ब्रेकिंग: लोकसभा में अब होंगी 850 सीटें, 2029 से लागू होगा नया परिसीमन
संसद के ‘महा-विस्तार’ की तैयारी: लोकसभा में अब होंगी 850 सीटें, 2029 से लागू होगा नया फॉर्मूला; सरकार के ड्राफ्ट पर विपक्ष ने खड़े किए सवाल
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
केंद्र सरकार भारतीय संसदीय इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव करने जा रही है। सरकार ने लोकसभा का व्यापक विस्तार करते हुए सीटों की कुल संख्या को मौजूदा 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव रखा है।
इस ऐतिहासिक कदम को अमलीजामा पहनाने के लिए सरकार ने सांसदों को संवैधानिक संशोधन विधेयक का ड्राफ्ट (मसौदा) भी भेज दिया है।
उम्मीद जताई जा रही है कि संसदीय प्रतिनिधित्व का यह नया गणित 2029 के आम चुनावों से प्रभावी हो जाएगा।
सीटों का नया गणित:
राज्यों को 815, केंद्र शासित प्रदेशों को 35 सरकार द्वारा प्रस्तावित ड्राफ्ट के अनुसार, लोकसभा की नई संरचना में सीटों का वितरण इस प्रकार होगा:
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कुल लोकसभा सीटें: 850 (वर्तमान में 543)
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राज्यों के लिए आरक्षित: 815 सीटें
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केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) के लिए आरक्षित: 35 सीटें
विशेष सत्र में पेश होगा बिल, 16 अप्रैल को चर्चा
इस बड़े संवैधानिक बदलाव को पारित कराने के लिए संसद के बजट सत्र को बढ़ा दिया गया है और इसके लिए तीन दिन का एक ‘विशेष सत्र’ (16 से 18 अप्रैल) आयोजित किया जा रहा है।
16 अप्रैल को इस प्रस्तावित संवैधानिक संशोधन विधेयक पर संसद में विस्तृत चर्चा होनी है।
विपक्ष ने खोला मोर्चा: 2011 की जनगणना और ‘कोटे में कोटा’ पर एतराज
सरकार के इस परिसीमन (Delimitation) प्रस्ताव पर ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन ने गंभीर चिंताएं व्यक्त की हैं और इसे चुनौती देने की पूरी तैयारी कर ली है। विपक्ष की मुख्य आपत्तियां इस प्रकार हैं:
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जनगणना का आधार: आम आदमी पार्टी (AAP), आरजेडी, टीएमसी और डीएमके सहित कई दलों का तर्क है कि परिसीमन के लिए 2011 की जनगणना के आंकड़ों का इस्तेमाल अनुचित है। यह 2021 की अद्यतन (अपडेटेड) जनगणना के आंकड़ों पर आधारित होना चाहिए।
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कोटे के भीतर कोटा: विपक्षी दल पिछड़े वर्गों (OBC) की महिलाओं के लिए महिला आरक्षण में ‘कोटे के भीतर कोटा’ की लंबे समय से चली आ रही मांग पर सरकार से स्पष्टीकरण चाहते हैं।
इन मुद्दों पर सरकार को घेरने की ठोस रणनीति बनाने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के दिल्ली स्थित आवास पर विपक्षी नेताओं की एक अहम बैठक बुलाई गई है, जिसमें पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी टीएमसी और तमिलनाडु की डीएमके भी शामिल होगी।
डेरेक ओ’ब्रायन का सवाल: “विधेयक की कॉपी कहां है?”
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने सरकार की नीयत और सत्र की टाइमिंग पर तीखे सवाल उठाए हैं।
उन्होंने कहा, “प्रस्तावित संशोधन महिला आरक्षण लागू करने के बजाय परिसीमन पर अधिक केंद्रित लग रहे हैं। 16 अप्रैल को चर्चा होनी है, लेकिन विधेयक की आधिकारिक प्रति (Copy) कहां है?” उन्होंने राज्य विधानसभा चुनावों से ठीक पहले इस सत्र को बुलाए जाने पर भी संदेह जताया।
संख्या बल का खेल: दो-तिहाई बहुमत की होगी जरूरत
चूंकि यह एक संवैधानिक संशोधन विधेयक है, इसलिए इसे पारित कराने के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली सरकार को संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई (2/3) बहुमत की आवश्यकता होगी।
विपक्ष इसी ‘संख्या बल’ के आधार पर सरकार पर दबाव बनाने और अपनी मांगें मनवाने की रणनीति पर काम कर रहा है।










