बंगाल के बाद ‘मिशन पंजाब’ पर BJP, अमित शाह संभालेंगे कमान
बंगाल फतह के बाद अब ‘मिशन पंजाब’ पर BJP: अमित शाह खुद संभालेंगे कमान, ‘नशे’ के खिलाफ पूरे राज्य में निकलेगी बड़ी यात्रा”
चंडीगढ़/नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
पश्चिम बंगाल में ‘कमल’ खिलाने का सपना साकार होने के बाद, उत्साह से लबरेज भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अब पंजाब को भगवामय करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंकने की तैयारी कर ली है।
पार्टी आलाकमान ने ‘बंगाल मॉडल’ की तर्ज पर ही पंजाब में अपनी जड़ें मजबूत करने का ब्लू-प्रिंट तैयार कर लिया है।
इस बड़े सियासी अभियान को गति देने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा के ‘चाणक्य’ माने जाने वाले अमित शाह इसी महीने (जून) से पंजाब की सियासत की नब्ज टटोलने और संगठन को जमीनी स्तर पर सक्रिय करने की मुहिम में जुटेंगे।
जून में ही नियुक्त होंगे प्रभारी, माझा, दोआबा और मालवा पर फोकस
पार्टी सूत्रों के अनुसार, बंगाल की तरह ही भाजपा जून महीने में पंजाब की सभी विधानसभा सीटों के लिए प्रभारियों की नियुक्ति कर देगी।
राज्य के तीन अहम चुनावी क्षेत्रों—माझा, दोआबा और मालवा के लिए अलग-अलग प्रभारी नियुक्त किए जाएंगे, ताकि क्षेत्रीय समीकरणों को साधा जा सके।
बंगाल में ‘घुसपैठ’, पंजाब में ‘ड्रग्स’ बनेगा मुख्य मुद्दा
भाजपा की रणनीति में सीमावर्ती राज्यों की सुरक्षा हमेशा से अहम रही है। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि जिस तरह बंगाल में बांग्लादेशी घुसपैठ राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा था, उसी तरह पंजाब में पाकिस्तान से आ रही ड्रग्स (नशा) सबसे बड़ी चुनौती है।
बंगाल में घुसपैठ को मुद्दा बनाकर भाजपा ने ‘परिवर्तन यात्राएं’ निकाली थीं। अब पंजाब में ड्रग्स रैकेट को खत्म करने में आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार की ‘विफलता’ को भुनाने के लिए भाजपा पूरे राज्य में ‘नशामुक्त पंजाब यात्रा’ निकालेगी।
शून्य सीट, फिर भी बंपर वोट शेयर से जगी उम्मीद
हालिया लोकसभा चुनाव में सुनील जाखड़, कैप्टन अमरिंदर सिंह और रवनीत सिंह बिट्टू जैसे दिग्गजों के शामिल होने के बावजूद भाजपा का पंजाब में खाता नहीं खुल सका था।
लेकिन, पार्टी के लिए सबसे बड़ी उम्मीद उसका 18.56 फीसदी वोट शेयर रहा है। यह सबसे ज्यादा 7 सीटें जीतने वाली कांग्रेस और 3 सीटें जीतने वाली ‘आप’ से केवल 8 फीसदी कम था।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि आगामी चुनाव में नवजोत सिंह सिद्धू के परिवार और हरभजन सिंह जैसे मजबूत सिख चेहरों के साथ भाजपा जमीनी स्तर पर बड़े बदलाव की उम्मीद कर रही है।
शिरोमणि अकाली दल (SAD) से गठबंधन पर क्या है रणनीति?
पार्टी सार्वजनिक रूप से भले ही अपने सबसे पुराने सहयोगी शिरोमणि अकाली दल (SAD) के साथ गठबंधन से इनकार कर रही हो, लेकिन हकीकत में भाजपा अपनी ‘शर्तों’ पर इसे अंजाम देने की योजना बना रही है।
बीते लोकसभा चुनाव में भाजपा का वोट शेयर अकाली दल से अधिक रहा है। ऐसे में यदि अकाली दल ‘बराबर’ (50-50) सीटों पर लड़ने के लिए राजी होता है, तभी गठबंधन के दरवाजे खुल सकते हैं।
मान सरकार पर भ्रष्टाचार का प्रहार, AAP में बिखराव का दावा
भ्रष्टाचार के मोर्चे पर भी भाजपा मान सरकार को घेरने की तैयारी में है। राज्य सरकार के कई मंत्रियों के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों ने जांच शुरू कर दी है और जल्द ही कुछ अन्य मंत्रियों पर भी बड़ी कार्रवाई हो सकती है।
इसके अलावा, 7 राज्यसभा सांसदों के आम आदमी पार्टी छोड़ने और हाल ही में सीएम भगवंत मान के भाई के भाजपा में शामिल होने से पार्टी यह मानकर चल रही है कि राज्य में ‘आप’ के बिखरने की धारणा अब पूरी तरह मजबूत हो चुकी है।











