पराशर झील और मंदिर के आसपास बिखरा कूड़ा और शराब की खाली बोतलें

हिमाचल / मंडी : पराशर में कूड़े का अंबार, आस्था के नाम पर प्रदूषण

देवभूमि हिमाचल शर्मसार: पराशर में सरनाहुली पर्व के बाद शराब की बोतलें और कूड़े का अंबार, आस्था के नाम पर पार्टी?

मंडी (हिमाचल प्रदेश): द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध पर्यटन और धार्मिक स्थल ‘पराशर’ (Prashar Lake) से ऐसी तस्वीरें और आंकड़े सामने आए हैं, जिन्होंने पूरी देवभूमि को शर्मसार कर दिया है।

हाल ही में 16 जून को पराशर में मनाए गए ‘सरनाहुली पर्व’ के बाद मंदिर परिसर के आसपास शराब की खाली बोतलें, प्लास्टिक और कूड़े का अंबार लग गया।

देव आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़े इस पवित्र आयोजन में कुछ लोगों की इस गैर-जिम्मेदाराना हरकत ने धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाई है।

मंदिर से महज 20 मीटर दूर मिलीं शराब की बोतलें

नीय पर्यावरण प्रेमी धूमल ठाकुर ने जब अपने युवक दल के साथ पराशर मंदिर के आसपास सफाई अभियान छेड़ा, तो जो नजारा दिखा वह हैरान करने वाला था।

मंदिर परिसर से लगभग 20 मीटर की परिधि के भीतर से ही भारी मात्रा में शराब की खाली बोतलें और प्लास्टिक कचरा एकत्र किया गया।

धूमल ठाकुर ने एक बेहद चौंकाने वाला आंकड़ा देते हुए बताया कि 2021 से लेकर अब तक इस क्षेत्र से लगभग 10 लाख शराब की बोतलें बरामद की जा चुकी हैं।

दो दिनों तक चलने वाले इस पर्व में कई लोग टेंट लगाकर रुके थे, लेकिन आयोजन के बाद वे अपना कचरा वहीं छोड़कर चले गए।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ लोग धार्मिक आयोजन की आड़ में केवल पार्टी और मौज-मस्ती करने के उद्देश्य से यहां पहुंचते हैं।

प्रदूषण से झील की पवित्रता पर संकट, द्वीप का तैरना रुका

पराशर ऋषि देवता के गूर (पुजारी) ने बढ़ते प्रदूषण पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि कोविड काल के दौरान, जब वहां कोई भीड़-भाड़ नहीं थी, तब पराशर झील में स्थित रहस्यमयी तैरता हुआ द्वीप (Floating Island) दिन में 6 से 7 बार हिलता था, जो झील की पवित्रता का प्रतीक है।

लेकिन प्रदूषण के कारण एक साल पहले इस द्वीप का तैरना 8-9 महीनों तक बंद हो गया था। इसे स्थानीय लोग एक नकारात्मक आध्यात्मिक संकेत मानते हैं।

प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल, सुविधाएं नदारद

इस पूरी स्थिति को लेकर मंदिर कमेटी के प्रधान बलवीर ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है:

  • प्रशासन ने इस मेले को ‘जिला स्तरीय’ तो घोषित कर दिया, लेकिन श्रद्धालुओं के लिए एक भी बुनियादी सुविधा (जैसे शौचालय) उपलब्ध नहीं कराई।

  • साफ-सफाई की कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं की गई।

  • मंदिर कमेटी ने प्रशासन के साथ हुई बैठक में सदर एसडीएम (SDM) के समक्ष इस मेले का स्वरूप बढ़ाने का पुरजोर विरोध भी किया था, ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके।

स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों ने जिला प्रशासन से तत्काल कार्रवाई करने और पवित्र स्थलों पर कचरा फैलाने व शराब पीने वालों के खिलाफ सख्त नियम लागू करने की मांग की है।