क्रूड ऑयल की कीमतों में भारी गिरावट, पेट्रोल-डीजल होगा सस्ता?
होर्मुज में तनाव खत्म, कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में भारी गिरावट: ब्रेंट क्रूड 60 डॉलर तक आने का अनुमान, क्या भारत में सस्ते होंगे पेट्रोल-डीजल?
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
वैश्विक ऊर्जा बाजार और आम उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। होर्मुज (Hormuz) के आसपास भू-राजनीतिक तनाव कम होने से कच्चे तेल (Crude Oil) की आपूर्ति से जुड़ी चिंताएं अब लगभग खत्म हो गई हैं।
इसके साथ ही, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और सऊदी अरब द्वारा निर्यात को युद्ध-पूर्व (सामान्य) दरों की ओर बढ़ाने से क्रूड की कीमतों में गिरावट और भी गहरी हो गई है।
बाजार के जानकारों का मानना है कि चीन की कमजोर मांग और आपूर्ति में भारी वृद्धि के कारण अब तेल बाजार में ‘सप्लाई सरप्लस’ (आपूर्ति अधिशेष) की संभावना बढ़ गई है, जिससे कीमतों में और गिरावट आ सकती है।
ब्रेंट क्रूड 60 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकता है नीचे
वित्तीय सेवा कंपनी ‘सिटीग्रुप’ (Citigroup) ने अपनी एक हालिया रिपोर्ट में कच्चे तेल के बाजार का विश्लेषण किया है:
- रिपोर्ट के अनुसार, भू-राजनीतिक तनाव कम होने से ब्रेंट क्रूड ने युद्ध के दौरान हासिल की गई अपनी सारी बढ़त गंवा दी है और इसमें लगभग 30 फीसदी की भारी गिरावट देखी गई है।
- सिटीग्रुप का अनुमान है कि अगर हालात इसी तरह सामान्य रहते हैं, तो इस साल के अंत तक ब्रेंट क्रूड के दाम गिरकर 60 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकते हैं।
- वहीं, एक अन्य प्रमुख वैश्विक वित्तीय संस्थान ‘मॉर्गन स्टेनली’ (Morgan Stanley) ने भी उभरते हुए आपूर्ति अधिशेष की चेतावनी देते हुए, हाल के सप्ताहों में कच्चे तेल के मूल्य के अपने अनुमानों में दो बार कटौती की है।
भारत को बड़ा फायदा: सस्ते हो सकते हैं पेट्रोल और डीजल
क्रूड ऑयल की कीमतों में आई यह भारी गिरावट भारत के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। इस राहत से भारत की सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) को अपने पुराने घाटे की भरपाई करने में बड़ी मदद मिलेगी।
गौरतलब है कि इन तेल कंपनियों को 30 जून तक 74,781 करोड़ रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ा था।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह निचले स्तर पर बनी रहती हैं, तो केंद्र सरकार आगामी दिनों में आम आदमी को राहत देते हुए पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कटौती पर विचार कर सकती है।
युद्ध-पूर्व स्तर का 90% पहुंचा खाड़ी देशों से निर्यात
मध्य पूर्व से तेल की आपूर्ति अब पूरी तरह से पटरी पर लौट आई है:
- सऊदी अरब की वापसी: सऊदी अरब पिछले हफ्ते के अंत में अपने विशाल ‘रास तनुरा टर्मिनल’ से शिपमेंट को फिर से शुरू करने के बाद, पिछले स्तर के करीब 90 फीसदी पर कच्चे तेल को लोड करने में कामयाब रहा है।
- UAE का निर्यात: संयुक्त अरब अमीरात ने भी पिछले महीने अपने तेल निर्यात को युद्ध-पूर्व स्तर यानी 39 लाख बैरल प्रतिदिन से अधिक पर बहाल कर दिया है।
- होर्मुज से सप्लाई: अनुमान है कि होर्मुज के रास्ते अब तेल की आपूर्ति एक करोड़ बैरल प्रतिदिन से अधिक हो गई है। इससे बाजार में तेल की बाढ़ आ गई है।
ऊर्जा बाजार में लौट रही है सामान्य स्थिति होर्मुज के जरिये जहाजों का सुरक्षित आवागमन फिर से शुरू होने के साथ ही वैश्विक ऊर्जा बाजार धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं।
इससे निकट अवधि में तेल की आपूर्ति में जबरदस्त सुधार हुआ है। यह रिफाइनरियों के लिए एक बहुत बड़ी राहत है, जो युद्ध और संघर्ष के दौरान वैकल्पिक स्रोतों को सुरक्षित करने के लिए भारी आपाधापी का सामना कर रही थीं।











