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ग्लोबल टेंशन के बीच तेल के खेल में भारत का बड़ा मास्टरस्ट्रोक

वैश्विक संकट के बीच भारत का ‘मास्टरस्ट्रोक’: लीबिया के रेगिस्तान में मिला तेल का विशाल भंडार, दुनिया के लिए बना मिसाल

“जहां चाह वहां राह, और जब इरादे भारत जैसे मजबूत हों तो राह सिर्फ बनती नहीं, इतिहास भी लिखती है।”

नई दिल्ली/त्रिपोली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

एक तरफ जहां अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है, तेल बाजार में हड़कंप मचा हुआ है और पूरी दुनिया महंगाई के डर से कांप रही है, ठीक उसी समय भारत ने चुपचाप एक ऐसा रणनीतिक कदम उठाया है जिसने पूरा खेल बदल दिया है।

उत्तर अफ्रीका के अस्थिरता और गृह युद्ध से जूझ रहे देश लीबिया (Libya) के रेगिस्तान में भारत की सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों ने वह कर दिखाया है, जिसकी दुनिया को उम्मीद नहीं थी।

गदा मिस बेसिन (Ghadames Basin) में मिली बड़ी कामयाबी

लीबिया को दुनिया के सबसे खतरनाक और अस्थिर इलाकों में गिना जाता है, लेकिन इसी धरती पर भारत की ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) ने बड़ी सफलता हासिल की है।

  • छठे कुएं में मिला खजाना: रिपोर्ट्स के मुताबिक, लीबिया के गदा मिस बेसिन में तेल कुओं की ड्रिलिंग का काम चल रहा था। यहां छठे कुएं की ड्रिलिंग के दौरान बड़े तेल भंडार मिलने के स्पष्ट संकेत मिले हैं।

  • कमाल की टाइमिंग: जरा सोचिए, जब पूरी दुनिया तेल की सप्लाई और कीमतों को लेकर परेशान थी, तब भारत रेगिस्तान के नीचे अपना सुरक्षित भविष्य तलाश रहा था।

खतरों के खिलाड़ी: गृह युद्ध के बीच भारत की ‘साझेदारी’

लीबिया का गदा मिस बेसिन अपने बेहतरीन क्वालिटी वाले क्रूड ऑयल (कच्चे तेल) के लिए मशहूर है, जिसे रिफाइन करना बेहद आसान होता है।

  • अस्थिरता में भी विश्वास: लीबिया में राजनीतिक अस्थिरता है, अलग-अलग गुट सक्रिय हैं और सुरक्षा की भारी चुनौतियां हैं। ऐसे माहौल में काम करना आसान नहीं था।

  • साझेदारी का मॉडल: भारत ने वहां सिर्फ संसाधनों पर नजर नहीं रखी, बल्कि स्थानीय लोगों और प्रशासन के साथ ‘भरोसे और साझेदारी’ का मॉडल अपनाया। इसी का नतीजा है कि भारतीय कंपनियों को वहां स्वीकार्यता मिली।

अगर भारत को यहां से स्थायी उत्पादन मिल गया, तो यह सिर्फ एक व्यापारिक नहीं बल्कि एक बहुत बड़ी रणनीतिक जीत होगी।

इसका सीधा मतलब है कि भारत अब सिर्फ तेल का खरीददार नहीं, बल्कि उत्पादन के खेल का एक बड़ा खिलाड़ी बनेगा।

क्या इससे भारत में सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल?

भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। दुनिया में जब भी युद्ध होता है या सप्लाई रुकती है, तो इसका सीधा असर भारतीय जनता की जेब (पेट्रोल-डीजल की महंगाई) पर पड़ता है।

  • क्या तुरंत घटेंगे दाम? इसका सीधा जवाब है- तुरंत नहीं। लेकिन, लंबी अवधि में इसका जबरदस्त फायदा होगा।

  • कीमतों पर नियंत्रण: जब किसी देश के पास अपने खुद के स्रोत और विदेशी भंडार बढ़ते हैं, तो वह वैश्विक संकटों से कम प्रभावित होता है।

  • सरकार के पास कीमतों को संभालने (Cushioning) की ताकत बढ़ जाती है। यानी आज लीबिया में जो हो रहा है, उसका असर कल देशवासियों की जेब पर सकारात्मक रूप से दिखना तय है।

वैश्विक रणनीति: ‘एनर्जी डायवर्सिफिकेशन’ (Energy Diversification)

भारत की यह कामयाबी सिर्फ लीबिया तक सीमित नहीं है। भारत ने दुनिया भर में अपने ऊर्जा स्रोतों का जाल बिछा दिया है:

  • रूस: सखालिन (Sakhalin) और साइबेरिया क्षेत्रों में भारतीय निवेश पहले से मौजूद और सक्रिय हैं।

  • अफ्रीका और लैटिन अमेरिका: मोजाम्बिक (Mozambique) के गैस प्रोजेक्ट्स से लेकर ब्राजील और लैटिन अमेरिका में भी भारत मौके तलाश रहा है और निवेश कर रहा है।

इसे कूटनीति की भाषा में ‘एनर्जी डायवर्सिफिकेशन’ कहते हैं। इसका मतलब है कि अगर दुनिया के एक हिस्से में युद्ध या संकट आ जाए, तो दूसरे स्रोत से देश का काम बिना रुके चलता रहे। यही समझदार और ताकतवर देशों की सबसे बड़ी पहचान होती है।

निष्कर्ष: ऊर्जा ही है भविष्य की असली ताकत

आज दुनिया यह समझ रही है कि भारत सिर्फ एक बड़ा उपभोक्ता बाजार नहीं है, बल्कि भविष्य की एक महाशक्ति है।

अंतरराष्ट्रीय राजनीति में असली ताकत सिर्फ सेना से नहीं आती; ताकत आती है ऊर्जा सुरक्षा से, मजबूत सप्लाई चेन से और आत्मनिर्भरता से।

चर्चा यह भी है कि लीबिया के कुछ इलाकों में गैस और ‘दुर्लभ खनिजों’ (Rare Earth Minerals) की संभावना भी हो सकती है।

अगर भविष्य में यह सच साबित हुआ, तो यह भारत के लिए ‘डबल जीत’ होगी, जो न सिर्फ हमारी अर्थव्यवस्था को बल्कि वैश्विक राजनीति में हमारी हैसियत को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगी।

Santosh SETH

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