Suspicious movement of heavy military transport aircraft from China and Turkey at Pakistani airbases raises fresh strategic concerns for India post-Operation Sindoor.
पाक में चीन-तुर्किये के सैन्य विमानों की असामान्य हलचल, ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत के लिए नई सामरिक चुनौती”
नई दिल्ली : संतोष सेठ की रिपोर्ट : THE POLITICS AGAIN
भारत के साथ हालिया सैन्य टकराव और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद, पाकिस्तान की सैन्य गतिविधियों और रणनीतिक गठजोड़ों पर भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की पैनी नजर है।
इसी बीच एक बेहद चौंकाने वाली खुफिया जानकारी सामने आई है। पिछले दिनों पाकिस्तान के एयरबेसों पर लगभग 60 घंटों तक चीन और तुर्किये के भारी सैन्य परिवहन विमानों की असामान्य और लगातार आवाजाही देखी गई है।
इस गतिविधि ने नई दिल्ली में रणनीतिक चिंताएं बढ़ा दी हैं। बड़ा सवाल यह है कि आखिर ये विदेशी सैन्य विमान पाकिस्तान में क्या लेकर पहुंचे हैं?
क्या ड्रैगन और तुर्किये मिलकर पाकिस्तान के खाली हो चुके सैन्य जखीरे को फिर से भरने की रणनीति पर काम कर रहे हैं?
मीडिया रिपोर्ट्स और सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, यह आवाजाही किसी सामान्य लॉजिस्टिक गतिविधि से कहीं अधिक है।
चीनी सैन्य परिवहन विमानों को सीधे रावलपिंडी के पास स्थित नूर खान एयरबेस और कराची के मसरूर एयरबेस पर उतरते देखा गया।
इसके साथ ही, तुर्किये के एक सैन्य परिवहन विमान (TUAF526) की मौजूदगी भी दर्ज की गई है।
सूत्रों का दावा है कि इन विमानों के जरिए पाकिस्तान को उन्नत ड्रोन और अन्य घातक सैन्य साजो-सामान की आपूर्ति की गई है।
यद्यपि स्वतंत्र रूप से इस कार्गो की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जिस पैमाने और समयबद्ध तरीके से यह एयरलिफ्ट हुआ है, वह किसी बड़े समन्वित सैन्य ऑपरेशन का साफ संकेत देता है।
भारत के लिए यह त्रिपक्षीय गठजोड़ एक गंभीर खतरे की घंटी है। पाकिस्तान की रक्षा क्षमता पहले से ही पूरी तरह चीन पर आश्रित है।
भारतीय सेना के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर सिंह ने भी पिछले साल स्पष्ट किया था कि मई (7-10) के बीच हुए संघर्ष के दौरान पाकिस्तान को चीन और तुर्किये का खुला समर्थन मिला था।
पाकिस्तान के पास मौजूद लगभग 81% सैन्य उपकरण चीनी मूल के हैं।
हालिया संघर्षों में पाकिस्तान ने चीन निर्मित J-10 लड़ाकू विमान, PL-15 एयर-टू-एयर मिसाइल और HQ-9 एयर डिफेंस सिस्टम का खुलकर इस्तेमाल किया है।
सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि चीन पाकिस्तान का उपयोग अपनी उन्नत युद्ध प्रणालियों को परखने के लिए एक “लाइव लैब” और वैश्विक रक्षा बाजार के लिए “शोकेस” के रूप में कर रहा है।
तुर्किये अब पाकिस्तान का केवल राजनीतिक समर्थक नहीं, बल्कि प्रमुख रक्षा साझेदार बन चुका है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान द्वारा Baykar Yiha III और Asisguard Songar जैसे तुर्की कामिकाजे ड्रोन का इस्तेमाल किया गया था।
इसके अलावा, तुर्किये के KAAN पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान कार्यक्रम में 200 से अधिक पाकिस्तानी इंजीनियर पहले से ही काम कर रहे हैं, जो भविष्य के वायु युद्ध की रूपरेखा बदल सकता है।
इस सैन्य हलचल का समय भी कूटनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। हाल ही में 7 अगस्त को पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब ने मक्का में एक संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस समझौते के तहत, यदि इन तीनों में से किसी भी देश पर सशस्त्र हमला होता है, तो उसे तीनों पर हमला माना जाएगा।
हालांकि इसे आधिकारिक तौर पर रक्षात्मक बताया गया है, लेकिन चीन से सैन्य तकनीक, तुर्किये से ड्रोन कौशल और सऊदी अरब के साथ यह सुरक्षा ढांचा मिलकर पाकिस्तान को एक नई और गहरी सामरिक ताकत प्रदान कर रहे हैं।
ऑपरेशन सिंदूर ने यह साबित कर दिया है कि भविष्य के युद्ध केवल टैंकों और तोपों तक सीमित नहीं रहेंगे।
अगली जंग ड्रोन स्वार्म, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, रियल-टाइम डेटा शेयरिंग और अंतरिक्ष आधारित इंटेलिजेंस पर लड़ी जाएगी।
चीनी और तुर्की विमानों की पाकिस्तान में लैंडिंग महज “विमानों की आवाजाही” नहीं है। यह संकेत है कि पाकिस्तान कम लागत वाले, लेकिन बड़े पैमाने पर तबाही मचाने वाले मानव रहित हथियारों की फौज तैयार कर रहा है।
ऐसे में भारत के सामने चुनौती सिर्फ एक देश की नहीं, बल्कि एक ऐसे विरोधी की है जिसके पीछे दो शक्तिशाली देशों की औद्योगिक और तकनीकी मशीनरी खड़ी है।
भारत के लिए अब सिर्फ सतर्क रहने का नहीं, बल्कि अपनी रणनीतिक और तकनीकी तैयारियों को दोगुना करने का समय आ गया है।
पैलेट गन पीड़ित के लिए धरने पर बैठे राहुल गांधी: "जब तक FIR नहीं, तब…
कौमी इंसाफ मोर्चा का 'पंजाब बंद': बंदी सिखों की रिहाई के लिए चक्का जाम, जानें…
मुंबई के कुर्ला में बड़ा हादसा: संतुलन बिगड़ने से रिहायशी इलाके में पलटी विशाल क्रेन,…
जौनपुर: कृषि विज्ञान केंद्र बक्शा में 'आरपीएल' आधारित कृषक प्रशिक्षण का शुभारंभ, किसानों को मिलेगी…
जौनपुर: 10 साल से लटकी चकबंदी प्रक्रिया पर DM सख्त, काम में लापरवाही बरतने वाले…
जौनपुर: किसानों की आय बढ़ाने के लिए उद्यान विभाग का मेगा प्लान, मखाना-मशरूम की खेती…