एस जयशंकर सर्वदलीय बैठक

भारत ‘दलाल राष्ट्र’ नहीं, सर्वदलीय बैठक में बड़ा बयान – एस जयशंकर

ब्रेकिंग न्यूज़: सर्वदलीय बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर की दो टूक- वैश्विक राजनीति में ‘दलाल राष्ट्र’ की तरह व्यवहार नहीं कर सकता भारत | अमेरिका-ईरान विवाद में पाकिस्तान की मध्यस्थता पर भारत की पैनी नजर | पाक पीएम शहबाज शरीफ की वार्ता की पेशकश का ट्रंप ने किया समर्थन | 5 दिनों के लिए ईरान पर हमले रोकेगा अमेरिका | पश्चिम एशिया में युद्ध चौथे सप्ताह में जारी |

पश्चिम एशिया संकट: “भारत ‘दलाल राष्ट्र’ नहीं”, सर्वदलीय बैठक में एस जयशंकर की दो टूक, अमेरिका-ईरान के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता पर नजर


नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध और भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच भारत ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है।

बुधवार को संसद भवन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने साफ तौर पर कहा कि भारत वैश्विक राजनीति में किसी “दलाल राष्ट्र” (Broker Nation) की तरह व्यवहार नहीं कर सकता।

बैठक में अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता में पाकिस्तान की बढ़ती भूमिका पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई।

सर्वदलीय बैठक में शीर्ष मंत्रियों की मौजूदगी

इस अहम बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और विदेश सचिव विक्रम मिसरी समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

बैठक का मुख्य फोकस पश्चिम एशिया के हालात और उसमें पाकिस्तान की अचानक सक्रियता पर रहा।

पाकिस्तान की मध्यस्थता और ट्रंप का समर्थन

जयशंकर का यह बयान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के उस बयान के एक दिन बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि इस्लामाबाद अमेरिका और ईरान के बीच ‘सार्थक वार्ता’ कराने के लिए तैयार है।

शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर लिखा था कि पाकिस्तान इस समाधान की मेजबानी करने को इच्छुक है।

इस कूटनीतिक हलचल को तब और बल मिला जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शरीफ की पोस्ट को साझा किया।

ट्रंप ने यह भी घोषणा की कि वाशिंगटन ईरानी वार्ताकारों के साथ ‘सार्थक बातचीत’ के चलते ईरानी बिजली संयंत्रों पर संभावित हमलों को पांच दिनों के लिए टाल रहा है।

क्या है पाकिस्तानी सेना की भूमिका?

अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स और सीएनएन (CNN) के हवाले से यह बात सामने आई है कि पाकिस्तान का सैन्य और खुफिया तंत्र इस मध्यस्थता के पीछे काम कर रहा है।

पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने खुद ट्रंप से संपर्क साधा, जिसके बाद अमेरिकी मांगें पाकिस्तानी मध्यस्थों के जरिए ईरान तक पहुंचाई गईं।

पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की के साथ मिलकर इस क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए गुप्त प्रयास कर रहा है।

चौथे हफ्ते में प्रवेश कर चुका है युद्ध

खाड़ी क्षेत्र में यह संघर्ष अब अपने चौथे सप्ताह में पहुंच गया है। 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद यह युद्ध भड़का था, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी।

इसके बाद से ही ईरान की जवाबी कार्रवाई के कारण पूरे मध्य पूर्व में भारी तनाव फैल गया है। इस बीच पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने संयम बरतने की अपील करते हुए कहा है कि कूटनीति में विवेक की आवश्यकता होती है और आधिकारिक घोषणाओं का इंतजार किया जाना चाहिए।

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