राम मंदिर ट्रस्ट के नए कार्यवाहक महासचिव कृष्ण मोहन

राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा बदलाव: कृष्ण मोहन बने नए कार्यवाहक महासचिव

राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: चंपत राय का इस्तीफा मंजूर, पूर्व IFS कृष्ण मोहन बने नए कार्यवाहक महासचिव”

अयोध्या : THE POLITICS AGAIN डेस्क: संतोष सेठ की रिपोर्ट

अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Shri Ram Janmbhoomi Teerth Kshetra Trust) में आज एक बहुत बड़ा प्रशासनिक बदलाव देखने को मिला है।

चंदा चोरी विवाद के बाद ट्रस्ट ने कड़ा कदम उठाते हुए महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे को आधिकारिक रूप से स्वीकार कर लिया है।

उनके स्थान पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ पदाधिकारी और भारतीय वन सेवा (IFS) के पूर्व अधिकारी कृष्ण मोहन को ट्रस्ट का नया कार्यवाहक महासचिव (Acting General Secretary) नियुक्त किया गया है।

अब मंदिर के प्रशासनिक और संगठनात्मक कार्यों की पूरी कमान कृष्ण मोहन के हाथों में होगी।

जानिए कौन हैं कृष्ण मोहन?

73 वर्षीय कृष्ण मोहन मूल रूप से उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के रहने वाले हैं।

  • शिक्षा और पेशेवर जीवन: उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से अपनी उच्च शिक्षा पूरी की। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत भारत सरकार के परमाणु ऊर्जा विभाग से की।

  • इसके बाद वह भारतीय वन सेवा (IFS) में शामिल हुए और साल 2012 में वन सेवा से सेवानिवृत्त (Retire) हुए।

  • संघ में भूमिका: वन सेवा से रिटायर होने के बाद वह पूरी तरह से सामाजिक और संगठनात्मक कार्यों में सक्रिय हो गए।

  • वर्तमान में कृष्ण मोहन आरएसएस (RSS) के पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के ‘क्षेत्र संघ चालक’ (क्षेत्र प्रभारी) की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

2025 में बने थे राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य

कृष्ण मोहन को उनके लंबे प्रशासनिक और संगठनात्मक अनुभव को देखते हुए साल 2025 में ही राम मंदिर ट्रस्ट का सदस्य बनाया गया था।

उन्होंने ट्रस्ट में पूर्व सदस्य कामेश्वर चौपाल का स्थान लिया था। तब से लेकर अब तक वह मंदिर निर्माण और प्रशासनिक व्यवस्थाओं में सक्रिय रूप से अपनी सेवाएं दे रहे थे।

नई जिम्मेदारियां: चंदे की निगरानी पर रहेगा सबसे ज्यादा जोर

महासचिव का पदभार ग्रहण करने के बाद कृष्ण मोहन के सामने कई बड़ी चुनौतियां और जिम्मेदारियां होंगी:

  • दैनिक प्रशासन: मंदिर के दैनिक प्रबंधन, परियोजनाओं का समन्वय और बैठकों का सुचारू संचालन।

  • चंदे में पारदर्शिता: चंदा विवाद से सबक लेते हुए, अब राम मंदिर में चढ़ने वाले चढ़ावे और दान (Donation) में पूरी पारदर्शिता लाना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी। दान की कड़ाई से निगरानी की जाएगी।

  • विकास कार्य: दिन-प्रतिदिन बढ़ रही श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए मंदिर परिसर के विकास कार्यों को गति देना भी उनके अहम कार्यों में शामिल होगा।

राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में माना जा रहा है कि कृष्ण मोहन के लंबे प्रशासनिक अनुभव से राम मंदिर ट्रस्ट के कामकाज में और अधिक तेजी तथा पारदर्शिता आएगी।

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