लोकसभा में पेश हुआ महिला आरक्षण और परिसीमन बिल, सदन में महिलाओं के लिए होंगी 273 सीटें | The Politics Again
महिला आरक्षण और परिसीमन पर लोकसभा में महासंग्राम: बिल पेश करने के पक्ष में 251 वोट, सदन में महिलाओं के लिए 273 सीटें होंगी आरक्षित
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
मोदी सरकार ने आज (16 अप्रैल) देश की ‘आधी आबादी’ को सबसे बड़ा तोहफा देते हुए लोकसभा में तीन अहम और ऐतिहासिक बिल पेश किए हैं।
इन बिलों का मुख्य उद्देश्य 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को पूरी तरह से लागू (Operationalize) करना है।
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने भारी हंगामे के बीच इन तीनों बिलों को लोकसभा के पटल पर रखा।
कौन से तीन बिल हुए पेश और क्या है सीटों का नया गणित?
सरकार द्वारा पेश किए गए तीन विधेयकों में ‘संविधान संशोधन विधेयक 2026’, ‘परिसीमन विधेयक 2026’ और ‘केंद्र शासित प्रदेश संशोधन विधेयक 2026’ शामिल हैं। इन बिलों के जरिए लोकसभा की रूपरेखा पूरी तरह बदलने वाली है:
कुल सीटें 850: लोकसभा सांसदों की कुल संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है।
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का हिस्सा: इनमें से 815 सीटें राज्यों के लिए और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) के लिए तय की जाएंगी।
महिलाओं के लिए आरक्षण: नई संरचना के तहत लोकसभा में 273 सीटें महिलाओं के लिए पूरी तरह आरक्षित होंगी। हर राज्य में सीटों की सटीक संख्या तय करने के लिए नए सिरे से परिसीमन किया जाएगा।
विपक्ष की मांग पर हुई वोटिंग: पक्ष में 251, विरोध में 185 वोट
बिलों को सदन में पेश करने के दौरान ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।
सरकार ने तीनों बिलों को पहले ध्वनि मत से पेश कराने की कोशिश की थी, लेकिन विपक्षी सदस्यों ने इसका कड़ा विरोध करते हुए मत विभाजन (Voting) की मांग की।
स्पीकर की अनुमति के बाद संविधान संशोधन बिल पेश करने के प्रस्ताव पर वोटिंग कराई गई:
प्रस्ताव के पक्ष में वोट: 251
प्रस्ताव के विरोध में वोट: 185
(इस प्रकार बहुमत से संविधान संशोधन बिल लाने का प्रस्ताव पास हो गया और अब इस पर विस्तृत चर्चा शुरू होगी।)
विपक्ष क्यों कर रहा है कड़ा विरोध?
विपक्षी दलों का स्पष्ट कहना है कि वे महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि इसके साथ जोड़े गए ‘परिसीमन’ (Delimitation) के तरीके के सख्त खिलाफ हैं।
असदुद्दीन ओवैसी का हमला: AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, “मैं संविधान संशोधन बिल का कड़ा विरोध करता हूं। यह बिल सिर्फ महिला आरक्षण के लिए नहीं है, यह संघवाद (Federalism) का विरोधी है।”
कांग्रेस सांसदों ने उठाए सवाल: छत्तीसगढ़ से कांग्रेस सांसद ज्योत्सना चरणदास ने बंगाल और तमिलनाडु के चुनावों के बीच इस बिल को लाने की टाइमिंग पर सवाल उठाया। उन्होंने 2029 के लिए 2011 की जनगणना (Census 2011) के आधार पर परिसीमन लागू करने को सरासर गलत ठहराया।
दक्षिण के राज्यों से अन्याय का आरोप: कांग्रेस सांसद डॉ. कडियाम काव्या ने सरकार की नीयत पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि यह बिल दक्षिण के राज्यों पर जबरन थोपा जा रहा है। उन्होंने कहा, “देश की जीडीपी में 30% योगदान देने वाले दक्षिण भारतीय राज्यों के साथ सीटों का यह अन्याय किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।”
संसद में आगे का शेड्यूल और PM मोदी का संबोधन
लोकसभा: इन विधेयकों पर विस्तृत चर्चा के लिए 18 घंटे का समय निर्धारित किया गया है। आज दोपहर 3 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सदन में इस पर अपना अहम भाषण देंगे। कल (17 अप्रैल) को चर्चा समाप्त होने के बाद बिलों पर फाइनल वोटिंग होगी।
राज्यसभा: लोकसभा से पास होने के बाद 18 अप्रैल को ये तीनों बिल राज्यसभा में पेश किए जाएंगे। उच्च सदन में चर्चा के लिए 10 घंटे का समय तय किया गया है और 18 अप्रैल को ही वहां वोटिंग करा ली जाएगी।
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