चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर CEC पर लगे एकतरफा फैसले लेने के सभी आरोपों को खारिज कर दिया।
चुनाव आयोग का सुप्रीम कोर्ट में जवाब: CEC के ‘एकतरफा फैसले’ के आरोपों को नकारा, कहा- सभी निर्णय 100% सर्वसम्मति से हुए”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर लगे एकतरफा फैसले लेने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।
सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) में दाखिल एक विस्तृत जवाबी हलफनामे (Counter Affidavit) में आयोग ने स्पष्ट किया है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया से जुड़े सभी आदेश चुनाव आयोग के तीनों सदस्यों की पूर्ण सर्वसम्मति से पारित किए गए थे।
आयोग ने मीडिया रिपोर्टों के आधार पर विपक्ष और याचिकाकर्ताओं द्वारा लगाए गए आरोपों को ‘मनगढ़ंत’ और ‘भ्रम पैदा करने वाला’ बताया है।
याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने दो अन्य चुनाव आयुक्तों की मंजूरी के बिना कई फैसले लिए। इसके जवाब में ECI ने स्पष्ट किया:
संयुक्त हलफनामा: यह जवाबी हलफनामा स्वयं CEC और दोनों चुनाव आयुक्तों द्वारा सर्वसम्मति से मंजूरी देने के बाद संयुक्त रूप से दायर किया गया है।
तीन मुख्य आदेश: आयोग ने बताया कि 24 जून 2025, 27 अक्टूबर 2025 और 14 मई 2026 को जारी किए गए SIR आदेशों को आयोग के तीनों सदस्यों ने पूरी सहमति से मंजूरी दी थी।
प्रक्रिया का पालन: आयोग में फाइलें पहले एक चुनाव आयुक्त, फिर दूसरे और अंत में CEC के पास भेजी जाती हैं।
सभी के सुझावों पर विचार करने और हस्ताक्षर के बाद ही सचिवालय अधिसूचना जारी करता है।
याचिका में मतदाता सूची में नाम जुड़वाने वाले ‘फॉर्म 6’ में मनमाने बदलाव का आरोप भी लगाया गया था।
अधिकार सरकार के पास: आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि ‘फॉर्म 6’ में किसी भी प्रकार का बदलाव करने का वैधानिक अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है।
तकनीकी भ्रम: आयोग ने स्वीकार किया कि 21 अक्टूबर से ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन फॉर्म और घोषणा पत्र (Declaration Form) को अलग-अलग कर दिया गया है।
पोर्टल पर इनके प्रदर्शन के तरीके से यह तकनीकी भ्रम पैदा हो सकता था कि ‘फॉर्म 6’ में बदलाव किया गया है, जबकि ऐसा नहीं है।
चुनाव आयोग ने मतदाता सूची (Electoral Roll) से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर भी सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराया:
BLO की भूमिका: ‘अनमैप्ड’ (जिनका विवरण दर्ज नहीं है) मतदाताओं को सुनवाई के लिए बुलाना अनिवार्य नहीं है; बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) खुद आवश्यक दस्तावेज इकट्ठा करने के लिए उनके घर जाएंगे।
ERO का आदेश अनिवार्य: इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) के स्पष्ट आदेश के बिना, ECINet पर मतदाता सूची में किसी का नाम जोड़ा या हटाया नहीं जा सकता।
गोवा का मामला: गोवा में जिन 97 मतदाताओं के ‘छूट जाने’ का दावा किया गया था, उनमें से 88 पहले से ही मतदाता सूची में हैं, 6 विदेश में हैं, और 3 के पास पुर्तगाली पासपोर्ट पाया गया है।
आयोग की कार्यप्रणाली की रक्षा: आयोग ने हलफनामे में यह भी स्पष्ट किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को पद से हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के जज के समान ही संवैधानिक है, इसलिए CEC को कार्य करने से रोकने की मांग करने वाली याचिकाएं स्वीकार योग्य नहीं हैं।
आयोग ने दशहरा की छुट्टियों के कारण फिलहाल संक्षिप्त जवाब दाखिल किया है और विस्तृत बिंदुवार जवाब जमा करने के लिए न्यायालय से अनुमति मांगी है।
| आरोप (Allegation) | चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण (ECI’s Clarification) |
| CEC पर एकतरफा फैसले का आरोप | सभी 3 SIR आदेश (24 जून 25, 27 अक्टू 25, 14 मई 26) तीनों सदस्यों की सर्वसम्मति से पारित हुए। |
| फॉर्म 6 में मनमाना बदलाव | फॉर्म 6 में बदलाव का अधिकार केवल केंद्र सरकार को है। ऑनलाइन पोर्टल पर फॉर्म और घोषणा पत्र अलग दिखने से ‘तकनीकी भ्रम’ हुआ। |
| गोवा में 97 मतदाता छूटे | 88 पहले से सूची में हैं, 6 विदेश में हैं, और 3 के पास पुर्तगाली पासपोर्ट है। |
| ECINet पर नाम जोड़ना/हटाना | इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) के स्पष्ट आदेश के बिना नाम जोड़ना या हटाना असंभव है। |
| CEC को रोकने की मांग | CEC को हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के जज के समान है; यह मांग संवैधानिक रूप से स्वीकार्य नहीं। |
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