Union Agriculture Minister Shivraj Singh Chouhan addressing the inter-ministerial conference

कृषि विकास के लिए ‘होल ऑफ गवर्नमेंट’ अप्रोच जरूरी: शिवराज

कृषि क्षेत्र के कायाकल्प के लिए ‘होल ऑफ गवर्नमेंट’ अप्रोच की दरकार, मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तैयार किया नया रोडमैप”

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

‘विकसित भारत’ के संकल्प को साकार करने और देश के किसानों की आय व समृद्धि बढ़ाने के उद्देश्य से नई दिल्ली के कृषि भवन में एक अहम “भारत की कृषि का रूपांतरण – अंतर-मंत्रालयी सम्मेलन” आयोजित किया गया।

इस उच्च स्तरीय बैठक में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्य रूप से भाग लिया।

सम्मेलन में केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह भी वर्चुअली शामिल हुए।

बैठक में कृषि क्षेत्र में व्यापक सुधार, केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय, और किसानों को उनके उत्पाद का सही मूल्य दिलाने के लिए ‘होल ऑफ गवर्नमेंट’ (सरकार का समग्र दृष्टिकोण) अपनाने पर विशेष जोर दिया गया।

योजनाओं का जमीनी क्रियान्वयन है असली चुनौती

सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि नीतियां और योजनाएं सरकार के पास पर्याप्त हैं, लेकिन मुख्य चुनौती उन्हें धरातल पर उतारने में आने वाली बाधाओं को दूर करना है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि कृषि क्षेत्र में सुधार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है।

“यह सम्मेलन केवल एक औपचारिक कर्मकांड बनकर न रह जाए, इसके लिए प्राप्त सभी पुराने और नए सुझावों को एक ठोस कार्य योजना में बदलना होगा। केंद्र, राज्य, अनुसंधान संस्थान और किसानों को मिलकर एक मजबूत साझेदारी विकसित करनी होगी।” – शिवराज सिंह चौहान

‘होल ऑफ गवर्नमेंट’ और ‘होल वैल्यू चेन’ दृष्टिकोण

कृषि, बागवानी, पशुपालन और मत्स्य पालन में बेहतर तालमेल के लिए मंत्री ने ‘होल ऑफ गवर्नमेंट’ और ‘होल वैल्यू चेन’ अप्रोच की आवश्यकता बताई।

फसलों की कटाई के बाद के प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करते हुए उन्होंने फलों और सब्जियों के जल्दी खराब होने से किसानों को होने वाले नुकसान पर चिंता जताई।

इसके समाधान के लिए उन्होंने ‘विकसित कृषि संकल्प’ के तहत बिहार की लीची जैसी फसलों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने और क्लस्टर विकास पर काम करने की जानकारी दी।

टेक्नोलॉजी में मानवीय दृष्टिकोण और पूर्वोत्तर पर विशेष ध्यान

कृषि में तकनीक के इस्तेमाल पर श्री चौहान ने कहा कि ‘एग्रीस्टैक’ और ‘फार्मर आईडी’ जैसी डिजिटल पहलों का पूरा लाभ तभी मिलेगा जब उन्हें लैंड पार्सल (जमीन के रिकॉर्ड) के साथ पूरी तरह लिंक किया जाएगा।

इसके साथ ही उन्होंने तकनीक के उपयोग में मानवीय दृष्टिकोण बनाए रखने की वकालत की। पूर्वोत्तर भारत की कृषि क्षमता की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि वहां की अदरक, हल्दी और मिर्च की बेहतरीन किस्मों को वैश्विक स्तर पर एक्सपोर्ट करने के लिए जल्द ही पूर्वोत्तर के मुख्यमंत्रियों के साथ एक विशेष बैठक आयोजित की जाएगी।

सुझावों को लागू करने की तीन-स्तरीय रणनीति

सम्मेलन के दौरान प्राप्त सुझावों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए मंत्री ने इन्हें तीन श्रेणियों में बांटने का निर्देश दिया:

  • शॉर्ट-टर्म (अल्पावधि): जिन्हें इसी सीजन में प्रक्रियाओं में मामूली बदलाव कर तुरंत लागू किया जा सके।

  • मीडियम-टर्म (मध्यावधि): जिन्हें वर्तमान चालू योजनाओं में फिट कर बेहतर ढंग से इंप्लीमेंट किया जाए।

  • लॉन्ग-टर्म (दीर्घावधि): जिनके लिए नई नीतियां और विस्तृत कार्यप्रणालियां तैयार करने की आवश्यकता हो।

  • इनके त्वरित क्रियान्वयन और मॉनिटरिंग के लिए एक विशेष टीम का गठन किया जाएगा जो हर महीने प्रगति की समीक्षा करेगी।

‘आपदा को अवसर में बदलने’ का संकल्प

जलवायु परिवर्तन, जल संकट और आगामी ‘अल नीनो’ के प्रभाव से निपटने के लिए मंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी के ‘आपदा को अवसर में बदल दो’ मंत्र को दोहराया।

उन्होंने देशवासियों और किसानों को आश्वस्त किया कि भारत के पास पर्याप्त खाद्यान्न भंडार मौजूद है और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर प्रबंधन से हम हर चुनौती को पार कर लेंगे।

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