उत्तर प्रदेश के इस साइबर पुलिस अधिकारी से छूटते है साइबर अपराधियों के पसीने, डीजीपी ने मैडल देकर किया सम्मानित

“साइबर सुपर कॉप ओपी जायसवाल को मिला डीजीपी का सिल्वर मेडल, सिल्वर मेडल प्राप्त कर बढ़ाया साइबर सेल का सम्मान”
नई दिल्ली 16 / 08 / 2024 संतोष सेठ की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश के तेज़ तर्रार हेड कांस्टेबल एवं साइबर सेल में तैनात ओपी जायसवाल आज उत्तर प्रदेश पुलिस में स्थापित साइबर सेल में एक जाना माना नाम है।
आज के जमाने में साइबर सुरक्षा हमारी जानकारी सुरक्षित रखने के लिए सबसे बड़ी आवश्यकता बन गयी है।
सभी के साथ आये दिन ऑनलाइन धोखाधड़ी, ब्लैकमेलिंग, स्पैमिंग, भड़काने वाले कमेंट्स, हैकिंग आदि अब बहुत ही आम बात हो गई हैं। इससे निपटने की सख्त से सख्त जरुरत है।
सरकार भी इन सभी अपराधों से निपटने के लिए विभिन्न प्रकार के नियम बना रही है। और उन्हें लागू भी कर रही हैं । लेकिन इसके बावजूद ये अपराध कम नहीं हो रहे हैं।
ऐसे में अब तक कई करोड़ रूपये के ठगी से बचाने वाले इस सुपर सिपाही की चर्चा तब तेज़ हो गई जब पुलिस सेवा में उत्कृष कार्य करने के लिए डीजीपी द्वारा सिल्वर मैडल से नवाज़ा गया।
साइबर ठगो द्वारा रचित षड्यंत्र के जाल को तोड़कर लोगो के जा चुके पैसे को वापस दिलाना कोई आसान काम नहीं है।
दिन रात मेहनत करके हजारो हजार लोगो को साइबर फ्रॉड से बचा कर उनके मेहनत के पैसे वापस दिलाना ईमानदारी की बेहतरीन मिसाल है।
जौनपुर में कार्य करते हुए श्री जायसवाल ने हत्या सहित कई सारे ब्लाइंड अपराधों को बेनकाब करके अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है, और अब अपनी सेवाएं आजमगढ़ पुलिस को दे रहे है।
पुलिस में उत्तम सेवा देने के लिए स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश के डीजीपी प्रशांत कुमार द्वारा सिल्वर मेडल देकर ओ पी जायसवाल को सम्मानित किया गया।
उन्होंने करोड़ों रुपए ठगों के चंगुल से वापस कराये है। आजमगढ़ में पोस्टिंग से पहले वह जौनपुर जिले में अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
साइबर सेल में रहते हुए उन्होंने हर फरियादी की मदद की और उनका खोया हुआ मोबाइल, ऑनलाइन या जालसाजी के शिकार हुए लोगों के पैसे वापस कराया है।
सिल्वर मेडल मिलने की खुशी विभागीय अमले में भी छाई रही। आजमगढ़ साइबर सेल, आजमगढ़ पुलिस के जवानों ने अपने साथी को खूब बधाई दी।
भारत के बहुत कम शहरों में साइबर अपराध से लड़ने के लिए सेल्स बनाये गए हैं । भारत में साइबर न्यायालयों की संख्या भी बहुत कम है।
लोग इसके प्रति जागरूक नही है जिससे वह रिपोर्ट नहीं कर पाते हैं। हमारा डेटा भारत के बाहर संरक्षित रहता हैं ।
साथ ही बढ़ते ऑनलाइन लेन-देन, गेमिंग ने साइबर अपराधियों के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन का काम किया है।
साइबर अपराधों के प्रति लोगो को जागरूक करने और इनसे बचने के लिए जनता को सतर्क करना जरूरी है ।
ओपी जायसवाल द्वारा सुझाये गए कुछ सुरक्षा उपाय :
हमें कभी भी किसी अनजान व्यक्ति की बैंक या अन्य किसी भी पासवर्ड को साझा नही करना चाहिए, अनजान नंबरों से आने वाले कॉल या मैसेज को क्लिक नही करके उसे नजरंदाज कर देना चाहिए
मजबूत पासवर्ड का उपयोग करें: अपने सभी ऑनलाइन खातों के लिए मजबूत और अलग-अलग पासवर्ड का उपयोग करें। पासवर्ड में अक्षर, संख्या, और विशेष वर्णों का मिश्रण हो।
दो-स्तरीय प्रमाणीकरण (2FA) सक्षम करें: यह एक अतिरिक्त सुरक्षा परत जोड़ता है, जो आपके खाते तक पहुंच प्राप्त करने के लिए पासवर्ड के अलावा एक और पहचान तत्व की मांग करता है।
सॉफ़्टवेयर और एंटीवायरस अपडेट रखें: अपने ऑपरेटिंग सिस्टम, ब्राउज़र, और एंटीवायरस सॉफ़्टवेयर को नियमित रूप से अपडेट करें ताकि आपके उपकरण नवीनतम सुरक्षा पैच के साथ सुरक्षित रहें।
फिशिंग से सावधान रहें: ईमेल या संदेशों में दिए गए लिंक पर क्लिक करने से पहले उनकी वैधता की जांच करें। अज्ञात स्रोतों से प्राप्त ईमेल और लिंक को न खोलें।
सुरक्षित नेटवर्क का उपयोग करें: सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क का उपयोग करते समय सावधान रहें। यदि संभव हो, तो वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) का उपयोग करें।
सावधानी से व्यक्तिगत जानकारी साझा करें: केवल आवश्यक और विश्वसनीय साइटों पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा करें। सोशल मीडिया पर अत्यधिक व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से बचें।
संगठनों और सेवाओं से निगरानी: अपने वित्तीय खातों और अन्य महत्वपूर्ण खातों की नियमित निगरानी करें ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि का पता चल सके।
डिजिटल सुरक्षा प्रशिक्षण लें: अपने और अपने परिवार को साइबर सुरक्षा के बुनियादी पहलुओं के बारे में शिक्षित करें, जैसे कि मजबूत पासवर्ड का निर्माण और सुरक्षित ब्राउज़िंग प्रथाओं का पालन करना।
“साइबर अपराधी विभिन्न तरीकों से फ्रॉड (धोखाधड़ी) करते हैं। यहाँ कुछ सामान्य तरीकों की सूची दी गई है”
फिशिंग (Phishing): अपराधी ईमेल, संदेश, या वेबसाइट के माध्यम से उपयोगकर्ताओं को धोखा देने की कोशिश करते हैं। वे आमतौर पर एक विश्वसनीय स्रोत जैसे बैंक या कंपनी का रूप धारण करते हैं और उपयोगकर्ताओं से संवेदनशील जानकारी जैसे पासवर्ड, क्रेडिट कार्ड नंबर, या अन्य व्यक्तिगत जानकारी मांगते हैं।
स्पूफिंग (Spoofing): इसमें अपराधी किसी अन्य व्यक्ति या संगठन की पहचान का दुरुपयोग करते हैं। वे एक वास्तविक व्यक्ति या संस्था की तरह दिखने के लिए फर्जी ईमेल पते, फोन नंबर या वेबसाइट का उपयोग करते हैं, जिससे उन्हें विश्वासपात्र के रूप में देखा जाता है।
मैलवेयर (Malware): अपराधी वायरस, रैंसमवेयर, स्पाइवेयर, और अन्य प्रकार के मैलवेयर का उपयोग करके उपयोगकर्ताओं के कंप्यूटर या स्मार्टफोन में अवैध रूप से प्रवेश करते हैं। ये मैलवेयर डेटा चुराने, सिस्टम को लॉक करने, या अन्य हानिकारक कार्य करने के लिए डिज़ाइन किए गए होते हैं।
रैंसमवेयर (Ransomware): इस प्रकार के मैलवेयर डेटा को एन्क्रिप्ट कर देता है और फिर उपयोगकर्ता से डेटा को पुनः प्राप्त करने के लिए फिरौती की मांग करता है। यदि उपयोगकर्ता फिरौती का भुगतान नहीं करता, तो डेटा को फिर से एक्सेस नहीं किया जा सकता।
सामाजिक इंजीनियरिंग (Social Engineering): अपराधी लोगों को धोखा देने के लिए उनके विश्वास का दुरुपयोग करते हैं। वे अक्सर यह जानकारी प्राप्त करने के लिए काम करते हैं कि आप क्या जानते हैं या आपके संपर्क कौन हैं, ताकि वे अधिक प्रभावी ढंग से हमला कर सकें।
ड्रॉप बॉक्स स्कैम (Drop Box Scam): अपराधी उपयोगकर्ताओं को एक लिंक भेजते हैं जो एक फर्जी ड्रॉप बॉक्स या क्लाउड स्टोरेज पेज पर ले जाता है। इस पेज पर उपयोगकर्ताओं को अपनी व्यक्तिगत जानकारी भरने के लिए कहा जाता है।
ऑनलाइन शॉपिंग फ्रॉड (Online Shopping Fraud): अपराधी फर्जी ई-कॉमर्स वेबसाइटों का निर्माण करते हैं या किसी वास्तविक वेबसाइट को नकल करते हैं। उपयोगकर्ता उत्पाद खरीदने के बाद उन्हें नकली उत्पाद प्राप्त होते हैं या कोई उत्पाद प्राप्त नहीं होता।
क्रेडिट कार्ड स्कीमिंग (Credit Card Skimming): अपराधी विशेष उपकरणों का उपयोग करके एटीएम या अन्य कार्ड रीडरों से क्रेडिट कार्ड की जानकारी चुराते हैं।
क्लोनिंग (Cloning): अपराधी किसी वास्तविक वेबसाइट या एप्लिकेशन का क्लोन बनाते हैं और उपयोगकर्ताओं को फर्जी वेबसाइट पर ले जाकर उनकी व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी चुराते हैं।
स्मिशिंग (Smishing): यह SMS (टेक्स्ट मैसेज) के माध्यम से किया जाने वाला फिशिंग होता है। अपराधी उपयोगकर्ताओं को एक लिंक पर क्लिक करने के लिए प्रेरित करते हैं जो उन्हें फर्जी वेबसाइट पर ले जाता है।
“आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग अपराधियों द्वारा विभिन्न प्रकार के साइबर अपराधों के लिए किया जा सकता है”
फिशिंग अटैक्स: AI-संचालित फिशिंग: AI का उपयोग करके अपराधी वास्तविकता की तरह दिखने वाले फिशिंग ईमेल या संदेश तैयार कर सकते हैं। AI टूल्स भाषाई पैटर्न को समझकर और विश्लेषण करके अधिक प्रभावी और व्यक्तिगत फिशिंग प्रयास कर सकते हैं।
डाटा ब्रीच और चोरी: डाटा एनालिटिक्स: AI का उपयोग बड़ी मात्रा में डेटा का विश्लेषण करने के लिए किया जा सकता है ताकि संवेदनशील जानकारी जैसे कि व्यक्तिगत विवरण, क्रेडिट कार्ड नंबर आदि का पता लगाया जा सके।
ऑटोमेटेड हैकिंग: बोट्स और स्क्रिप्ट्स: AI से संचालित बोट्स और स्क्रिप्ट्स स्वचालित रूप से सुरक्षा कमजोरियों की तलाश कर सकते हैं और सॉफ्टवेयर में बग्स का शोषण कर सकते हैं।
डिपफेक्स और फेक न्यूज: AI का उपयोग करके नकली वीडियो और ऑडियो क्लिप तैयार किए जा सकते हैं जो किसी को धोखा देने या उनकी छवि को नुकसान पहुँचाने के लिए उपयोग किए जा सकते हैं।
फेक न्यूज जनरेशन: AI का उपयोग भ्रामक या झूठी सूचनाएँ फैलाने के लिए किया जा सकता है, जिससे सामाजिक या राजनीतिक भ्रम पैदा हो सकता है।
स्मार्ट मैलवेयर: AI का उपयोग मैलवेयर को अधिक बुद्धिमान और स्वायत्त बनाने के लिए किया जा सकता है, जिससे यह स्वतः पहचान कर सके कि किस प्रकार से सिस्टम को प्रभावित किया जाए और अपने आप को छिपा सके।
सामाजिक इंजीनियरिंग: प्रोफाइलिंग और लक्षित अटैक्स: AI का उपयोग सोशल मीडिया डेटा का विश्लेषण करके लक्षित सामाजिक इंजीनियरिंग हमलों के लिए किया जा सकता है, जिसमें व्यक्तिगत जानकारी का उपयोग कर लोगों को धोखा दिया जा सकता है।
ऑटोमेटेड फ्रॉड: AI का उपयोग कर अपराधी फर्जी लेनदेन, क्रेडिट कार्ड फ्रॉड, और अन्य प्रकार की वित्तीय धोखाधड़ी को पहचानने से बच सकते हैं।
साइबर स्पाईंग: नेटवर्क इंटेलिजेंस: AI का उपयोग नेटवर्क ट्रैफिक और संचार का विश्लेषण करके संवेदनशील जानकारी एकत्र करने के लिए किया जा सकता है।
“इन समस्याओं से निपटने के लिए मजबूत साइबर सुरक्षा उपाय और सतर्कता की आवश्यकता है। यह महत्वपूर्ण है कि सुरक्षा विशेषज्ञ AI का उपयोग भी एहतियात और सुरक्षा उद्देश्यों के लिए करें, ताकि इसके दुरुपयोग से बचा जा सके” – ओपी जायसवाल ( साइबर क्राइम विशेषज्ञ )










