नए आपराधिक कानूनों की ट्रेनिंग लेते हुए पुलिस अधिकारी

देश में नए आपराधिक कानून लागू: 83 हजार अफसरों की ट्रेनिंग पूरी

देश में नए आपराधिक कानूनों का शंखनाद: 83 हजार से ज्यादा अधिकारियों की हुई स्पेशल ट्रेनिंग, पुलिसिंग में हुआ ‘डिजिटल’ बदलाव”

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली में एक ऐतिहासिक बदलाव आ चुका है। 1 जुलाई 2024 से पूरे देश में तीन नए आपराधिक कानून— भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA)— लागू हो गए हैं।

 

इन कानूनों को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें युद्धस्तर पर काम कर रही हैं।

गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री बंदी संजय कुमार ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि इन नए कानूनों के तहत पुलिस, अभियोजन और न्यायपालिका को तकनीक से लैस किया जा रहा है और अब तक 83 हजार से अधिक अधिकारियों को विशेष ट्रेनिंग दी जा चुकी है।

83,740 अधिकारियों की स्पेशल ट्रेनिंग, iGOT पर 76 कोर्स

राज्यसभा में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, इन कानूनों को सुचारू रूप से लागू करने के लिए अधिकारियों का क्षमता निर्माण (Capacity Building) सर्वोच्च प्राथमिकता है।

  • पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (BPR&D) ने 2024 में अब तक आपराधिक न्याय प्रणाली के 83,740 अधिकारियों और हितधारकों को ट्रेनिंग दी है।

  • इनमें पुलिस, जेल अधिकारी, अभियोजक (Prosecutors), न्यायिक अधिकारी और फोरेंसिक विशेषज्ञ शामिल हैं।

  • राज्यों में मास्टर ट्रेनर्स तैयार किए गए हैं, जो आगे अपने-अपने राज्यों के लाखों पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित कर रहे हैं।

  • इसके अलावा, ‘आईगॉट कर्मयोगी’ (iGOT Karmayogi) ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म पर 110 कोर्स उपलब्ध कराए गए हैं, जिनमें से 76 कोर्स सीधे तौर पर इन नए आपराधिक कानूनों से संबंधित हैं।

आपराधिक न्याय प्रक्रिया हुई ‘डिजिटल’

नए कानूनों का सबसे बड़ा फोकस पारदर्शिता और तकनीक (Technology) के उपयोग पर है। न्याय संहिता में जांच के हर चरण के लिए डिजिटल प्रणालियां लागू की गई हैं:

  1. e-FIR और e-Summons: अब फर्स्ट इंफॉर्मेशन रिपोर्ट (e-FIR) का इलेक्ट्रॉनिक रजिस्ट्रेशन और समन भेजने का काम इलेक्ट्रॉनिक रूप (e-Summons) से किया जा रहा है।

  2. ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग: तलाशी, जब्ती और जांच की पूरी कार्यवाही की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य की गई है।

  3. ई-साक्ष्य और न्याय श्रुति: फोरेंसिक सबूतों की वीडियोग्राफी और बयानों की इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्डिंग के लिए ‘ई-साक्ष्य’ (e-Sakshya) ऐप, और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालती कार्यवाही के लिए ‘न्याय श्रुति’ (Nyaya Shruti) का इस्तेमाल हो रहा है।

  4. MEDLEAPR: मेडिकल लीगल एग्जामिनेशन और पोस्टमार्टम रिपोर्ट बनाने के लिए इस विशेष प्रणाली का उपयोग हो रहा है।

  5. ICJS का विस्तार: पुलिस, कोर्ट, जेल और फोरेंसिक लैब के बीच डेटा के आसान आदान-प्रदान के लिए इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) को लागू किया गया है।

केंद्र कर रहा राज्यों की वित्तीय मदद

संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत ‘पुलिस’ और ‘सार्वजनिक व्यवस्था’ राज्य का विषय है। हालांकि, गृह राज्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार विभिन्न योजनाओं (जैसे ICJS 2.0, फोरेंसिक आधुनिकीकरण और निर्भया फंड) के तहत आपराधिक न्याय प्रणाली के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पूरी वित्तीय सहायता दे रही है।

इसके अलावा, राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की ‘क्राइम इन इंडिया’ (Crime in India) रिपोर्ट के डेटा फॉर्मेट में भी जरूरी बदलाव किए गए हैं, ताकि पुराने और नए डेटा के बीच तुलना और एकरूपता बनी रहे।