National

सरकार का सतत कृषि पर जोर, योजनाओं से बढ़ रही किसानों की आय

सरकार का सतत कृषि पर जोर: जैविक खेती, सिंचाई और मृदा स्वास्थ्य योजनाओं से बदल रही किसानों की किस्मत”

नई दिल्ली:  द  पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट

मृदा स्वास्थ्य, भूजल की कमी और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए भारत सरकार ‘सतत कृषि पद्धतियों’ (Sustainable Agriculture) को तेजी से बढ़ावा दे रही है।

कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में थिरु डॉ. एस. जगतरक्षकन के सवालों का जवाब देते हुए सरकार की विभिन्न योजनाओं, उपलब्धियों और नीति आयोग की मूल्यांकन रिपोर्ट का विस्तृत ब्यौरा पेश किया।

उन्होंने बताया कि इन प्रयासों से न केवल खेती की लागत कम हुई है, बल्कि उत्पादन में भी रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है।

सरकार की प्रमुख पहल और उपलब्धियां:

  • मृदा स्वास्थ्य और एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन: ‘सॉयल हेल्थ एंड फर्टिलिटी स्कीम’ के तहत अब तक 26.18 करोड़ सॉयल हेल्थ कार्ड बनाए जा चुके हैं। इससे किसानों को उर्वरकों के सही और संतुलित उपयोग की जानकारी मिल रही है।
  • सूक्ष्म सिंचाई (Micro-Irrigation): पानी की बचत के लिए ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ योजना के तहत फर्टिगेशन को बढ़ावा दिया जा रहा है। अब तक 114.60 लाख हेक्टेयर भूमि को इसके दायरे में लाया गया है, जिससे लगभग 1 करोड़ किसान लाभान्वित हुए हैं।
  • जैविक और प्राकृतिक खेती: पूर्वोत्तर राज्यों में ‘परंपरागत कृषि विकास योजना’ (PKVY) और ‘MOVCDNER’ के जरिए जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसमें किसानों को प्रति हेक्टेयर 15,000 रुपये की सहायता दी जाती है। वहीं, ‘राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन’ के तहत किसानों को 4000 रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।
  • कृषि वानिकी (Agro-forestry): खेतों में पेड़ों को बढ़ावा देने के लिए नर्सरी स्थापित करने पर 16 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जा रही है। पिछले 3 वर्षों में 826 नई नर्सरी स्थापित की गई हैं।

नीति आयोग की रिपोर्ट और उत्पादन में वृद्धि

नीति आयोग के मूल्यांकन के अनुसार, इन योजनाओं का जमीन पर व्यापक असर दिखा है। 90.1% किसानों ने प्राकृतिक खेती से लागत में कमी की बात मानी है, जबकि 75.85% ने जैविक खेती से मिट्टी की उर्वरता में सुधार देखा है।

कृषि मंत्री ने बताया कि इन सतत प्रयासों के कारण कृषि क्षेत्र ने जलवायु चुनौतियों के बावजूद शानदार प्रदर्शन किया है।

जहाँ वर्ष 2014-15 में खाद्यान्न उत्पादन 252.03 मिलियन टन था, वह 2024-25 में बढ़कर रिकॉर्ड 357.73 मिलियन टन हो गया है।

इसी तरह बागवानी उत्पादन भी 280.98 मिलियन टन से बढ़कर 370.73 मिलियन टन तक पहुँच गया है।

Santosh SETH

Recent Posts

‘भारत भविष्य की तकनीक और इनोवेशन में दुनिया का नेतृत्व करे’- पीएम मोदी

पीएम मोदी का बड़ा आह्वान- "भविष्य की तकनीक और इनोवेशन में दुनिया का नेतृत्व करे…

2 hours ago

MLC चुनाव : जाने यूपी, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक का परिणाम

4 राज्यों की 28 MLC सीटों के नतीजे: यूपी में बीजेपी-सपा की टक्कर, कर्नाटक में…

2 hours ago

चक्रवात अर्नब : आंध्र प्रदेश में भारी तबाही, ओडिशा-बंगाल में हाई अलर्ट

चक्रवात 'अर्नब' का कहर: आंध्र प्रदेश में उखड़े पेड़, सड़कें जलमग्न; ओडिशा और बंगाल में…

3 hours ago

बिहार MLC चुनाव: मतगणना जारी, 150 उम्मीदवारों की किस्मत दांव पर

बिहार MLC चुनाव: 8 सीटों पर महामुकाबले की मतगणना शुरू, दांव पर 150 उम्मीदवारों की…

1 day ago

गुवाहाटी : होटल में 5 लोगों की गोली मारकर हत्या, लीज विवाद में बड़ा नरसंहार

गुवाहाटी में खौफनाक वारदात: 'होटल बिलास इन' में लीज विवाद को लेकर अंधाधुंध फायरिंग, 5…

1 day ago

ECI का हलफनामा: CEC पर लगे ‘एकतरफा फैसले’ के आरोपों को नकारा

चुनाव आयोग का सुप्रीम कोर्ट में जवाब: CEC के 'एकतरफा फैसले' के आरोपों को नकारा,…

1 day ago