कांचरापाड़ा के हरनेट स्कूल से बरामद ₹1.77 करोड़ कैश और पुलिस की जांच

पश्चिम बंगाल: कांचरापाड़ा के स्कूल में मिला ₹1.77 करोड़ कैश, 2 गिरफ्तार

पश्चिम बंगाल: शिक्षा के मंदिर में मिला ₹1.77 करोड़ का ‘खजाना’, कैशियर सहित 2 गिरफ्तार; ब्लैकमनी का गहराया शक”

उत्तर 24 परगना (पश्चिम बंगाल): द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले से एक बेहद हैरान करने वाला और सनसनीखेज मामला सामने आया है।

यहां कांचरापाड़ा की फोरमैन कॉलोनी स्थित एक नामी स्कूल ‘हरनेट इंग्लिश मीडियम स्कूल’ के बंद कमरे से पुलिस ने भारी मात्रा में नकदी बरामद की है।

शिक्षा के मंदिर से करोड़ों रुपये का कैश मिलने के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है।

इस हाई-प्रोफाइल मामले को लेकर स्थानीय लोगों और स्कूल प्रशासन के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए स्कूल के दो कर्मचारियों को गिरफ्तार कर लिया है।

📊 क्राइम फाइल: एक नज़र में

विवरण

जानकारी

स्थान

कांचरापाड़ा, उत्तर 24 परगना (पश्चिम बंगाल)

स्कूल का नाम

हरनेट इंग्लिश मीडियम स्कूल

बरामद कुल नकद

₹1.77 करोड़

गिरफ्तार आरोपी

अविक नाथ (कैशियर) और सायन घोष (असिस्टेंट अकाउंटेंट)

कार्रवाई करने वाली टीम

बीजपुर पुलिस स्टेशन

 

🚨 पुलिस की छापेमारी और नोटों का जखीरा

बीजपुर पुलिस स्टेशन को एक गुप्त सूत्र (Secret Source) से सूचना मिली थी कि स्कूल के एक लंबे समय से बंद पड़े कमरे में कुछ संदिग्ध गतिविधियां चल रही हैं और वहां बड़ा माल छिपा हो सकता है।

  • देर रात हुई रेड: सूचना के आधार पर पुलिस की एक विशेष टीम ने बुधवार देर रात स्कूल के उस बंद कमरे में अचानक छापा मारा।

  • मंगवानी पड़ीं 3 मशीनें: कमरे का ताला टूटते ही पुलिस की टीम दंग रह गई। वहां नोटों का जखीरा इतना बड़ा था कि उन्हें हाथों से गिनना असंभव था। इसके बाद नोट गिनने के लिए तत्काल 3 मशीनें मंगवाई गईं।

  • सुबह तक चली गिनती: रात भर चली इस मैराथन कार्रवाई में सुबह 5:30 बजे तक नोटों की गिनती पूरी हुई, जिसमें कुल 1.77 करोड़ रुपये की भारी-भरकम नकदी बरामद की गई।

🔗 दो कर्मचारियों की हुई गिरफ्तारी

करोड़ों रुपये की इस बेहिसाब बरामदगी के तुरंत बाद पुलिस ने स्कूल के दो मुख्य कर्मचारियों को मौके से ही गिरफ्तार कर लिया:

  1. अविक नाथ (कैशियर)

  2. सायन घोष (असिस्टेंट अकाउंटेंट)

अहम बात: पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में कैशियर अविक नाथ कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं दे सका।

वह पुलिस को यह समझाने में पूरी तरह विफल रहा कि इतनी भारी मात्रा में नकद रकम स्कूल के एक बंद कमरे में क्यों और कैसे रखी गई थी।

🗣️ आरोपों और दावों का दौर: ब्लैकमनी या फीस?

इस भारी नकदी के सामने आने के बाद मामले में दो अलग-अलग पक्ष और दावे सामने आए हैं, जिसने मामले को राजनीतिक और प्रशासनिक रूप से उलझा दिया है:

1. स्थानीय लोगों का दावा (काले धन का आरोप):

इलाके के स्थानीय निवासियों ने सीधा आरोप लगाया है कि यह पैसा कांचरापाड़ा म्युनिसिपैलिटी के म्युनिसिपल प्रधान कमल अधिकारी का है।

कमल अधिकारी वर्तमान में हरनेट स्कूल के प्रेसिडेंट (अध्यक्ष) भी हैं। स्थानीय लोगों का मजबूती से दावा है कि यह पूरी रकम ‘ब्लैकमनी’ (काले धन) है, जिसे सुरक्षित ठिकाना मानकर स्कूल के बंद कमरे में छिपाकर रखा गया था।

2. स्कूल प्रिंसिपल की सफाई:

इन गंभीर आरोपों के बीच स्कूल के प्रिंसिपल विकास चंद्र पाल ने स्कूल का बचाव करते हुए अपनी सफाई पेश की है। उनका कहना है:

“यह रकम स्कूल में एडमिशन लिए गए बच्चों की प्रवेश फीस और किताबों की बिक्री का पैसा है। अकाउंट सेक्शन के कर्मचारियों की लापरवाही के कारण इस पैसे को सही समय पर बैंक में जमा नहीं किया जा सका था, जिसके कारण यह रकम कमरे में रखी हुई थी।”

⚖️ पुलिस की आगे की कार्रवाई और जांच

इस हाई-प्रोफाइल मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने केंद्रीय बलों (Central Force) की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच बरामद किए गए नोटों के बंडलों को जब्त कर लिया है।

पुलिस ने मामले की विस्तृत और गहन जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में स्कूल प्रबंधन, म्युनिसिपल प्रधान कमल अधिकारी और अन्य संबंधित लोगों से भी कड़ी पूछताछ की जाएगी।

जांच का मुख्य फोकस इस बात का पता लगाना है कि स्कूल के बंद कमरे में इतनी भारी भरकम रकम आखिर कहां से आई, इसका असली स्रोत क्या है, और क्या यह वास्तव में छात्रों की फीस है या किसी बड़े भ्रष्टाचार का काला धन।