US, UK and France block China and Pakistan proposal on BLA in UNSC

UNSC में अमेरिका का कूटनीतिक मास्टरस्ट्रोक: चीन-पाक को बड़ा झटका

🌐 UNSC में कूटनीतिक ‘मास्टरस्ट्रोक’: बलूचिस्तान के मुद्दे पर अमेरिका ने दिया चीन और पाकिस्तान को करारा झटका”

नई दिल्ली : द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के गलियारों में हाल ही में एक ऐसा कूटनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला है, जिसने वैश्विक भू-रणनीति (Geopolitics) की पूरी बिसात को हिलाकर रख दिया है।

पाकिस्तान और चीन ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) और उसकी ‘मजीद ब्रिगेड’ को संयुक्त राष्ट्र की वैश्विक आतंकी सूची में शामिल करवाने का साझा प्रस्ताव पेश किया था।

लेकिन, उनकी इस चाल को अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन (जिन्हें P3 देश कहा जाता है) ने अपने वीटो (तकनीकी रोक) का इस्तेमाल करके पूरी तरह नाकाम कर दिया है।

‘The Politics Again’ की इस विशेष रिपोर्ट में आइए समझते हैं इस जटिल भू-राजनीतिक खेल और अंतरराष्ट्रीय पटल पर इसके दूरगामी परिणामों को।

🧐 सबसे बड़ा विरोधाभास: अमेरिका का दोहरा या रणनीतिक रुख?

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे चौंकाने वाला पहलू अमेरिका का अपना रुख है, जो पहली नजर में विरोधाभासी लग सकता है, लेकिन इसके पीछे एक गहरी रणनीति छिपी है:

  • 2019 का वाशिंगटन का फैसला: यह बात जगजाहिर है कि अमेरिका खुद साल 2019 में BLA और बाद में उसकी मजीद ब्रिगेड को ‘विशेष वैश्विक आतंकी’ (SDGT) घोषित कर चुका है।

  • UNSC में बदल गया स्टैंड: इसके बावजूद, जब यही प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र के मंच पर बीजिंग और इस्लामाबाद की तरफ से लाया गया, तो अमेरिका ने इसका समर्थन करने से साफ इनकार कर दिया।

  • यह स्पष्ट संकेत है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ‘आतंकवाद’ पर लिए जाने वाले फैसले केवल सैद्धांतिक नहीं होते, बल्कि वे सामरिक कूटनीति के तराजू पर तौले जाते हैं।

🎯 पश्चिमी देशों ने क्यों उठाया यह कदम? (असली कारण)

इस फैसले के पीछे आतंकवाद के खात्मे से ज्यादा, वैश्विक महाशक्तियों का शक्ति-प्रदर्शन और कूटनीतिक दांव-पेच शामिल है:

  1. चीन को उसी की भाषा में जवाब (Tit-for-Tat): चीन वर्षों से UNSC में अपनी वीटो पावर का दुरुपयोग करते हुए भारत और अमेरिका द्वारा लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के खूंखार आतंकी आकाओं (जैसे साजिद मीर, अब्दुल रऊफ असगर) पर प्रतिबंध लगाने के प्रयासों को रोकता रहा है। अमेरिका और पश्चिमी देशों का यह कदम सीधे तौर पर चीन के उसी ‘दोहरे मापदंड’ का एक करारा कूटनीतिक पलटवार है।

  2. CPEC और हिंद महासागर पर दबाव: चीन ने ‘चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे’ (CPEC) और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण ‘ग्वादर पोर्ट’ पर अरबों डॉलर का निवेश किया है। बलूच विद्रोही लगातार इन चीनी परियोजनाओं को अपना निशाना बना रहे हैं। पश्चिमी देश यह कड़ा संदेश देना चाहते हैं कि हिंद महासागर और इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में चीन का निर्बाध सामरिक विस्तार बिना किसी चुनौती के बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

📉 पाकिस्तान और चीन के लिए इस वीटो के मायने

इस वीटो ने इस्लामाबाद और बीजिंग दोनों के कूटनीतिक खेमों में हलचल मचा दी है। इसके प्रभाव बेहद व्यापक और गंभीर होने वाले हैं:

पाकिस्तान के लिए झटके:

  • छिन गया नैतिक आधार: पाकिस्तान बलूचिस्तान में लंबे समय से सैन्य दमन की नीति अपना रहा है। यदि UNSC से BLA को वैश्विक आतंकी घोषित कर दिया जाता, तो पाकिस्तान को अपने क्रूर सैन्य अभियानों के लिए दुनिया से एक ‘क्लीन चिट’ मिल जाती, जो अब संभव नहीं है।

  • बलूच विद्रोहियों का बढ़ा मनोबल: इस अंतरराष्ट्रीय फैसले से बलूच राष्ट्रवादियों के बीच यह संदेश गया है कि पश्चिमी दुनिया पूरी तरह से पाकिस्तान के पाले में खड़ी नहीं है। इससे उनके आंदोलन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई ऊर्जा और चर्चा मिलनी तय है।

चीन के लिए बढ़ती मुश्किलें:

  • सुरक्षा का भारी भरकम खर्च: चीनी नागरिकों और इंजीनियरों (हालिया कराची हमला और ग्वादर पोर्ट हमले) पर बढ़ते खतरे के बीच, चीन को अब अपनी महात्वाकांक्षी परियोजनाओं की सुरक्षा के लिए और अधिक आर्थिक और सैन्य संसाधन पाकिस्तान में झोंकने पड़ेंगे।

  • रणनीतिक असुरक्षा का अहसास: बीजिंग को यह कड़ा संदेश मिल गया है कि CPEC का रास्ता अब सुरक्षित नहीं है और अंतरराष्ट्रीय पटल पर वह हर बार अपने हित मनवाने में सफल नहीं हो सकता।

📝 निष्कर्ष

संयुक्त राष्ट्र का यह घटनाक्रम इस बात का अकाट्य प्रमाण है कि आज की वैश्विक राजनीति में ‘आतंकवाद’ की परिभाषा भी सामरिक और राष्ट्रीय हितों से तय होती है।

पाकिस्तान और चीन ने जिस प्रस्ताव को अपनी कूटनीतिक जीत का आसान जरिया माना था, वह दांव उन्हीं पर भारी पड़ गया है।

बलूचिस्तान अब महज पाकिस्तान का एक आंतरिक मसला नहीं रह गया है, बल्कि यह एशिया की सबसे बड़ी और विस्फोटक भू-राजनीतिक बिसात का एक सक्रिय केंद्र बन चुका है।