West Bengal Elections 2026

बंगाल चुनाव: ममता बनर्जी के खिलाफ हुमायूं कबीर ने उतारे उम्मीदवार

बंगाल चुनाव में नया मोड़ : ममता के पूर्व करीबी हुमायूं कबीर ने बनाई नई पार्टी, भवानीपुर में CM के खिलाफ उतारा उम्मीदवार

कोलकाता: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में सियासी पारा लगातार चढ़ता जा रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को अब उनके ही एक पूर्व करीबी सहयोगी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पूर्व नेता हुमायूं कबीर से कड़ी टक्कर का सामना करना पड़ सकता है।

टीएमसी से निष्कासित हुमायूं कबीर ने अपनी नई पार्टी ‘आम जनता उन्नयन पार्टी’ का गठन किया है और बुधवार को 15 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर राज्य की राजनीति में खलबली मचा दी है।

भवानीपुर में त्रिकोणीय और दिलचस्प मुकाबला

हुमायूं कबीर ने ऐलान किया है कि उनकी पार्टी राज्य की 182 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। सबसे ज्यादा चर्चा दक्षिण कोलकाता की हाई-प्रोफाइल भवानीपुर सीट की हो रही है।

कबीर ने घोषणा की है कि भवानीपुर में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ गैर-बंगाली मुस्लिम उम्मीदवार ‘पूनम बेगम’ को मैदान में उतारा जाएगा।

इस सीट पर ममता बनर्जी का सीधा मुकाबला पहले से ही बीजेपी के कद्दावर नेता शुभेंदु अधिकारी से है, ऐसे में पूनम बेगम के उतरने से यह लड़ाई बेहद दिलचस्प हो गई है।

मुर्शिदाबाद की दो सीटों से खुद लड़ेंगे कबीर

हुमायूं कबीर खुद मुर्शिदाबाद जिले की दो सीटों— रेजिनगर और नाओदा— से चुनावी मैदान में उतरेंगे।

पिछले चुनाव में उन्होंने टीएमसी के टिकट पर भरतपुर से जीत हासिल की थी, लेकिन इस बार उन्होंने अपना क्षेत्र बदला है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दो सीटों से लड़ने का फैसला उनके क्षेत्रीय प्रभाव को मजबूत करने या चुनावी अनिश्चितता से बचने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।

AIMIM से गठबंधन के संकेत और प्रमुख उम्मीदवार

कबीर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में संकेत दिए हैं कि असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) उनकी पार्टी के साथ समन्वय बनाकर कुछ सीटों पर चुनाव लड़ सकती है।

घोषित किए गए अन्य प्रमुख उम्मीदवारों में:

  • यासीन हैदर: (कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम के पूर्व दामाद) कंडी सीट से लड़ेंगे।

  • बपन घोष: पूर्वी बर्धमान के पूर्वस्थली उत्तर से।

  • सैयद अहमद कबीर: बेलडांगा से उम्मीदवार होंगे।

क्या TMC के वोट बैंक में लगेगी सेंध?

हुमायूं कबीर पिछले साल टीएमसी से निकाले जाने के बाद से लगातार मुखर रहे हैं और मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की तर्ज पर एक मस्जिद के निर्माण के बयान को लेकर सुर्खियों में आए थे।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कबीर का मुख्य उद्देश्य मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे मुस्लिम बहुल जिलों में खुद को एक मजबूत विकल्प के रूप में पेश करना है।

भवानीपुर और अन्य सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवार उतारने की उनकी यह रणनीति, सत्ताधारी टीएमसी के पारंपरिक अल्पसंख्यक वोट बैंक में सेंध लगाने का एक सीधा प्रयास मानी जा रही है।

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