“केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने यूपीएससी (UPSC) कोचिंग की दुनिया के दिग्गज संस्थान Vision IAS (अजयविजन एजुकेशन प्राइवेट लिमिटेड) पर भ्रामक विज्ञापन प्रकाशित करने के लिए 11 लाख रुपये का भारी जुर्माना लगाया है”
नई दिल्ली 26 / 12 / 2025 संतोष सेठ की रिपोर्ट
प्राधिकरण ने पाया कि संस्थान ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर सफल उम्मीदवारों के नाम और रैंक का इस्तेमाल कर छात्रों और अभिभावकों को गुमराह किया।
| श्रेणी | विज्ञापन में किया गया दावा | सीसीपीए की जांच में निकला सच |
| सफल उम्मीदवार | 119 उम्मीदवारों का श्रेय लिया | केवल 3 उम्मीदवार ‘फाउंडेशन कोर्स’ (महंगे कोर्स) के थे |
| कोर्स का विवरण | जानकारी छिपाई गई | 116 उम्मीदवारों ने केवल मॉक इंटरव्यू या टेस्ट सीरीज ली थी |
| भ्रामक तकनीक | टॉपर्स की फोटो फाउंडेशन बैच के साथ दिखाई | छात्रों को महंगे कोर्स की ओर आकर्षित करने का जाल |
Vision IAS ने अपनी वेबसाइट पर “CSE 2023 के टॉप 10 में 7 और टॉप 100 में 79 चयन” जैसे बड़े दावे किए थे। सीसीपीए की जांच में खुलासा हुआ कि संस्थान ने सफल उम्मीदवारों द्वारा लिए गए विशिष्ट पाठ्यक्रमों (Courses) की जानकारी को जानबूझकर छिपाया।
भ्रामक धारणा: संस्थान ने टॉपर्स की तस्वीरें इस तरह पेश कीं, जिससे लगा कि वे लाखों रुपये की फीस वाले ‘जीएस फाउंडेशन बैच’ के छात्र थे।
सच्चाई का खुलासा: जांच में पाया गया कि 119 सफल उम्मीदवारों में से केवल 3 ही फाउंडेशन कोर्स के थे। शेष 116 उम्मीदवारों ने केवल टेस्ट सीरीज या मॉक इंटरव्यू जैसे छोटे प्रोग्राम्स का विकल्प चुना था।
प्राधिकरण ने इस छिपाव को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 2(28) का उल्लंघन माना। सीसीपीए ने कहा कि:
धोखाधड़ी: संस्थान ने अधूरे खुलासे कर छात्रों में झूठी उम्मीदें जगाईं और उन्हें महंगे कोर्सेज में दाखिला लेने के लिए प्रेरित किया।
पुनरावृत्ति: विजन आईएएस के खिलाफ पहले भी ऐसी कार्रवाई हो चुकी है, इसके बावजूद संस्थान ने भ्रामक विज्ञापन जारी रखे।
सहमति का अभाव: कई उम्मीदवारों के नाम और फोटो उनकी उचित अनुमति के बिना ही वेबसाइट पर प्रदर्शित किए गए।
सीसीपीए अब तक भ्रामक विज्ञापनों के लिए विभिन्न कोचिंग संस्थानों को 57 नोटिस जारी कर चुका है। अब तक 28 संस्थानों पर कुल 1.09 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया जा चुका है। प्राधिकरण का स्पष्ट संदेश है: विज्ञापनों में जानकारी सत्य और पारदर्शी होनी चाहिए ताकि छात्र निष्पक्ष निर्णय ले सकें।
कोचिंग संस्थानों द्वारा छात्रों को लुभाने के लिए किए जाने वाले भ्रामक विज्ञापनों पर नकेल कसने के लिए केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने सख्त गाइडलाइन्स जारी की हैं। Vision IAS पर हुई कार्रवाई इन्हीं नियमों के आधार पर की गई है।
यहाँ कोचिंग संस्थानों के लिए सरकार द्वारा जारी नई गाइडलाइन्स (2024-25) और उनसे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है:
सरकार ने ‘भ्रामक विज्ञापनों की रोकथाम और विज्ञापनों के समर्थन (Endorsements) के लिए दिशानिर्देश’ जारी किए हैं, जिनका पालन करना अब हर संस्थान के लिए अनिवार्य है:
कोर्स का पूर्ण खुलासा (Full Disclosure):
विज्ञापन में यह स्पष्ट रूप से बताना होगा कि सफल उम्मीदवार ने संस्थान से कौन सा कोर्स (जैसे- फाउंडेशन कोर्स, टेस्ट सीरीज, या केवल मॉक इंटरव्यू) लिया था।
कोर्स की अवधि (Duration) का उल्लेख करना भी अनिवार्य है।
बिना अनुमति फोटो पर रोक:
किसी भी छात्र की फोटो या नाम का उपयोग उसकी लिखित सहमति (Written Consent) के बिना नहीं किया जा सकता। यह सहमति चयन के बाद ही ली जानी चाहिए।
100% गारंटी वाले दावों पर पाबंदी:
संस्थान अब “100% सिलेक्शन गारंटी”, “सरकारी नौकरी पक्की”, या “निश्चित सफलता” जैसे दावों का उपयोग नहीं कर सकते।
फीस और रिफंड की पारदर्शिता:
विज्ञापनों में दी गई फीस और वास्तविक फीस में अंतर नहीं होना चाहिए। साथ ही, रिफंड पॉलिसी के बारे में कोई जानकारी छिपानी नहीं होगी।
झूठे ‘रैंक’ और ‘नंबर’ पर रोक:
यदि कोई छात्र केवल एक मॉक इंटरव्यू के लिए आया है, तो संस्थान उसे अपना ‘फुल-टाइम छात्र’ बताकर विज्ञापन नहीं दे सकता।
सीसीपीए (CCPA) को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत भारी शक्तियाँ प्राप्त हैं:
जुर्माना: पहली बार उल्लंघन पर 10 लाख रुपये तक और बार-बार उल्लंघन करने पर 50 लाख रुपये तक का जुर्माना।
प्रतिबंध: भ्रामक विज्ञापन के प्रचारक (Endorser) पर 1 से 3 साल तक का प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
लाइसेंस रद्द करना: गंभीर मामलों में संस्थान के संचालन पर रोक लगाई जा सकती है।
| विवरण | सांख्यिकी |
| जारी किए गए कुल नोटिस | 57 |
| जुर्माना झेलने वाले संस्थान | 28 |
| कुल वसूली गई जुर्माना राशि | ₹1,09,60,000 |
| प्रमुख संस्थान जिन पर कार्रवाई हुई | Vision IAS, BYJU’S, Chahal Academy, IQRA IAS, आदि। |
दावों की पुष्टि करें: संस्थान की वेबसाइट पर जाकर टॉपर्स के ‘कोर्स टाइप’ की जांच करें।
शिकायत दर्ज करें: यदि आपको कोई विज्ञापन भ्रामक लगता है, तो आप राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (1915) पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं या ‘ई-दाखिल’ (e-Daakhil) पोर्टल का उपयोग कर सकते हैं।
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