इसके बाद वन्य प्राणी विभाग ने 2019 में अभियान के बीच बंदरों की गिनती पूरी की तो यह संख्या एक लाख 36 हजार पर ठहर गई। जबकि नसबंदी का अभियान 2007 में शुरू किया गया था।
इसके लिए वन्य प्राणी विभाग ने सात नसबंदी केंद्र स्थापित किए थे। लेकिन इन नसबंदी केंद्रों का भी ज्यादा फायदा विभाग नहीं उठा पाया है। हाल के वर्षों में बंदरों की तादाद शहरी क्षेत्रों में ज्यादा बढ़ी है।
बड़ा सवाल अब भी यही है कि जीरो से 43 फीसदी पहुंचने में विभाग को 17 साल लग गए, तो 100 फीसदी तक पहुंचने में कितना समय लगेगा।
इस अवधि के दौरान बिना नसबंदी के घूम रहे 57 फीसदी बंदरों को नियंत्रित करने के लिए वन्य प्राणी विभाग के पास क्या योजना रहेगी।
मुख्य अरण्यपाल बोले – बंदरों को मारेंगे नहीं, नसबंदी करेंगे
प्रधान मुख्य अरण्यपाल वन्यप्राणी विभाग अमिताभ गौतम ने बताया कि बंदरों को सार्वजनिक जगह खाना डालना अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसा करते पाए जाने पर विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
प्रदेश के सभी शहरी इलाकों में वन्य प्राणी विभाग की तरफ से पत्र जारी किए हैं। बंदरों पर काबू पाने के लिए आगामी समय में स्थानीय लोगों और संस्थाओं की भी मदद ली जाएगी।
हिमाचल प्रदेश में 73 बर्फानी तेंदुए
वन्य प्राणी विभाग बर्फानी तेंदुए की तादाद का पता लगा रहा है। इसके लिए विशेष कैमरे स्थापित किए हैं। बर्फानी तेंदुए की पहली गिनती वन्य प्राणी विभाग ने 2019 में पूरी की थी। उस समय प्रदेश में तेंदुए की तादाद 51 से 73 के बीच पाई गई थी।
जबकि इसके बाद बीते पांच सालों में संख्या बढऩे की संभावना जागृत हो गई है। इसके अलावा वन्य प्राणी विभाग भूरे भालू की गिनती भी कर रहा है। साल के अंत तक भूरे भालू की गिनती पूरी करने की संभावना जताई है।
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