Russia Ukraine War

महायुद्ध की आहट: यूक्रेन ने रूसी तेल ठिकानों को किया तबाह

महायुद्ध की आहट: यूक्रेन ने रूसी तेल ठिकानों पर किए ड्रोन हमले; होर्मुज में अमेरिका-ईरान के बीच आर-पार की तैयारी

नई दिल्ली/वाशिंगटन/मॉस्को: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट

अंतरराष्ट्रीय राजनीति और कूटनीति में इन दिनों भारी उथल-पुथल मची हुई है। एक तरफ जहां भारत के सबसे पुराने और भरोसेमंद दोस्त रूस की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले तेल ठिकानों (Oil Refineries) पर यूक्रेन द्वारा लगातार ड्रोन हमले किए जा रहे हैं।

वहीं दूसरी तरफ होर्मुज की खाड़ी (Strait of Hormuz) में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। इन दोनों ही मोर्चों पर महाशक्तियों की सीधी टकराहट से पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट और युद्ध का खतरा मंडराने लगा है।


1. रूस के तेल ठिकानों पर हमला और पुतिन-ट्रंप वार्ता

2 मई को दुनिया की नजरें जब मध्य पूर्व पर टिकी थीं, तब रूस से एक परेशान करने वाली खबर सामने आई।

  • यूक्रेन के ड्रोन्स का कहर: रूस की सबसे बड़ी ऑयल रिफाइनरियों में से एक को यूक्रेन के ड्रोन्स ने निशाना बनाया। पिछले कुछ दिनों में यह रूसी तेल ठिकानों पर यूक्रेन का चौथा बड़ा हमला है।

  • वाशिंगटन की भूमिका: रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि इन हमलों के पीछे सिर्फ यूक्रेन नहीं, बल्कि वाशिंगटन की रणनीतिक सोच शामिल है।

  • सवाल उठ रहे हैं कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इशारे पर रूसी अर्थव्यवस्था को कमजोर करने के लिए इन ठिकानों को बर्बाद किया जा रहा है?

  • 90 मिनट की तनावपूर्ण बातचीत: हाल ही में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और डोनाल्ड ट्रंप के बीच 90 मिनट की लंबी फोन वार्ता हुई थी।

  • इस बातचीत में दोनों नेताओं के बीच तनाव साफ नजर आया था। इसके कुछ ही समय बाद रूस के 10 बड़े तेल ठिकानों को निशाना बनाया गया।

अगर रूस का तेल जला, तो इसकी तपिश पूरी दुनिया महसूस करेगी। अमेरिका को यह नहीं भूलना चाहिए कि इस वैश्विक ध्रुवीकरण में रूस अकेला नहीं है।

2. होर्मुज की खाड़ी: 19 अमेरिकी युद्धपोत और ईरान की रणनीति

ईरान और अमेरिका के बीच होर्मुज की खाड़ी में युद्ध जैसे हालात बन गए हैं। अमेरिका ने यहां अपने 19 घातक युद्धपोत तैनात कर दिए हैं, जिनका मकसद ईरान की घेराबंदी करना है। लेकिन, ईरान ने भी अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है।

  • त्रिपक्षीय खुफिया रणनीति: सूत्रों का दावा है कि ईरान ने अमेरिका के इस ‘नेवल ब्लॉकेड’ (Naval Blockade) को तोड़ने के लिए एक मास्टरप्लान तैयार किया है।

  • इस रणनीति में ईरान के साथ रूस के युद्ध एक्सपर्ट्स और चीन के जासूसी सैटेलाइट्स मदद कर रहे हैं।

  • ईरान की खुली चेतावनी: ईरान ने साफ कर दिया है कि अगर यह समुद्री घेराबंदी नहीं हटी, तो वह अमेरिका के इन 19 युद्धपोतों को समंदर की गहराई में डुबो देगा।

3. ‘MIRV’ तकनीक से डरा अमेरिका, ‘डार्क ईगल’ की उठी मांग

ईरान की इस चेतावनी ने वाशिंगटन में खलबली मचा दी है। इसका मुख्य कारण ईरान की उन्नत मिसाइल तकनीक है।

  • व्हाइट हाउस में हाई-लेवल मीटिंग: हाल ही में अमेरिकी व्हाइट हाउस में एक उच्च स्तरीय बैठक हुई, जिसमें सेंटकॉम (CENTCOM) के चीफ ब्रैट कूपर ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ब्रीफ किया।

  • अजेय मिसाइलें: रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की मिसाइलें साधारण नहीं हैं। वे एमआईआरवी (MIRV – Multiple Independently Targetable Reentry Vehicle) तकनीक से लैस हैं।

  • इसका मतलब है कि एक ही मिसाइल हवा में अपना रास्ता बदल सकती है और कई अलग-अलग लक्ष्यों को भेद सकती है, जिसे वर्तमान का कोई भी डिफेंस सिस्टम आसानी से रोक नहीं सकता।

  • डार्क ईगल की मांग: इस खतरे से निपटने के लिए अमेरिकी सेना अब ‘डार्क ईगल’ (Dark Eagle) जैसी हाइपरसोनिक मिसाइलों की मांग कर रही है, जिनकी रफ्तार 6000 किमी/घंटे से भी ज्यादा होती है।

4. ईरान का ‘मास्टरस्ट्रोक’ और चीन-अमेरिका कूटनीति

इस वैश्विक तनाव का सीधा असर पड़ोसी देशों पर दिख रहा है। पाकिस्तान में पहले ही तेल का हाहाकार मचा हुआ है। इसी बीच ईरान ने आर्थिक मोर्चे पर एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक खेला है:

  • नया रेल मार्ग: अमेरिका के समुद्री प्रतिबंधों को धता बताते हुए, ईरान ने कजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान के रास्ते रेल मार्ग से चीन को तेल भेजना शुरू कर दिया है।

  • यह एक ऐसा लैंड-रूट है, जिसे अमेरिका अपनी नौसेना से ब्लॉक नहीं कर सकता। 2006 में देखा गया यह सपना अब हकीकत बन रहा है, जिससे ईरान की अर्थव्यवस्था को नई ‘ऑक्सीजन’ मिल गई है।

  • रूबियो और वांग यी की तल्ख बातचीत: इसी तनावपूर्ण माहौल के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो (Marco Rubio) और चीन के विदेश मंत्री वांग यी (Wang Yi) के बीच फोन पर बातचीत हुई।

  • इस कूटनीतिक चर्चा ने आग में घी डालने का काम किया। चीन ने अमेरिका को दो टूक शब्दों में संदेश देते हुए कहा है कि अगर डोनाल्ड ट्रंप बीजिंग आना चाहते हैं, तो उनका स्वागत है, लेकिन चीन अपनी नीतियों से समझौता नहीं करेगा।

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