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पश्चिम एशिया संकट: सर्वदलीय बैठक पर BJP और विपक्ष में तीखी बहस

पश्चिम एशिया संकट पर सर्वदलीय बैठक में हंगामा | PM मोदी की गैरमौजूदगी पर कांग्रेस ने उठाए सवाल, विदेश नीति को बताया ‘समझौतावादी’ | राजनाथ सिंह ने की बैठक की अध्यक्षता | BJP का पलटवार- विपक्ष कर रहा है संवेदनशील मुद्दे की राजनीति, राहुल गांधी पर साधा निशाना |

पश्चिम एशिया संकट: सर्वदलीय बैठक में PM मोदी की गैरमौजूदगी पर विपक्ष का हंगामा, BJP का करारा पलटवार

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव और संघर्ष के बीच बुधवार को केंद्र सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में जबरदस्त राजनीतिक घमासान देखने को मिला।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और विपक्षी दलों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने इस बैठक को ‘देरी से उठाया गया कदम’ बताते हुए केंद्र की विदेश नीति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सबसे बड़ा विवाद बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गैरमौजूदगी को लेकर हुआ।

राजनाथ सिंह ने की अध्यक्षता

इस महत्वपूर्ण सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की, जिसमें विदेश मंत्री एस जयशंकर भी मौजूद रहे।

हालांकि, इस बैठक से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में पश्चिम एशिया के हालात पर बयान जरूर दिया था, लेकिन सर्वदलीय बैठक में उनका न होना विपक्ष को रास नहीं आया।

विपक्षी नेताओं ने तर्क दिया कि ऐसे गंभीर वैश्विक संकट के समय बुलाई जाने वाली बैठकों में आमतौर पर प्रधानमंत्री खुद शामिल होते रहे हैं।

कांग्रेस का तीखा हमला: ‘विदेश नीति बन गई है मजाक’

लोकसभा में कांग्रेस के मुख्य सचेतक मणिकम टैगोर ने सरकार को घेरते हुए कहा कि भारत की मौजूदा विदेश नीति बाहरी दबावों से प्रभावित और ‘समझौतावादी’ लग रही है।

टैगोर ने पूर्व प्रधानमंत्रियों (मनमोहन सिंह, अटल बिहारी वाजपेयी, पीवी नरसिम्हा राव) का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले गंभीर मुद्दों की बैठकों में पीएम हमेशा मौजूद रहते थे।

उन्होंने राहुल गांधी के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि एक समझौता कर चुके प्रधानमंत्री की वजह से आज देश की विदेश नीति मजाक बनकर रह गई है।

वहीं, कांग्रेस सांसद उज्ज्वल रमण सिंह ने कहा कि भारत को अपनी विदेश नीति में स्वतंत्रता दिखानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि ईरान ने हमेशा मुश्किल वक्त में भारत का साथ दिया है, इसलिए भारत को ईरान के सर्वोच्च नेता की मौत पर शोक व्यक्त करना चाहिए था।

सपा और JMM ने भी जताई चिंता

समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने सरकार के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि ईरान के प्रति सरकार की नीतियों के कारण देश में समस्याएं पैदा हो रही हैं, जिसका असर एलपीजी (LPG) आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।

वहीं, झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की सांसद महुआ माझी ने सरकार को सलाह दी कि ऐसे संवेदनशील मामलों में सभी को साथ लेकर बेहद सावधानी से कदम बढ़ाना चाहिए।

BJP का पलटवार: ‘विपक्ष कर रहा है राजनीति’

विपक्ष के इन तीखे हमलों पर भाजपा ने भी आक्रामक रुख अपनाया। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने राहुल गांधी पर सीधा निशाना साधते हुए पूछा कि वह लोकसभा में विपक्ष के नेता हैं या देश के खिलाफ विपक्ष के नेता बन गए हैं?

जोशी ने कहा कि जब दुनिया इतने बड़े संकट से गुजर रही है, तब विपक्ष रचनात्मक भूमिका निभाने के बजाय गैर-जिम्मेदाराना बयानबाजी कर रहा है। उन्होंने एलपीजी की कमी के दावों को भी पूरी तरह खारिज कर दिया।

भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने सरकार का बचाव करते हुए कहा कि पीएम मोदी हमेशा टीम भावना और सामूहिक प्रयासों में विश्वास रखते हैं।

उन्होंने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि उनके लिए राजनीति महज़ एक ‘पार्ट-टाइम’ काम है, जबकि पीएम मोदी आज विश्व राजनीति में शांतिदूत के रूप में स्थापित हो चुके हैं।

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