सपा प्रमुख अखिलेश यादव और अयोध्या के राम मंदिर व राजनीतिक बदलाव को दर्शाता कोलाज।

UP चुनाव: अयोध्या रणनीति पर सपा का यू-टर्न, सॉफ्ट हिंदुत्व की ओर साइकिल

UP चुनाव से पहले सपा का बड़ा ‘यू-टर्न’: घोषणापत्र में शामिल होगा राम मंदिर चढ़ावा विवाद और ‘सियाराम धाम’; हिंदू वोट बैंक में सेंधमारी की नई तैयारी”

लखनऊ: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही राज्य का सियासी पारा तेजी से चढ़ने लगा है। इस चुनावी बिसात पर सबसे बड़ा और चौंकाने वाला रणनीतिक बदलाव समाजवादी पार्टी (सपा) के खेमे से सामने आ रहा है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सपा की ‘साइकिल’ अब अयोध्या और राम मंदिर के मुद्दे पर एक बड़ा ‘यू-टर्न’ लेने की तैयारी में है।

जिस राम मंदिर आंदोलन के दौरान तत्कालीन सपा सरकार के फैसलों पर तीखे सवाल उठे थे और जिसने वर्षों तक भाजपा व आरएसएस पर बाबरी विध्वंस को लेकर हमले किए।

वही पार्टी अब बहुसंख्यक मतदाताओं को साधने के लिए एक नई ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ (Soft Hindutva) रणनीति के अगले चरण में कदम रख चुकी है।

चुनावी घोषणापत्र में शामिल होंगे ये बड़े वादे!

सपा के शीर्ष सूत्रों के हवाले से संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी आगामी चुनावों के लिए अपने घोषणापत्र (Manifesto) में धार्मिक आस्था से जुड़े कई अहम वादों को शामिल करने जा रही है:

  • चढ़ावा चोरी पर सख्त कार्रवाई: राम मंदिर के चढ़ावे में कथित हेराफेरी या गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ सरकार बनने पर कड़ा एक्शन लेने का कानूनी वादा।

  • पारदर्शी मंदिर व्यवस्था: अयोध्या में श्रद्धालुओं की सुविधा और दान-चढ़ावे के उचित प्रबंधन के लिए एक बेहद पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था की रूपरेखा।

  • ‘सियाराम धाम’ का विकास: अयोध्या को केवल एक राजनीतिक केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि ‘सियाराम धाम’ के रूप में एक भव्य और व्यापक धार्मिक-सांस्कृतिक परिसर के तौर पर विकसित करने का बड़ा एलान।

PDA के बाद अब हिंदू वोट बैंक पर नजर

हालिया लोकसभा चुनावों में पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक (PDA) समीकरण के दम पर शानदार प्रदर्शन करने के बाद, अखिलेश यादव अब अपनी रणनीति का दायरा बढ़ा रहे हैं।

पार्टी रणनीतिकारों का मानना है कि केवल पारंपरिक वोट बैंक के भरोसे पूर्ण बहुमत की सरकार बनाना मुश्किल है।

इसलिए, सपा अब उस बड़े मतदाता वर्ग तक भी अपनी सीधी पहुंच बनाना चाहती है, जो राम मंदिर को एक गहरे भावनात्मक और धार्मिक मुद्दे के रूप में देखता है।

भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाकर पार्टी धार्मिक आस्था रखने वाले मतदाताओं को यह संदेश देना चाहती है कि वह भी मंदिर की पवित्रता और विकास के पक्ष में है।

भाजपा का पलटवार: ‘यह विशुद्ध चुनावी अवसरवाद’

सपा की इस नई घेराबंदी पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी तुरंत और तीखा पलटवार शुरू कर दिया है।

  • आस्था से खिलवाड़ नहीं: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार अपने बयानों में कह रहे हैं कि श्रद्धालुओं की आस्था के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ करने वालों को सरकार कतई नहीं बख्शेगी।

  • कारसेवकों का मुद्दा: भाजपा नेता अखिलेश यादव से सीधे सवाल पूछ रहे हैं कि वे अब तक राम मंदिर में भगवान राम के दर्शन करने क्यों नहीं गए?

  • साथ ही भाजपा उन्हें अतीत में कारसेवकों पर हुई गोलीबारी की घटनाओं की याद दिलाकर इस कदम को विशुद्ध ‘चुनावी अवसरवाद’ करार दे रही है।

यूपी ही नहीं, उत्तराखंड और पंजाब में भी यही ट्रेंड

धार्मिक संस्थाओं और चढ़ावे में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भाजपा को घेरने की यह रणनीति सिर्फ उत्तर प्रदेश या समाजवादी पार्टी तक सीमित नहीं है।

विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ (INDIA) के अन्य घटक दल भी अपने-अपने राज्यों में इसी ढर्रे पर आगे बढ़ रहे हैं:

  • उत्तराखंड में कांग्रेस: कांग्रेस पार्टी उत्तराखंड के प्रमुख मंदिरों के चढ़ावे और वहां की प्रबंधन व्यवस्था में कथित अनियमितताओं को लेकर भाजपा सरकार के खिलाफ लगातार पदयात्राएं और प्रदर्शन कर रही है।

  • पंजाब में आम आदमी पार्टी: आम आदमी पार्टी (AAP) पंजाब में धार्मिक संस्थाओं और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) से जुड़े वित्तीय मामलों व प्रशासनिक भ्रष्टाचार के मुद्दों पर आक्रामक रुख अपनाए हुए है।

विपक्ष का साफ मानना है कि जब मुद्दा सीधे जनता की धार्मिक आस्था और उनके द्वारा दिए गए दान से जुड़ जाता है, तो वहां वित्तीय गबन के आरोप राजनीतिक रूप से सत्ता पक्ष को बड़ा नुकसान पहुंचा सकते हैं।

अब देखना यह होगा कि अयोध्या के इस नए कूटनीतिक मोड़ से अखिलेश यादव की साइकिल को कितनी रफ्तार मिलती है।