Union Minister Dr. Jitendra Singh addressing the media regarding the growth of India's space economy and startups

स्पेस सेक्टर में भारत की बड़ी उड़ान: 400+ स्टार्टअप्स एक्टिव

🚀स्पेस सेक्टर में भारत की ‘महा-उड़ान’: अगले दशक तक 45 बिलियन डॉलर की होगी अर्थव्यवस्था, 400+ स्टार्टअप्स कर रहे लीड “

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत अब केवल एक उभरती हुई शक्ति नहीं, बल्कि एक ‘ग्लोबल लीडर’ बनने की राह पर तेजी से अग्रसर है।

केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा है कि नीतिगत सुधारों, बढ़ती निजी भागीदारी (Private Participation) और तेजी से हो रहे इनोवेशन के कारण भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था (Space Economy) अगले एक दशक में 40-45 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच जाएगी।

‘The Politics Again’ की इस रिपोर्ट में आइए जानते हैं डॉ. जितेंद्र सिंह के संबोधन की मुख्य बातें और कैसे भारत का स्पेस तंत्र पूरी दुनिया को चौंका रहा है:

📈 8-9 बिलियन से सीधे 45 बिलियन डॉलर का सफर

‘राइज कॉन्क्लेव 2026’ (RISE Conclave) के दौरान मीडिया को संबोधित करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में हो रहे बड़े बदलावों पर खुलकर बात की।

  • उन्होंने कहा कि वर्तमान में भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था 8 से 9 बिलियन डॉलर के आसपास है, जो अगले एक दशक में कई गुना बढ़कर 40-45 बिलियन डॉलर हो जाएगी।

  • 400+ स्टार्टअप्स: मंत्री ने बताया कि कुछ साल पहले तक भारत में स्पेस स्टार्टअप्स (Space Startups) की संख्या उंगलियों पर गिनी जा सकती थी।

  • लेकिन आज देश में 400 से अधिक स्पेस स्टार्टअप्स सक्रिय हैं। ये स्टार्टअप्स एक बेहद जीवंत और तेजी से विकसित हो रहे इकोसिस्टम को आगे बढ़ा रहे हैं।

🧑‍🚀 चंद्रयान-3 और गगनयान: विज्ञान बना ‘जनता का विषय’

डॉ. जितेंद्र सिंह ने जोर देते हुए कहा कि आज भारत की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि विज्ञान और तकनीक अब सिर्फ प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ‘राष्ट्रीय चेतना’ का हिस्सा बन गई है।

  • जनता की हिस्सेदारी: उन्होंने कहा, “आज देश का आम नागरिक भारत की वैज्ञानिक प्रगति से खुद का जुड़ाव महसूस करता है। चंद्रयान-3 जैसे ऐतिहासिक मिशनों ने अंतरिक्ष विज्ञान को आम जनता की रूचि का विषय बना दिया है।”

  • उन्होंने इसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी विजन को दिया, जिन्होंने स्वच्छ भारत, डिजिटल इंडिया और गगनयान (Gaganyaan) जैसी पहलों के जरिए विज्ञान को भारत के विकास पथ के केंद्र में रखा।

🌍 सुशासन और इंफ्रास्ट्रक्चर में स्पेस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल

भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में से है, जो शासन (Governance) और विकास के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का व्यापक उपयोग कर रहा है।

  • डॉ. सिंह ने बताया कि ‘पीएम गति शक्ति’ जैसी पहलें, शहरी विकास कार्यक्रम और ड्रोन-आधारित निगरानी प्रणालियां यह दर्शाती हैं कि कैसे स्पेस टेक्नोलॉजी (Space Technology) विकास परियोजनाओं की प्लानिंग, निगरानी और पारदर्शिता बढ़ाने में सीधे तौर पर मदद कर रही है।

  • भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार कम लागत, दक्षता और इनोवेशन के साथ जटिल मिशनों को पूरा करने की अपनी क्षमता साबित की है।

🔬 असफलताओं से सीखकर और मजबूत हो रहा इसरो (ISRO)

अंतरिक्ष अभियानों में आने वाली चुनौतियों का जिक्र करते हुए मंत्री ने कहा कि अस्थायी असफलताओं से वैज्ञानिक प्रगति और मजबूत होती है।

  • उन्होंने हाल ही में हुए पीएसएलवी (PSLV) मिशन की गति-विरोध (Anomaly) का जिक्र करते हुए कहा कि इसका विश्लेषण पूरा हो चुका है।

  • मूल कारणों की पहचान कर सुधारात्मक उपाय शुरू कर दिए गए हैं, जिससे भविष्य के मिशन और भी सटीक होंगे।

  • भारत का मंगल और चंद्रयान मिशन पहले ही प्रयास में सफल रहा है, जो देश की बेजोड़ वैज्ञानिक क्षमता का प्रमाण है।

(ज्ञात हो कि ‘राइज कॉन्क्लेव 2026’ में 125 से अधिक स्टार्टअप्स ने एयरोस्पेस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीप-टेक के क्षेत्र में अपने इनोवेटिव समाधानों का प्रदर्शन किया।)

नोट: भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था (Space Economy), इसरो के नए मिशन और विज्ञान जगत की हर गर्व करने वाली खबर के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल ‘द पॉलिटिक्स अगेन’ (The Politics Again) पर।