीफ”

THE POLITICS AGAIN डेस्क: संतोष सेठ की रिपोर्ट 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी विजन के चलते गुजरात का साणंद अब दुनिया भर में एक प्रमुख ‘सेमीकंडक्टर हब’ बनकर उभरा है।

 

महज कुछ ही समय में यहाँ तीन बड़ी कंपनियों द्वारा सेमीकंडक्टर चिप का उत्पादन शुरू हो चुका है। लेकिन साणंद की इस सफलता की कहानी सिर्फ मशीनों तक सीमित नहीं है

बल्कि यह कहानी मध्य प्रदेश और झारखंड के आदिवासी परिवारों की उन बेटियों की भी है, जिन्होंने यहाँ चिप बनाने के काम से जुड़कर अपने सपनों को एक नई और ऊंची उड़ान दी है।

हाल ही में तीसरे प्लांट (CG Semi OSAT) के शुभारंभ के मौके पर पीएम मोदी ने इन बेटियों के जज्बे और उनके योगदान का विशेष रूप से जिक्र करते हुए गर्व व्यक्त किया।

पीएम मोदी ने बेटियों के बारे में क्या कहा?

4 जुलाई को साणंद में सीजी सेमी की OSAT सुविधा के तहत चिप्स के व्यावसायिक उत्पादन का शुभारंभ करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि झारखंड, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के ट्राइबल बेल्ट (आदिवासी क्षेत्रों) से बेटियां यहाँ काम करने आती हैं।

पीएम मोदी ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया,

“जब इन बेटियों ने मुझे फैक्टरी दिखाई, तो उन्होंने बहुत ही उत्साह और आत्मविश्वास के साथ चिप बनाने की प्रत्येक प्रक्रिया को विस्तार से समझाया। सामान्य परिवारों में पली-बढ़ीं, सामान्य विद्यालयों में पढ़ीं और ITI से शिक्षा प्राप्त करने वालीं ये बेटियां आज अद्भुत कार्य कर रही हैं।”

बिना पासपोर्ट वाले परिवारों की बेटियों ने मलेशिया में ली ट्रेनिंग

प्रधानमंत्री ने बताया कि एक समय था जब ITI में पढ़ने वाले बच्चों का जिक्र करने में माता-पिता हिचकिचाते थे, लेकिन आज इन बेटियों ने साबित कर दिया है कि उनके सपने असाधारण हैं।

इनमें से कई बेटियां ऐसे परिवारों से हैं, जहाँ किसी ने कभी पासपोर्ट नहीं देखा था, दिल्ली-मुंबई जाना तो दूर की बात थी।

लेकिन आज वही बेटियां विश्व की अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी सीखने के लिए मलेशिया गईं।

आज वे सभी ‘मेड इन इंडिया’ सेमीकंडक्टर चिप्स के उत्पादन में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

आदिवासी बेटियों की सफलता की कहानी, उन्हीं की जुबानी

सीजी सेमी प्लांट में ऑपरेटर के रूप में काम कर रही इन बेटियों ने भी अपनी सफलता की कहानी साझा की:

  • पूनम कुमारी (गिरिडीह, झारखंड): पिता के साये से महरूम पूनम अपनी माँ के साथ रहती हैं। वह बताती हैं, “मैं कभी झारखंड से बाहर नहीं गई थी, लेकिन मुझे ट्रेनिंग के लिए मलेशिया भेजा गया।

  • अगर हमें ट्रेनिंग में कोई बात समझ नहीं आती थी, तो उसे हिंदी में और प्रैक्टिकली भी समझाया जाता था।”

  • प्रियंका धनवार (पश्चिम सिंहभूम, झारखंड): प्रियंका ने बताया कि उनकी सफलता से उनके माता-पिता को बेहद गर्व है। वह अपने परिवार की पहली सदस्य हैं, जिन्होंने विदेश यात्रा की है।

  • शिवानी उइके (बालाघाट, मध्य प्रदेश): शिवानी का कहना है कि उनकी सफलता देखकर माता-पिता की आंखों में खुशी के आंसू आ गए थे। उन्होंने कहा, “हम सीजी सेमी के साथ मिलकर इतिहास रचने जा रहे हैं।”

साकार हुआ पीएम मोदी का सेमीकंडक्टर का सपना

भारत में सेमीकंडक्टर चिप बनाने का सपना नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए देखा था। इसकी नींव 20 से 22 साल पहले ही पड़ गई थी, लेकिन इसे ठोस रूप दिसंबर 2021 में मिला।

‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ (ISM) की शुरुआत करते हुए भारत सरकार ने 76,000 करोड़ रुपये के महा-पैकेज का ऐलान किया।

इसी मिशन के तहत आज गुजरात के साणंद व धोलेरा और असम के मोरीगांव में सेमीकंडक्टर फैब और OSAT फैसिलिटीज का निर्माण तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिससे भारत तकनीक के क्षेत्र में पूरी तरह से आत्मनिर्भर (Atmanirbhar Bharat) बनने की राह पर है।

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