लोकओएस और 'शी-लीप्स' प्लेटफॉर्म के जरिए ग्रामीण महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों (SHG) को डिजिटल रूप से सशक्त कर आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।
लोकओएस: ग्रामीण आजीविका का नया डिजिटल आधार, ‘लखपति दीदी’ और स्वयं सहायता समूहों को मिल रही नई उड़ान”
THE POLITICS AGAIN डेस्क: संतोष सेठ की रिपोर्ट
दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के अंतर्गत ग्रामीण प्रशासन और वित्तीय प्रबंधन को पारदर्शी बनाने के लिए ‘लोक ऑपरेटिंग सिस्टम’ (लोकओएस – LokOS) एक क्रांतिकारी कदम साबित हो रहा है।
इस वेब और मोबाइल प्लेटफॉर्म का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण स्वयं सहायता समूहों (SHG) और उनके महासंघों का पूरी तरह से डिजिटलीकरण करना है, ताकि निर्धन ग्रामीण परिवारों को स्वरोजगार, कौशल और संवहनीय आजीविका से जोड़ा जा सके।
लोकओएस सदस्यों के रिकॉर्ड, बचत, ऋण, पुनर्भुगतान और आजीविका से जुड़ी पहलों का विस्तृत डिजिटल समाधान मुहैया कराता है।
कागजी काम से मुक्ति: डिजिटल रिकॉर्ड होने के कारण अब कागजी हिसाब-किताब का झंझट खत्म हो गया है।
पारदर्शिता और ट्रैकिंग: SHG के लेन-देन की वास्तविक समय (Real-time) ट्रैकिंग संभव हुई है, जिससे जवाबदेही और कार्यकुशलता में भारी सुधार आया है।
बड़ा वित्तीय नेटवर्क: आपको जानकर हैरानी होगी कि लोकओएस प्लेटफॉर्म SHG नेटवर्क के अंदर प्रति वर्ष लगभग 2,00,000 करोड़ रुपए के वित्तीय लेन-देन को सफलतापूर्वक दर्ज करता है।
इस प्लेटफॉर्म के वेब और मोबाइल एप्लिकेशन अलग-अलग स्तरों के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। वेब एप्लिकेशन प्रशासकों और ई-लेखाकारों की मदद करता है, जबकि मोबाइल एप्लिकेशन जमीनी स्तर पर गतिविधियों का प्रबंधन करता है।
ग्रामीण महिलाओं के उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए लोकओएस प्लेटफॉर्म के अंतर्गत 29 जून 2026 को ‘शी-लीप्स’ (Self-Help Entrepreneur-Livelihood and Enterprise Application for Prosperity and Sustainability) की शुरुआत की गई है।
यह डिजिटल प्लेटफॉर्म महिलाओं को नए उद्यम शुरू करने, उनके कामकाज की ट्रैकिंग करने और व्यवसाय प्रबंधन के लिए एक एकीकृत सुविधा प्रदान करता है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।
यह ऐप डिजिटाइजेशन को बेहद आसान बनाता है। इसकी मुख्य खासियतें निम्नलिखित हैं:
शुरुआत से अंत तक प्रबंधन: स्वयं सहायता समूहों, ग्राम संगठनों (VO) और क्लस्टर स्तरीय संघों (CLF) का पूरा डिजिटल पंजीकरण।
विशिष्ट डिजिटल आईडी: सदस्यों के लिए आधार और बैंक खाते से जुड़ी एक सुरक्षित और विशिष्ट डिजिटल पहचान का निर्माण।
डेटा-आधारित रिपोर्टिंग: योजना बनाने, सरकारी योजनाओं से तालमेल बिठाने और एक-क्लिक पर रियल-टाइम डैशबोर्ड रिपोर्ट प्राप्त करने की सुविधा।
इस प्लेटफॉर्म ने भारत के सामुदायिक संस्थानों में एक बड़ा डिजिटल बदलाव ला दिया है। वर्तमान में, लोकओएस देश के 34 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों, 762 ज़िलों, 7,241 ब्लॉक, 2.57 लाख ग्राम पंचायतों और 5.92 लाख गाँवों तक अपनी पहुँच बना चुका है।
अब तक जुड़े सामुदायिक संस्थान:
स्वयं सहायता समूह (SHG): 94.16 लाख
SHG से जुड़ी ग्रामीण महिलाएं (सदस्य): 10.03 करोड़
ग्राम संगठन (VO): 5.62 लाख
क्लस्टर स्तरीय संघ (CLF): 34,314
लोकओएस सरकार की महत्वाकांक्षी ‘लखपति दीदी’ पहल का मुख्य डिजिटल आधार बन गया है। यह प्लेटफॉर्म 6,611 मास्टर ट्रेनर्स, 4.09 लाख कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन्स (CRP) और 3.87 करोड़ संभावित लखपति दीदियों (PLD) के बड़े नेटवर्क के जरिए इस योजना के सफल क्रियान्वयन को संभव बना रहा है।
साथ ही, यह 18.50 करोड़ डिजिटल आजीविका रजिस्टरों (DAR) का सुरक्षित रखरखाव भी कर रहा है।
कुल मिलाकर, लोकओएस (LokOS) ग्रामीण भारत को डिजिटल रूप से सशक्त कर महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और वित्तीय समावेशन की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है।
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