Union Agriculture Minister Shivraj Singh Chouhan holding meeting on El Nino preparations for farmers

अल नीनो का खतरा: कृषि मंत्री शिवराज का ‘फुलप्रूफ’ प्लान

अल नीनो की चुनौती के बीच किसानों की ढाल बनी सरकार: 315 जिलों के लिए शिवराज सिंह चौहान का ‘स्पेशल कंटिजेंसी प्लान’

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

देश में अल नीनो (El Nino) के संभावित प्रभाव और मानसून के कमजोर रहने की आशंकाओं के बीच केंद्र सरकार अलर्ट मोड पर आ गई है।

‘The Politics Again’ की रिपोर्ट के अनुसार, खरीफ सीजन की तैयारियों को पुख्ता करने के लिए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों के कृषि मंत्रियों, जिला कलेक्टर्स और मौसम वैज्ञानिकों के साथ एक उच्चस्तरीय वर्चुअल बैठक की है।

सरकार का स्पष्ट संदेश है कि वह संकट का इंतजार नहीं कर रही है, बल्कि किसानों को बचाने के लिए पहले से ही जमीनी तैयारियों में जुट गई है।

315 संवेदनशील जिलों की हुई पहचान

कृषि मंत्री ने बताया कि मौसम विभाग (IMD) के अनुसार इस वर्ष मानसून देरी से चल रहा है और बारिश 43 प्रतिशत तक कम दर्ज की गई है।

इसके असर को कम करने के लिए कृषि मंत्रालय और ICAR ने वैज्ञानिक डेटा के आधार पर 315 ऐसे जिलों की पहचान की है, जहाँ कम वर्षा और सिंचाई की कमी का खतरा सबसे ज्यादा है।

इनमें 12 राज्यों (मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा) के जिले मुख्य रूप से शामिल हैं।

जिला कृषि आकस्मिकता योजना (DACP): संकट में किसानों की पहली ढाल

बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि सभी प्रभावित जिलों के लिए ‘डिस्ट्रिक्ट एग्रीकल्चर कंटिजेंसी प्लान’ (DACP) तैयार कर लिए गए हैं।

  • मुख्य फोकस: कम वर्षा में वैकल्पिक फसलें लगाना, उपलब्ध पानी का श्रेष्ठ इस्तेमाल करना और जोखिम कम करना।

  • कड़े निर्देश: राज्य सरकारों और जिला प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि ये योजनाएं सिर्फ फाइलों में न रहें, बल्कि ‘ऑपरेशनल प्लान’ के रूप में जमीन पर तुरंत लागू की जाएं।

पानी की हर बूंद कीमती: जल संरक्षण पर जोर

मंत्री ने स्पष्ट किया कि कमजोर मानसून में “पानी की एक-एक बूंद कीमती है।” मनरेगा (MGNREGA) और अन्य ग्रामीण विकास योजनाओं के तहत तालाब, चेक डैम, नाले और खेत-तालाबों को तुरंत दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि जल संरक्षण बढ़ाया जा सके। संवेदनशील इलाकों में पेयजल को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

खेती की नई रणनीति: कम पानी, ज्यादा फायदा

  • फसल विविधीकरण: किसानों को एक ही फसल पर निर्भर रहने के बजाय दलहन, मोटा अनाज (श्री अन्न) और तिलहन जैसी कम अवधि और कम पानी में पकने वाली फसलें बोने की सलाह दी गई है।

  • इनपुट की पूरी तैयारी: कृषि मंत्री ने आश्वस्त किया कि खाद (यूरिया, DAP) और बीज की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। 1% अतिरिक्त बीज रिजर्व में रखा गया है ताकि जरूरत पड़ने पर दोबारा बुवाई की जा सके।

किसानों के तीन बड़े ‘संकट-सहारे’ आर्थिक मोर्चे पर किसानों को सुरक्षित करने के लिए शिवराज सिंह चौहान ने तीन प्रमुख योजनाओं को ढाल बताया:

  1. PMFBY (प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना): संभावित नुकसान से बचने के लिए इसका दायरा बढ़ाया जा रहा है।

  2. KCC (किसान क्रेडिट कार्ड): जिन किसानों के पास KCC नहीं है, उनके कार्ड तेजी से बनाए जा रहे हैं ताकि निवेश की कमी न हो।

  3. PM-किसान: हाल ही में जारी की गई सम्मान निधि की किस्त से किसान बीज और खाद आसानी से खरीद सकेंगे।

मल्टी-टियर मॉनिटरिंग और रियल-टाइम सलाह किसानों तक सही वैज्ञानिक सलाह पहुंचाने के लिए देश भर के 731 कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) को सक्रिय कर दिया गया है।

इसके अलावा, दिल्ली में “अल नीनो मॉनिटरिंग सेल” का गठन किया गया है जो मौसम, बुवाई और बाजार के संकेतों का हर पल विश्लेषण कर रहा है।

“घबराने की नहीं, बल्कि सामूहिक कार्रवाई की ज़रूरत है। केंद्र, राज्य और किसान मिलकर प्रयास करें तो अल नीनो की चुनौती को भी अवसर में बदला जा सकता है। हम किसानों की आजीविका को हर हाल में सुरक्षित रखेंगे।”शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय कृषि मंत्री