संसद से बड़ी खबर: PM मोदी पर ‘शारीरिक हमले’ की थी साजिश? लोकसभा में बिना भाषण पास हुआ धन्यवाद प्रस्ताव, इतिहास में पहली बार ऐसा गतिरोध
“भारतीय संसदीय इतिहास में गुरुवार का दिन एक अभूतपूर्व और चिंताजनक अध्याय के रूप में दर्ज हो गया”
नई दिल्ली: “The Politics Again” संतोष सेठ की रिपोर्ट
लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पारंपरिक उत्तर के बिना ही ध्वनि मत से पारित कर दिया गया।
लेकिन इसके पीछे की जो वजहें सूत्रों के हवाले से सामने आ रही हैं, वे बेहद चौंकाने वाली हैं।
सूत्रों का दावा: PM पर हमले का था प्लान
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस ने संसद के निचले सदन में प्रधानमंत्री मोदी पर ‘शारीरिक हमला’ (Physical Attack) करने की योजना बनाई थी।
-
महिला सांसदों की आड़: दावा किया जा रहा है कि इस योजना को अंजाम देने के लिए महिला सांसदों को आगे कर ‘आड़’ (Shield) के रूप में इस्तेमाल करने की रणनीति थी, ताकि सुरक्षाकर्मी या मार्शल्स कड़ा एक्शन न ले सकें।
-
अध्यक्ष का फैसला: प्रधानमंत्री सदन में मौजूद थे और बोलने के लिए तैयार थे, लेकिन स्थिति की गंभीरता और सुरक्षा जोखिम को भांपते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उन्हें बोलने के लिए आमंत्रित करने के बजाय सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करना बेहतर समझा।
विपक्ष की शर्त: “पहले राहुल, फिर मोदी”
सदन में हंगामे की मुख्य वजह विपक्ष की जिद्द थी। निलंबित कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने साफ शब्दों में कहा, “जब तक नेता प्रतिपक्ष (LoP) राहुल गांधी को बोलने नहीं दिया जाएगा, हम प्रधानमंत्री को नहीं बोलने देंगे।”
टैगोर ने एएनआई (ANI) से कहा, “मुझे राज्यसभा का नहीं पता, लेकिन लोकसभा में हमारा स्टैंड साफ है। यह लोकतंत्र के लिए दुखद दिन है कि विपक्ष की आवाज दबाई गई।”
इतिहास में पहली बार
आमतौर पर राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा का समापन प्रधानमंत्री के भाषण से होता है। लेकिन लगातार नारेबाजी और व्यवधान के बीच अध्यक्ष ने ध्वनि मत (Voice Vote) कराया और प्रस्ताव पारित घोषित कर दिया। आज (शुक्रवार) प्रधानमंत्री राज्यसभा में अपना जवाब दे सकते हैं।
लोकतंत्र की हत्या या साजिश?
जहां एक तरफ भाजपा इसे पीएम की सुरक्षा में सेंध और संवैधानिक परंपरा का अपमान बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे विपक्ष को बोलने न देने की तानाशाही करार दे रही है।











