फतेहपुर: गैंगरेप पीड़िता से मंगेतर ने की शादी, पेश की मिसाल
फतेहपुर: समाज के लिए मिसाल बना मंगेतर, गैंगरेप पीड़िता का हाथ थाम सिद्धपीठ तांबेश्वर मंदिर में रचाई शादी”
फतेहपुर: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले से एक ऐसी दिल छू लेने वाली खबर सामने आई है, जिसने समाज को स्त्री सम्मान, सच्चे प्रेम और रिश्तों की पवित्रता को देखने का एक नया नजरिया दिया है।
खागा कोतवाली क्षेत्र की चर्चित गैंगरेप कांड की पीड़िता को उसके मंगेतर ने न सिर्फ अपनाया है, बल्कि उसका ढाल बनकर सिद्धपीठ तांबेश्वर मंदिर में उसके साथ सात फेरे भी लिए हैं।
इस कदम ने उस रूढ़िवादी सोच पर करारा प्रहार किया है, जहां ऐसी घटनाओं के बाद अक्सर पीड़िता को अकेला छोड़ दिया जाता है।
क्या है पूरा मामला?
बीती 24 अप्रैल को खागा क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाली घटना घटी थी। पीड़िता अपनी बुआ के घर जा रही थी, तभी रास्ते में तीन दरिंदों ने उसे बंधक बना लिया और उसके साथ गैंगरेप जैसी घिनौनी वारदात को अंजाम दिया।
घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, लेकिन इस घटना ने पीड़िता को गहरे सदमे में डाल दिया था।
मंगेतर ने निभाया साथ, पेश की सच्ची मिसाल
अक्सर देखा जाता है कि समाज में ऐसी अप्रिय घटनाओं के बाद तय शादियां टूट जाती हैं और लोग पीड़िता से मुंह मोड़ लेते हैं। लेकिन इस कहानी में पीड़िता के मंगेतर ने एक सच्ची मिसाल पेश की।
उसने इस कठिन समय में अपनी मंगेतर का साथ छोड़ने के बजाय उसे और अधिक सम्मान देने का फैसला किया।
शहर के प्राचीन सिद्धपीठ तांबेश्वर मंदिर में भगवान शिव को साक्षी मानकर दोनों ने एक-दूसरे को जयमाला पहनाई और जीवन भर साथ निभाने की कसमें खाईं।
इस भावुक शादी का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसकी लोग जमकर सराहना कर रहे हैं और मंगेतर के इस साहसिक कदम को सलाम कर रहे हैं।
‘जो हुआ उसे भूलकर नई शुरुआत कर रहे हैं’
शादी के बाद नवदंपति ने मीडिया के कैमरों के सामने कुछ भी कहने से परहेज किया, लेकिन उनके चेहरे की खुशी यह बयां करने के लिए काफी थी कि उन्होंने अपने अतीत के उस काले अध्याय को पीछे छोड़ दिया है।
दोनों के परिवार वाले भी इस विवाह से बेहद खुश हैं। परिजनों का कहना है कि वे उस बुरी घटना को अब याद नहीं करना चाहते।
उनका बेटा और बहू दोनों साथ खुश हैं और दोनों ने आपसी रजामंदी व खुशी-खुशी यह शादी रचाई है।
यह विवाह केवल दो दिलों का मिलन नहीं है, बल्कि समाज के लिए एक कड़ा संदेश है कि किसी की दरिंदगी किसी स्त्री के सम्मान और उसके जीवन जीने के अधिकार को नहीं छीन सकती।











