विश्व की ‘फार्मेसी’ बना भारत: 19 देशों में भारतीय फार्माकोपिया को मान्यता

“भारत ने वैश्विक स्वास्थ्य क्षेत्र में अपनी धाक जमाते हुए एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है, भारतीय दवाओं के मानकों (Indian Pharmacopoeia) को अब दुनिया के 19 देशों ने आधिकारिक तौर पर मान्यता दे दी है।”

नई दिल्ली 27 / 12 / 2025 संतोष सेठ की रिपोर्ट 

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने भारतीय फार्माकोपिया आयोग (IPC) की प्रगति की समीक्षा करते हुए घोषणा की कि भारतीय दवाओं के मानकों (Indian Pharmacopoeia) को अब दुनिया के 19 देशों ने आधिकारिक तौर पर मान्यता दे दी है।

यह कदम भारत की नियामक और वैज्ञानिक क्षमताओं पर बढ़ते अंतरराष्ट्रीय भरोसे का प्रतीक है।

दवाओं की गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय मान्यता

समीक्षा बैठक के दौरान श्री नड्डा ने इस बात पर जोर दिया कि दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावकारिता सुनिश्चित करने में आईपीसी की भूमिका रीढ़ की हड्डी के समान है। उन्होंने कहा:

“भारतीय फार्माकोपिया को मिली अंतरराष्ट्रीय मान्यता वैश्विक स्तर पर हमारे मानकों की विश्वसनीयता को रेखांकित करती है। यह न केवल भारत को ‘विश्व की औषधालय’ के रूप में स्थापित करती है, बल्कि हमारे वैज्ञानिकों और नियामक प्रणालियों की उत्कृष्टता का भी प्रमाण है।”

जनवरी 2026 में नया इतिहास: IP 10वां संस्करण

बैठक में एक बड़ी घोषणा यह की गई कि स्वास्थ्य मंत्री जनवरी 2026 के पहले सप्ताह में भारतीय फार्माकोपिया का 10वां संस्करण (IP 2026) लॉन्च करेंगे।

  • यह नया संस्करण दवाओं के परीक्षण और मानकीकरण के लिए अत्याधुनिक वैज्ञानिक विधियों को समाहित करेगा।

  • इसका उद्देश्य भारतीय फार्मास्यूटिकल्स को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सबसे आगे रखना और ‘विकसित भारत’ के विजन को साकार करना है।

रोगी सुरक्षा और फार्माकोविजिलेंस पर जोर

बैठक में दवाओं के प्रतिकूल प्रभावों (Adverse Drug Reactions) की निगरानी के लिए चलाए जा रहे फार्माकोविजिलेंस प्रोग्राम (PvPI) पर भी चर्चा हुई।

  • सुरक्षा चक्र: श्री नड्डा ने रिपोर्टिंग प्रणालियों को मजबूत करने और स्वास्थ्य पेशेवरों की क्षमता निर्माण में आईपीसी के प्रयासों की सराहना की।

  • डिजिटलीकरण: मंत्री ने आईपीसी को नवाचार और डिजिटलीकरण पर ध्यान केंद्रित करने को कहा ताकि आम नागरिकों तक सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण दवाओं की पहुंच आसान हो सके।

आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

बैठक में रसायन एवं पेट्रो-रसायन विभाग की सचिव सुश्री निवेदिता शुक्ला वर्मा और सचिव-सह-वैज्ञानिक निदेशक (आईपीसी) डॉ. वी. कलैसेल्वन भी उपस्थित थे। डॉ. कलैसेल्वन ने आयोग की गतिविधियों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया और वैश्विक स्वास्थ्य उद्देश्यों में योगदान देने की प्रतिबद्धता दोहराई।

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