भारत की आर्थिक वृद्धि का नया इंजन बना आयुष क्षेत्र; 36.92 बिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के साथ 2047 तक 'विकसित भारत' में देगा बड़ा योगदान।
भारत का ‘आयुष’ सेक्टर बना सबसे तेज बढ़ता सेवा क्षेत्र: $36.92 बिलियन पहुंची अर्थव्यवस्था, 2047 तक ‘विकसित भारत’ का बनेगा प्रमुख इंजन”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धतियां और पारंपरिक ज्ञान अब केवल सांस्कृतिक विरासत तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये देश की अर्थव्यवस्था का एक गतिशील और उच्च विकास वाला इंजन बन चुके हैं।
विकासशील देशों की अनुसंधान एवं सूचना प्रणाली (RIS) द्वारा किए गए एक ऐतिहासिक अध्ययन के अनुसार, आयुष (AYUSH) सेवा क्षेत्र भारत के सबसे तेजी से बढ़ते सेवा क्षेत्रों में से एक के रूप में उभरा है।
वित्त वर्ष 2024-25 में आयुष सेवा अर्थव्यवस्था का अनुमानित मूल्य 36.92 अरब (बिलियन) अमेरिकी डॉलर आंका गया है।
23 सितंबर 2026 को नागपुर में आयोजित 11वें आयुर्वेद दिवस समारोह के दौरान औपचारिक रूप से जारी की गई यह आरआईएस (RIS) रिपोर्ट कई चौंकाने वाले आर्थिक आंकड़े पेश करती है:
विकास दर (CAGR): वित्त वर्ष 2022-23 से आयुष क्षेत्र ने लगभग 16.91 प्रतिशत की जबरदस्त वार्षिक चक्रवृद्धि दर से वृद्धि दर्ज की है।
रोजगार सृजन: यह क्षेत्र वर्तमान में 1.76 मिलियन (करीब 17.6 लाख) लोगों को प्रत्यक्ष रूप से आजीविका प्रदान कर रहा है, जिनमें से 10 लाख से अधिक नौकरियां केवल स्थानीय और स्वतंत्र क्लीनिकों में हैं।
महिला सशक्तिकरण: आयुष क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी 43% है। विशेष रूप से स्पा और रिसॉर्ट में 60%, शैक्षणिक संस्थानों में 58% और डे-केयर सेंटरों में 57% महिलाएं कार्यरत हैं।
अध्ययन से पता चलता है कि आयुष अर्थव्यवस्था की रीढ़ क्लीनिक और डे-केयर सेंटर हैं, जो कुल राजस्व का 71% हिस्सा बनाते हैं।
इसमें आयुर्वेद सबसे बड़ी प्रणाली के रूप में काबिज है, जिसका राजस्व 17.73 बिलियन डॉलर (लगभग 48%) है।
इसके अलावा, योग केंद्रों के राजस्व में पिछले दो वर्षों में 75% का उछाल आया है, जो निवारक स्वास्थ्य और वेलनेस सेवाओं की बढ़ती वैश्विक मांग को दर्शाता है।
आयुष ने भारत को ‘मेडिकल वैल्यू ट्रैवल’ (MVT) के एक प्रमुख वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित कर दिया है।
वित्त वर्ष 2025 में इस क्षेत्र ने मेडिकल टूरिज्म से 1.77 बिलियन डॉलर का राजस्व अर्जित किया। दिलचस्प बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय मरीज कुल मरीजों का केवल 5% हैं, लेकिन अस्पताल के कुल राजस्व में उनका योगदान 15 से 25 प्रतिशत तक है।
पंचकर्म और आवासीय योग जैसे कार्यक्रमों के कारण विदेशी मरीज आमतौर पर 5 से 11 दिनों तक भारत में रुकते हैं।
आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने इस रिपोर्ट को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि आयुष क्षेत्र स्वस्थ और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अहम भूमिका निभा रहा है।
अध्ययन का अनुमान है कि बुनियादी ढांचे, गुणवत्ता मान्यता (NABH/ISO), डिजिटल क्षमताओं और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच में सुधार के साथ, आयुष अर्थव्यवस्था वर्ष 2047 तक 216 से 318 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकती है,
जो इसे ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य का एक प्रमुख स्तंभ बना देगा।
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