China Iran Military Ties

ईरान-इजराइल जंग में चीन की सीक्रेट एंट्री! – पढ़े विशेष रिपोर्ट

ईरान-इजराइल-अमेरिका जंग में चीन की ‘सीक्रेट’ एंट्री! युद्धविराम की आड़ में तेहरान को घातक हथियार देने की तैयारी

इस्लामाबाद/बीजिंग: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच एक बेहद चौंकाने वाली खुफिया रिपोर्ट सामने आई है। एक तरफ जहां इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम (सीजफायर) को लेकर कूटनीतिक बातचीत चल रही है, वहीं दूसरी तरफ इस जंग में अब चीन की ‘सीक्रेट एंट्री’ का सनसनीखेज दावा किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान इस सीजफायर के समय का इस्तेमाल शांत बैठने के लिए नहीं, बल्कि विदेशी ताकतों की मदद से अपनी सैन्य क्षमता को और अधिक घातक बनाने में कर रहा है और इसमें उसका सबसे बड़ा मददगार चीन बनकर उभर रहा है।

तीसरे देश के रास्ते हथियारों की सप्लाई की साजिश

खुफिया एजेंसियों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, चीन अगले कुछ ही हफ्तों में ईरान को नए और अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम सौंपने की तैयारी कर रहा है।

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर खुद को तटस्थ (Neutral) दिखाने वाला बीजिंग एक बेहद चालाक रणनीति पर काम कर रहा है।

सीधे तौर पर हथियार देने के बजाय, चीन इन हथियारों को किसी ‘तीसरे देश’ के रास्ते ईरान पहुंचाने की योजना बना रहा है, ताकि उस पर सीधे तौर पर कोई उंगली न उठ सके।

खतरनाक मैनपैड्स (MANPADS) से लैस होगा ईरान

सूत्रों का दावा है कि चीन ईरान को कंधे से दागे जाने वाले घातक एंटी-एयर मिसाइल सिस्टम यानी ‘मैनपैड्स’ (MANPADS) देने जा रहा है।

ये हथियार कम ऊंचाई पर उड़ान भरने वाले लड़ाकू विमानों (फाइटर जेट्स) और हेलीकॉप्टरों के लिए काल माने जाते हैं।

गौरतलब है कि पिछले पांच हफ्तों तक चले भीषण संघर्ष में इन्हीं सिस्टम्स ने कम ऊंचाई वाले अमेरिकी एयरक्राफ्ट्स के लिए सबसे बड़ा खतरा पैदा किया था।

हाल ही में एक अमेरिकी F-15 फाइटर जेट को मार गिराए जाने की घटना ने इस खतरे को और पुख्ता कर दिया है।

बताया जा रहा है कि इसे एक हैंड-हेल्ड हीट-सीकिंग मिसाइल से ही निशाना बनाया गया था। हालांकि अभी यह पुष्टि नहीं हुई है कि वह मिसाइल चीनी तकनीक से बनी थी या नहीं, लेकिन यदि ऐसा साबित होता है, तो यह बीजिंग की इस युद्ध में सीधी भागीदारी का सबसे बड़ा सबूत होगा।

कूटनीतिक चुनौती और चीन की तेल निर्भरता

चीन और ईरान के बीच ‘ड्यूल यूज टेक्नोलॉजी’ (दोहरे उपयोग वाली तकनीक) का साझा इतिहास पुराना है, लेकिन सीधे एयर डिफेंस सिस्टम का ट्रांसफर इस सहयोग को एक खतरनाक स्तर पर ले जाएगा।

यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब अगले महीने बीजिंग में डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच एक अहम मुलाकात होने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन खुले तौर पर अमेरिका और इजराइल से सीधे टकराव का जोखिम नहीं लेना चाहता।

लेकिन ईरान से अपनी भारी ऊर्जा और तेल निर्भरता के कारण वह तेहरान को नाराज भी नहीं कर सकता।

चीन ने दावों को किया खारिज, रूस की भूमिका भी संदिग्ध

वाशिंगटन स्थित चीनी दूतावास ने इन खुफिया रिपोर्ट्स और दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। चीनी प्रवक्ता ने इन्हें बेबुनियाद बताते हुए कहा कि चीन एक जिम्मेदार देश है और उसने इस संघर्ष में किसी भी पक्ष को हथियार मुहैया नहीं कराए हैं।

उनका दावा है कि चीन केवल शांति और सीजफायर बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, कूटनीतिक हलकों में तस्वीर अब साफ होने लगी है।

जहां एक तरफ रूस अपनी खुफिया जानकारी ईरान के साथ साझा कर रहा है ताकि अमेरिकी और इजराइली विमानों को काउंटर किया जा सके, वहीं अब चीन द्वारा सैन्य क्षमता बढ़ाने में मदद की खबरें आ रही हैं।

इससे यह स्पष्ट हो गया है कि यह जंग अब सिर्फ ईरान, अमेरिका और इजराइल तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह एक बड़े वैश्विक गुटबाजी का रूप ले चुकी है।

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