LPG गैस संकट ESMA

भारत में LPG गैस संकट: सरकार ने लागू किया ESMA, जमाखोरी पर लगेगी रोक | The Politics Again

“LPG संकट की आहट: मोदी सरकार का बड़ा एक्शन, गैस की जमाखोरी रोकने के लिए लागू किया ESMA, जानें क्या हैं नए नियम “

नई दिल्ली (The Politics Again): संतोष सेठ की रिपोर्ट 

पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच छिड़े भीषण युद्ध का असर अब भारत की रसोई तक पहुंचने लगा है।

संभावित घरेलू गैस संकट को टालने और एलपीजी (LPG) सिलिंडर की जमाखोरी व कालाबाजारी पर सख्त रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम (ESMA – एस्मा) लागू कर दिया है।

सरकार के इस बड़े कदम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अस्पताल, स्कूल और घरेलू उपयोग जैसी महत्वपूर्ण और प्राथमिक सेवाओं के लिए गैस की कोई कमी न हो।

क्या है ESMA और इसे क्यों लागू किया गया?

आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम (ESMA) एक ऐसा सख्त कानून है, जिसे जीवन-निर्वाह से जुड़ी महत्वपूर्ण सेवाओं (जैसे- सार्वजनिक परिवहन, स्वास्थ्य और ऊर्जा आपूर्ति) की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए लागू किया जाता है।

पिछले कुछ महीनों में गैस की कालाबाजारी की शिकायतें मिलने के बाद सरकार ने आम जनता को राहत देने के लिए यह कदम उठाया है।

संकट का कारण: होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत अपनी LPG जरूरत का 85-90% हिस्सा सऊदी अरब और खाड़ी देशों से आयात करता है। यह सारा आयात होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते होता है।

पिछले 11 दिनों से जारी युद्ध के कारण यह जलमार्ग लगभग ठप हो गया है, जिससे भारी आपूर्ति बाधा पैदा हो गई है।

आंकड़ों की नजर में संकट:

वित्त वर्ष 2024-25 में भारत की कुल LPG खपत 3.13 करोड़ टन थी, जबकि घरेलू उत्पादन मात्र 1.28 करोड़ टन ही था। बाकी के लिए भारत पूरी तरह आयात पर निर्भर है।

इसी को देखते हुए सरकार ने एस्मा के तहत तेल रिफाइनरियों को युद्धस्तर पर घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।

प्राथमिकता के आधार पर गैस आपूर्ति के 4 नए सेक्टर्स

सीमित गैस की स्थिति में सरकार ने आपूर्ति को चार प्राथमिकता (Priority) वाले सेक्टर्स में बांट दिया है:

  • प्राथमिकता सेक्टर 1 (100% आपूर्ति): घरेलू पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG), वाहनों के लिए CNG, LPG उत्पादन और पाइपलाइन संचालन। इन्हें पिछले 6 महीने की औसत खपत का 100% गैस मिलता रहेगा।

  • प्राथमिकता सेक्टर 2 (70% आपूर्ति): उर्वरक (Fertilizer) प्लांट्स। इन्हें 70% गैस मिलेगी, जिसका इस्तेमाल सिर्फ उर्वरक बनाने में होगा। इसका प्रमाण PPAC को देना अनिवार्य होगा।

  • प्राथमिकता सेक्टर 3 (80% आपूर्ति): राष्ट्रीय गैस ग्रिड से जुड़े चाय उद्योग, मैन्युफैक्चरिंग और अन्य औद्योगिक उपभोक्ता।

  • प्राथमिकता सेक्टर 4 (80% आपूर्ति): सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) नेटवर्क से जुड़े व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ता।

किन सेक्टर्स की गैस में होगी कटौती?

सरकार ने स्पष्ट किया है कि आम जनता और प्राथमिक सेक्टर्स की जरूरतें पूरी करने के लिए पेट्रोकेमिकल यूनिट्स और पावर प्लांट्स की गैस आपूर्ति घटाई जा सकती है। तेल शोधन कंपनियों को भी पिछले 6 महीने की खपत का केवल 65% गैस ही उपलब्ध कराया जाएगा।

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