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भारतीय रेलवे ने दी ₹895 करोड़ की परियोजनाओं को मंजूरी

भारतीय रेलवे का बड़ा कदम: इंफ्रास्ट्रक्चर और कोलकाता मेट्रो के अपग्रेडेशन के लिए ₹895.30 करोड़ की परियोजनाओं को मंजूरी

नई दिल्ली/कोलकाता: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

भारतीय रेलवे (Indian Railways) ने सुरक्षा, क्षमता और संचालन दक्षता को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए एक अहम कदम उठाया है।

रेलवे ने पुलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और मेट्रो रेल की विद्युत प्रणालियों को पूरी तरह से आधुनिक बनाने के लिए 895.30 करोड़ रुपए की दो प्रमुख परियोजनाओं को मंजूरी दी है।

इन परियोजनाओं से जहां एक तरफ यात्रियों का सफर आसान होगा, वहीं दूसरी तरफ माल ढुलाई और औद्योगिक विकास को भी बड़ी रफ्तार मिलेगी।

1. कोलकाता मेट्रो: अब हर 2.5 मिनट में मिलेगी ट्रेन

कोलकाता मेट्रो के सबसे व्यस्त उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर (North-South Corridor) को तकनीकी रूप से मजबूत करने के लिए 671.72 करोड़ रुपए की परियोजना को हरी झंडी मिली है।

  • विद्युत प्रणाली का बड़ा अपग्रेड: इस प्रोजेक्ट के तहत 7 नए ट्रैक्शन सबस्टेशन बनाए जाएंगे। इसके अलावा, मौजूदा 11 केवी (kV) बिजली प्रणाली को 33 केवी में अपग्रेड किया जाएगा।

  • यात्रियों को होगा सीधा फायदा: इस तकनीकी उन्नयन से मेट्रो की संचालन क्षमता में क्रांतिकारी बदलाव आएगा।

  • पहले जहां ट्रेनें 5 मिनट के अंतराल (Frequency) पर चलती थीं, वहीं अब यात्रियों को हर 2.5 मिनट में मेट्रो ट्रेन की सुविधा मिलेगी।

  • इससे पीक आवर्स (Peak Hours) में बढ़ती यात्रियों की भीड़ को आसानी से संभाला जा सकेगा।

  • रखरखाव की चुनौतियां होंगी खत्म: 1980 के दशक में विकसित किया गया मौजूदा मेट्रो सिस्टम अब अपनी क्षमता की सीमा तक पहुंच चुका था।

  • पुराने उपकरणों के स्पेयर पार्ट्स न मिलने से रखरखाव में भारी दिक्कतें आ रही थीं। नई प्रणाली से बिजली आपूर्ति अधिक विश्वसनीय होगी और सेवा की गुणवत्ता में सुधार आएगा।

2. दक्षिण पूर्वी रेलवे: आद्रा डिवीजन में मजबूत होंगे 120 साल पुराने पुल

माल ढुलाई और रेल सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दक्षिण पूर्वी रेलवे (South Eastern Railway) के आद्रा डिवीजन के लिए 223.58 करोड़ रुपए की परियोजना मंजूर की गई है।

  • पुल संख्या 520 का पुनर्निर्माण: मधुकुंडा-दामोदर (Madhukunda-Damodar) रेल खंड पर स्थित पुराना पुल (संख्या 520) काफी कमजोर हो चुका है।

  • इसका निर्माण वर्ष 1903 और 1965 में किया गया था। अब इसके आधारभूत ढांचे का पूरी तरह से पुनर्निर्माण किया जाएगा।

  • कोयला गलियारे और उद्योगों को बूस्ट: यह रेल खंड आसनसोल और टाटानगर के बीच एक बेहद अहम रेलवे लिंक है, जो महत्वपूर्ण ‘कोयला गलियारे’ (Coal Corridor) का भी हिस्सा है।

  • माल ढुलाई में आएगी तेजी: इस पुल के नए और मजबूत होने से इस रूट पर सुरक्षा, विश्वसनीयता और संचालन दक्षता बढ़ेगी।

  • इसका सीधा फायदा दुर्गापुर-आसनसोल औद्योगिक क्षेत्र के प्रमुख उद्योगों को मिलेगा, जिससे माल ढुलाई का काम तेज और सुरक्षित हो जाएगा।

निष्कर्ष: इन दोनों प्रमुख परियोजनाओं के जरिए भारतीय रेलवे खुद को एक आधुनिक, सुरक्षित और उच्च क्षमता वाले रेल नेटवर्क के रूप में ढाल रहा है।

मेट्रो के अपग्रेडेशन से जहां शहरी यातायात सुगम होगा, वहीं पुल परियोजनाओं से राष्ट्रीय माल ढुलाई को मजबूती मिलेगी।

Santosh SETH

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