PM मोदी की अपील पर बवाल क्यों? 82 देशों में लगी है पाबंदियां
PM मोदी की ‘ईंधन और सोना’ बचाने की अपील पर बवाल क्यों? वैश्विक ऊर्जा संकट में 82 देश पहले ही उठा चुके हैं इससे भी सख्त कदम”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से ऊर्जा बचाने, एक साल तक सोना न खरीदने और विदेश यात्रा टालने की अपील पर देश में एक नई सियासी बहस छिड़ गई है।
विपक्षी दलों, कुछ बुद्धिजीवियों और आलोचकों ने इस अपील को लेकर भारी बवाल खड़ा कर दिया है। लेकिन क्या पीएम मोदी की यह अपील वाकई अनोखी या जरूरत से ज्यादा सख्त है?
जब हम वैश्विक ऊर्जा संकट के आंकड़ों पर नजर डालते हैं, तो तस्वीर बिल्कुल अलग नजर आती है। दुनिया के 82 से ज्यादा देश इस संकट से निपटने के लिए भारत से बहुत पहले ही कड़े और आपातकालीन फैसले लागू कर चुके हैं।
भारत ने 140 करोड़ की आबादी होने के बावजूद अब तक इस चुनौती को सबसे शानदार तरीके से संभाला है।
अपील पर हंगामा बनाम अपनी मर्जी से दान
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस हंगामे में एक बड़ा विरोधाभास है। एक तरफ जब ईरान संकट के दौरान भारत के विभिन्न राज्यों से एक समुदाय विशेष द्वारा स्वेच्छा से निजी गहने और नकदी मिलाकर करीब 600 करोड़ रुपये का दान किया गया, तो उस पर किसी ने आपत्ति नहीं जताई।
लेकिन जब प्रधानमंत्री ने देश की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा के भले के लिए महज ‘बचत’ की अपील की, तो इसे राजनीतिक मुद्दा बना दिया गया।
दुनिया भर में कैसे उठाए गए हैं सख्त कदम?
वैश्विक ऊर्जा संकट से निपटने के लिए दुनिया के 82 से ज्यादा देश और देशों के समूह पहले ही आपातकालीन पाबंदियां लगा चुके हैं:
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स्कूल और यूनिवर्सिटी: 6 देशों ने शिक्षण संस्थानों को या तो बंद कर दिया है या उनकी टाइमिंग पर सख्त पाबंदियां लगा दी हैं।
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ईंधन राशनिंग और यात्रा: 18 देशों ने गैर-जरूरी यात्राओं पर पाबंदी लगा दी है। वहां ईंधन खरीद पर राशनिंग और वाहनों के लिए ‘ऑड-ईवन’ (Odd-Even) जैसे नियम लागू कर दिए गए हैं।
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वर्क फ्रॉम होम (WFH): 13 देशों ने कार्यालयों में ऊर्जा बचाने के लिए ‘वर्क फ्रॉम होम’ और रिमोट वर्किंग को अनिवार्य बना दिया है।
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एलपीजी और कुकिंग ऑयल: 3 देशों ने तो खाना पकाने के तेल और एलपीजी (LPG) के इस्तेमाल पर भी सीधी पाबंदियां लगा दी हैं।
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AC और लाइफस्टाइल: 35 से ज्यादा देशों ने ऊर्जा बचत के बड़े अभियान चलाए हैं। यूरोपीय देशों में लोगों से पब्लिक ट्रांसपोर्ट इस्तेमाल करने, धीरे गाड़ी चलाने और AC को 24°C-26°C पर सेट करने को कहा गया है।
95 देशों में बढ़ चुके हैं पेट्रोल-डीजल के दाम
ऊर्जा संकट के कारण दुनिया के 95 देशों ने पेट्रोल और डीजल के दामों में भारी इजाफा किया है। इनमें अमेरिका, कनाडा, चीन, फ्रांस, जापान, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया और रूस जैसे शक्तिशाली देश शामिल हैं।
अमेरिका में तो महंगाई दर 3.8% तक पहुंच गई है, जो पिछले 3 सालों में सबसे ज्यादा है। प्रतिशत के हिसाब से सबसे ज्यादा ईंधन के दाम अमेरिका में ही बढ़े हैं।
इन वैश्विक आंकड़ों को देखते हुए यह स्पष्ट है कि दुनिया के अन्य देशों की तुलना में भारत में अभी तक कोई ‘सख्त पाबंदी’ नहीं लगाई गई है, बल्कि सिर्फ जनभागीदारी से इस संकट को टालने की अपील की गई है।











