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ईरान को मिले कश्मीरी चंदा पर भारत का ‘मास्टर स्ट्रोक’, देश में रहेगा पैसा

ईरान को मिले कश्मीरी चंदे पर भारत का ‘मास्टर स्ट्रोक’: पैसा देश से बाहर नहीं जाएगा, सोना भी बैंक में करना होगा जमा “

श्रीनगर/नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

श्रीनगर/नई दिल्ली: हाल ही में कश्मीर और भारत के अन्य हिस्सों से ईरान के लिए भारी मात्रा में चंदा (Donation) इकट्ठा होने की खबर ने सोशल मीडिया पर खूब बवाल मचाया था।

इस चंदे में न केवल भारी मात्रा में नकद पैसा बल्कि चांदी, पीतल के बर्तन और सोने के कीमती जेवर तक शामिल थे।

यहां तक कि भारत में मौजूद ईरानी दूतावास (Iranian Embassy) ने चंदा लेने के लिए क्यूआर कोड (QR Code) भी जारी कर दिया था।

लेकिन अब इस मामले में एक ऐसा बड़ा खुलासा हुआ है, जो ईरान के होश उड़ा देगा और इसे कूटनीति के लिहाज से भारत का एक बड़ा ‘मास्टर स्ट्रोक’ माना जा रहा है।

चंदे का पैसा भारत से बाहर नहीं ले जा पाएगा ईरान

सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान को कश्मीरियों और अन्य लोगों से जो भी नकद चंदा या ऑनलाइन फंड मिला है, उसे वह अपने देश (ईरान) नहीं ले जा सकेगा।

कूटनीतिक नियमों के तहत ऐसा कोई सीधा प्रोसेस नहीं है जिससे ईरानी दूतावास इस नकदी को ईरान ट्रांसफर कर सके।

सिर्फ ‘दवाइयां’ खरीद सकेगा, वो भी सिर्फ भारत से!

सबसे बड़ी खबर यह है कि ईरान इस चंदे के पैसे का इस्तेमाल अपनी मनमर्जी या किसी संदिग्ध काम के लिए नहीं कर सकता।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस पैसे से ईरान केवल और केवल दवाइयां (Medicines) खरीद सकता है, और वह दवाइयां भी उसे अनिवार्य रूप से भारत से ही खरीदनी होंगी।

इसका सीधा मतलब है कि भारत से इकट्ठा किया गया पैसा वापस भारत के ही बाजार में खर्च होगा और पाई-पाई का हिसाब भारत सरकार के पास रहेगा।

सोने और गहनों का क्या होगा?

कश्मीर से ईरान को जो सोना, आभूषण और बर्तन चंदे में मिले थे, उन्हें भी ईरानी दूतावास सीधे तौर पर ईरान नहीं भेज सकता।

नियमों के तहत, दूतावास को यह सारा सोना और जेवरात भारत के ही किसी ‘स्थानीय बैंक’ में जमा कराने होंगे।

बैंक में जमा करने के बाद उसके मूल्य के आधार पर ही ईरान को पैसा दिया जाएगा (जिसे फिर से सिर्फ दवाओं की खरीद में इस्तेमाल किया जा सकेगा)।

सोशल मीडिया पर कई लोगों ने यह शक भी जताया था कि चंदे में दिए गए बर्तन और कलाकृतियां वैसी ही लग रही हैं, जैसी कभी कश्मीरी पंडितों के पास हुआ करती थीं।

पाक के दबाव में ‘थैंक्यू इंडिया’ डिलीट कर विवाद में फंसा था ईरान

गौरतलब है कि इस चंदे को लेकर ईरान खुद भी विवादों में आ गया था। पाकिस्तान के दबाव में आकर ईरानी दूतावास ने ‘थैंक्यू इंडिया’ वाले अपने सारे ट्वीट डिलीट कर दिए थे और उसकी जगह ‘थैंक्यू कश्मीर’ लिख दिया था, जिससे इस मामले को सांप्रदायिक रंग मिल गया।

वियना कन्वेंशन (Vienna Convention) के तहत, विदेशी दूतावासों को किसी अन्य देश में चंदा इकट्ठा करने के लिए उस देश के विदेश मंत्रालय (MEA) की पूर्व अनुमति की आवश्यकता होती है। दूतावास अपने आधिकारिक बैंक खातों का उपयोग सीधे चंदा लेने के लिए नहीं कर सकते हैं।

Santosh SETH

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