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परिसीमन बिल पर CM स्टालिन ने जलाई कॉपी, फहराया काला झंडा

परिसीमन पर भड़का दक्षिण: CM स्टालिन ने जलाई बिल की कॉपी, फहराया काला झंडा; बोले- ‘यह आग BJP का घमंड तोड़ेगी’

नमक्कल/चेन्नई: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने के केंद्र सरकार के ‘परिसीमन विधेयक’ (Delimitation Bill) के खिलाफ तमिलनाडु में भारी आक्रोश भड़क गया है।

गुरुवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके (DMK) अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने इस कदम के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए नमक्कल में काले कपड़े पहनकर काला झंडा फहराया।

विरोध के इस तीखे प्रदर्शन के दौरान सीएम स्टालिन ने खुले मंच से प्रस्तावित परिसीमन विधेयक की एक प्रति भी जला दी।

‘तमिलों को उनकी ही ज़मीन पर रिफ्यूजी बना देगा यह कानून’ सीएम स्टालिन ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जनसंख्या नियंत्रण (Population Control) के मामले में सबसे बेहतरीन काम करने वाले दक्षिणी राज्यों के साथ सरकार परिसीमन के नाम पर बड़े पैमाने पर नाइंसाफी कर रही है।

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर अपनी तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, “आज मैंने उस काले कानून की कॉपी जलाकर एक और आग सुलगाई है, जो तमिलों को उनकी ही ज़मीन पर रिफ्यूजी (शरणार्थी) बना देता है। यह आग भी पूरी द्रविड़ ज़मीन पर फैलेगी। यह बीजेपी के घमंड को तोड़ देगी।”

जनता से अपील:

घरों के सामने फहराएं काले झंडे स्टालिन ने पूरे प्रदेश की जनता और डीएमके कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे परिसीमन के इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध करें और आज अपने घरों के सामने काले झंडे फहराएं।

इससे एक दिन पहले बुधवार को जारी एक वीडियो संदेश में स्टालिन ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था कि परिसीमन बिल के जरिये लोकतांत्रिक व्यवस्था में दक्षिणी राज्यों के महत्व और उनकी राजनीतिक ताकत को ख़त्म करने की गहरी साज़िश रची जा रही है।

मंत्री ने गिनाया नुकसान:

“यूपी में 80 से 120 हो जाएंगी सीटें” डीलिमिटेशन बिल के विरोध में तमिलनाडु के मंत्री अंबिल महेश पोय्यामोझी ने भी तिरुचिरापल्ली के थेन्नूर स्थित अपने आवास पर काले झंडे लगाए हैं। इस बिल का गणित समझाते हुए महेश ने कहा:

  • केंद्र सरकार लोकसभा सीटों को 850 करने की योजना बना रही है।

  • नए परिसीमन से उत्तर प्रदेश (UP) जैसे राज्यों में संसद सीटों की संख्या 80 से बढ़कर 120 हो जाएगी, जबकि दक्षिण की राजनीतिक हैसियत घट जाएगी।

  • ड्राफ्ट रिपोर्ट अभी तक विपक्षी पार्टियों को नहीं दी गई है।

  • यह राज्यों के अधिकार छीनने की एक बड़ी कार्रवाई है और संसद में ‘फेडरलिज्म’ (संघवाद) पर खुली बहस होनी चाहिए।

चुनावी मौसम में ‘स्पेशल सेशन’ पर विपक्ष को ऐतराज यह पूरा विवाद केंद्र सरकार द्वारा ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ (महिला आरक्षण) को लागू करने के लिए लाए गए ड्राफ्ट अमेंडमेंट बिल को मंजूरी देने के बाद शुरू हुआ है।

विपक्ष का आरोप है कि महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन थोपा जा रहा है। विपक्षी दलों ने चुनावी मौसम के ठीक बीच में संसद का ‘विशेष सत्र’ (Special Session) बुलाने की जल्दबाजी और सरकार की मंशा पर भी कड़े सवाल उठाए हैं।

Santosh SETH

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