संसद में ‘अनहोनी’ का डर: स्पीकर बिरला ने क्यों कहा- ‘PM साहब, आज मत आइए’; कांग्रेस की ‘घेराबंदी’ का सनसनीखेज सच
“लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण न देने और सदन के अचानक स्थगित होने के पीछे एक बड़ी और चौंकाने वाली वजह सामने आई है”
नई दिल्ली: “The Politics Again” संतोष सेठ की रिपोर्ट
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने गुरुवार को खुलासा किया कि उन्हें खुफिया सूचना मिली थी कि कांग्रेस सांसद सदन के भीतर “अभूतपूर्व व्यवधान” और प्रधानमंत्री की सुरक्षा को खतरे में डालने वाली “अनुचित घटना” को अंजाम देने की योजना बना रहे थे।
इसी खतरे को भांपते हुए स्पीकर ने बुधवार को प्रधानमंत्री मोदी को सलाह दी थी कि वे सदन में न आएं।
बिरला ने कहा, “यदि ऐसी कोई घटना घटित होती, तो इससे देश की लोकतांत्रिक परंपराओं को ठेस पहुँचती। इसे रोकने के लिए मैंने प्रधानमंत्री से सदन में न आने का अनुरोध किया।”
क्या थी कांग्रेस की ‘लेडीज वॉल’ रणनीति?
सूत्रों के अनुसार, विपक्ष ने प्रधानमंत्री को घेरने के लिए अपनी महिला सांसदों को मोहरा बनाया था।
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रास्ता रोका: बुधवार को कार्यवाही शुरू होने से पहले ही कांग्रेस की महिला सांसदें, जिनमें वर्षा गायकवाड़ और ज्योतिमणि प्रमुख थीं, प्रधानमंत्री की सीट के पास वाले गलियारे (Aisle) में जाकर खड़ी हो गईं।
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घेराबंदी: उन्होंने उस रास्ते को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया, जहां से पीएम अपनी सीट तक पहुंचते हैं।
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आक्रामक व्यवहार: सूत्रों का दावा है कि उनका व्यवहार बेहद आक्रामक था। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने उन्हें समझाने की कोशिश की और रास्ता छोड़ने को कहा, लेकिन वे अपनी जगह से नहीं हटीं।
सरकार का डर: शारीरिक हमला या धक्का-मुक्की?
सूत्रों के मुताबिक, सरकार को आशंका थी कि जैसे ही प्रधानमंत्री सदन में प्रवेश करेंगे, विपक्षी सांसद उन्हें शारीरिक रूप से घेरने या धक्का-मुक्की करने का प्रयास कर सकते हैं।
महिला सांसदों को आगे करने की रणनीति इसलिए अपनाई गई ताकि मार्शल्स या सुरक्षाकर्मी उन पर सख्ती न कर सकें।
विपक्ष का पलटवार
इस पूरे घटनाक्रम पर टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने एएनआई से कहा, “केंद्र सरकार विपक्ष का भाषण तैयार नहीं कर सकती। हम वही बोलेंगे जो हम बोलना चाहते हैं।”
हालांकि, सत्ता पक्ष का कहना है कि बोलना एक बात है, लेकिन प्रधानमंत्री का रास्ता रोकना और शारीरिक अवरोध पैदा करना लोकतंत्र पर हमला है।











