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PM Modi ने संस्कृत सुभाषितम् से दिया मानसिक दृढ़ता का मंत्र

संकट काल में न छोड़ें उत्साह: पीएम मोदी ने संस्कृत ‘सुभाषितम्’ के जरिए दिया दृढ़ता और संकल्प का महामंत्र”

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : श्रीमती शिल्पा की रिपोर्ट

जीवन में आने वाली कठिन परिस्थितियों और अप्रत्याशित संकटों का सामना कैसे किया जाए, इसे लेकर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार (20 अगस्त 2026) को एक अत्यंत प्रेरक संदेश साझा किया है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर एक प्राचीन संस्कृत ‘सुभाषितम्’ पोस्ट करते हुए उन्होंने देशवासियों को उत्साह, धैर्य और मानसिक दृढ़ता का महत्व समझाया है।

क्या है वह सुभाषितम्?

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर प्राचीन भारतीय ज्ञान और जीवन प्रबंधन को दर्शाते हुए यह श्लोक साझा किया:

“आपत्काले च कष्टेऽपि नोत्साहस्त्यज्यते बुधैः। इति प्रबोधितस्तेन कथञ्चिद् दृढबुद्धिना।।”

सुभाषितम् का गहरा अर्थ और जीवन दर्शन

इस श्लोक का शाब्दिक भाव यह है कि बुद्धिमान और स्थिर मन वाले लोग यह अच्छी तरह जानते हैं कि सच्चे समझदार व्यक्ति कभी भी विपत्ति, संकट या कठिन समय में अपने उत्साह को नहीं त्यागते हैं।

इस संदेश के माध्यम से जीवन के तीन प्रमुख स्तंभों को रेखांकित किया गया है:

  • उत्साह की शक्ति: विषम और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में उत्साह (Enthusiasm) ही वह सकारात्मक ऊर्जा है, जो इंसान को टूटने से बचाती है और आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

  • स्थिर बुद्धि (Resilience): संकट के समय घबराने के बजाय मानसिक स्थिरता और संकल्प को बनाए रखना एक सच्चे और बुद्धिमान व्यक्ति की सबसे बड़ी निशानी है।

  • परिस्थितियों पर नियंत्रण: बाहरी हालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, यदि व्यक्ति भीतर से दृढ़निश्चयी (दृढबुद्धि) है, तो वह हर बाधा को पार कर सकता है।

आधुनिक जीवन में प्राचीन ज्ञान की प्रासंगिकता

वर्तमान युग में, जहां व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन में तनाव, प्रतिस्पर्धा और अप्रत्याशित चुनौतियां तेजी से बढ़ रही हैं, यह संस्कृत सुभाषितम् एक अचूक मनोवैज्ञानिक सूत्र (Psychological Tool) का काम करता है।

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा समय-समय पर साझा किए जाने वाले ये संदेश केवल हमारी सांस्कृतिक धरोहर का स्मरण नहीं हैं, बल्कि यह दर्शाते हैं कि आधुनिक ‘लाइफ मैनेजमेंट’ और ‘क्राइसिस मैनेजमेंट’ की जड़ें भारतीय दर्शन में कितनी गहराई से समाहित हैं।

यह श्लोक हमें सिखाता है कि हार मानना विकल्प नहीं है; विपरीत परिस्थितियों में भी अपने मनोबल को ऊंचा रखना ही सफलता की पहली सीढ़ी है।

Santosh SETH

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