होर्मुज में फंसे भारतीय जहाज

मिडिल ईस्ट क्राइसिस: होर्मुज में अभी भी फंसे है 22 भारतीय जहाज

मिडिल ईस्ट युद्ध का भारत पर बड़ा असर: होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे 22 भारतीय जहाज, लाखों टन क्रूड ऑयल और गैस की सप्लाई अटकी

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

मध्य पूर्व (Middle East) में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच छिड़े युद्ध का सीधा असर अब भारत की पेट्रोलियम और गैस सप्लाई चेन पर पड़ने लगा है।

फारस की खाड़ी (Persian Gulf) में ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (होर्मुज जलडमरूमध्य) के पास 22 भारतीय ध्वज वाले मालवाहक जहाज फंस गए हैं।

इन जहाजों में 1.67 मिलियन टन क्रूड ऑयल, 3.2 लाख टन एलपीजी और लगभग 2 लाख टन एलएनजी लदा हुआ है।

शिपिंग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बुधवार को इस गंभीर स्थिति की जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि सभी 611 भारतीय नाविक पूरी तरह सुरक्षित हैं और जहाजों को इस युद्ध प्रभावित जलसंधि से सुरक्षित निकालने के कड़े प्रयास किए जा रहे हैं।

भारतीय जहाजों की मौजूदा स्थिति

युद्ध छिड़ने के समय स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास 28 भारतीय जहाज थे। पिछले सप्ताह 4 जहाज सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे। फिलहाल की स्थिति इस प्रकार है:

  • पश्चिमी पार में 22 जहाज: इनमें 6 एलपीजी कैरियर्स, 1 एलएनजी टैंकर, 4 क्रूड ऑयल टैंकर, 1 केमिकल प्रोडक्ट्स कैरियर, 3 कंटेनर शिप, 2 बल्क कैरियर, 1 ड्रेजर, 1 खाली जहाज और 3 जहाज डॉक्स में (रख-रखाव के लिए) हैं।

  • पूर्वी पार में: 3 जहाज फंसे हुए हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य ‘ब्लॉक’, 500 टैंकर फंसे

फारस की खाड़ी को खुले महासागर से जोड़ने वाला ‘स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज’ फिलहाल लगभग बंद हो चुका है।

विश्लेषकों के अनुसार, ईरान केवल सख्त सत्यापन (Verification) के बाद ही चुनिंदा जहाजों को वहां से गुजरने की अनुमति दे रहा है।

इस वक्त दुनिया भर के लगभग 500 टैंकर जहाज वहां फंसे हुए हैं, जिनमें 108 क्रूड ऑयल टैंकर और 166 ऑयल प्रोडक्ट टैंकर शामिल हैं।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर कितना बड़ा खतरा?

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए भारी मात्रा में आयात पर निर्भर है (88% क्रूड ऑयल, 50% नेचुरल गैस और 60% एलपीजी)।

युद्ध से पहले भारत का अधिकांश क्रूड ऑयल सऊदी अरब, इराक और यूएई से इसी रास्ते (स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज) से आता था।

भारत की 85–95% एलपीजी और 30% गैस सप्लाई भी इसी रूट पर निर्भर है। हालांकि, क्रूड ऑयल की कमी को रूस, वेस्ट अफ्रीका और अमेरिका से पूरा किया जा रहा है।

लेकिन एलपीजी और नेचुरल गैस की सप्लाई बाधित होने से भारत में औद्योगिक और वाणिज्यिक उपयोगकर्ताओं पर सीधा असर पड़ने की आशंका है।

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