“भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र को केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई नई श्रम संहिताओं (Labour Codes) से एक नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है”
नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट 26 / 12 / 2025 संतोष सेठ की रिपोर्ट
ये संहिताएं न केवल MSME के लिए ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देंगी, बल्कि करोड़ों श्रमिकों के लिए बेहतर सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक कार्यस्थल भी सुनिश्चित करेंगी।
| विषय / क्षेत्र | पुराना प्रावधान / स्थिति | नया प्रावधान (श्रम संहिता) | MSME को लाभ |
| फैक्ट्री लाइसेंस | 10 कर्मी (पावर के साथ) | 20 कर्मी (पावर के साथ) | छोटे उद्योगों को लाइसेंस के झंझट से राहत |
| ठेका श्रमिक लाइसेंस | 20 कर्मी होने पर अनिवार्य | 50 कर्मी होने पर अनिवार्य | छोटे ठेकेदारों और फर्मों पर अनुपालन बोझ कम |
| अनुमति समय-सीमा | 90 दिनों तक का इंतजार | सिर्फ 30 दिन (समयबद्ध मंजूरी) | व्यापार और विस्तार की प्रक्रिया में तेजी |
| छंटनी/बंदी सीमा | 100 कर्मचारियों पर सरकारी अनुमति | 300 कर्मचारियों तक छूट | बदलती बाजार स्थितियों में परिचालन लचीलापन |
| रजिस्ट्रेशन / रिटर्न | कई फॉर्म और अलग-अलग दफ्तर | सिंगल रजिस्ट्रेशन और सिंगल रिटर्न | डिजिटल पेपरवर्क और समय की बचत |
| निरीक्षण प्रणाली | ‘इंस्पेक्टर राज’ / व्यक्तिगत निरीक्षण | वेब-आधारित रैंडम निरीक्षण | भ्रष्टाचार में कमी और पारदर्शी वातावरण |
| न्यूनतम वेतन | कुछ चुनिंदा क्षेत्रों के लिए | देश के सभी श्रमिकों के लिए अनिवार्य | श्रमिकों के जीवन स्तर में सुधार और पलायन में कमी |
| सामाजिक सुरक्षा | सीमित भौगोलिक कवरेज (ESIC) | पूरे भारत में विस्तार (Universal) | हर श्रमिक को स्वास्थ्य और भविष्य निधि का सुरक्षा कवच |
| विवाद समाधान | लंबी कानूनी और जेल की प्रक्रिया | जुर्माना और समझौते (Compounding) | मुकदमों का डर खत्म, स्वैच्छिक अनुपालन को बढ़ावा |
| महिला/ट्रांसजेंडर | सीमित कानूनी स्पष्टता | समान कार्य के लिए समान वेतन | कार्यस्थल पर लैंगिक समानता और समावेशिता |
विकास का इंजन देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 30.1%, विनिर्माण क्षेत्र के उत्पादन में 35.4% और कुल निर्यात में 45.73% का योगदान देने वाला MSME क्षेत्र लगभग 28 करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान करता है।
6.5 करोड़ इकाइयों तक फैला यह क्षेत्र समावेशी विकास और आर्थिक स्थिरता का एक महत्वपूर्ण इंजन है। सरकार ने इसकी अहमियत को समझते हुए एक मजबूत नीतिगत समर्थन प्रदान किया है, जिसमें नई श्रम संहिताएं एक प्रमुख कदम हैं।
आधुनिकता और सरलता ये संहिताएं भारत की श्रम व्यवस्था को आधुनिक बनाने का प्रयास हैं। इनका मुख्य उद्देश्य रोजगार को औपचारिक बनाना, डिजिटल एकीकरण के माध्यम से अनुपालन को सरल बनाना, सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करना और कार्यस्थल की सुरक्षा व समानता सुनिश्चित करना है।
सरल नियामक प्रक्रियाएं:
लाइसेंसिंग सीमा में वृद्धि: फैक्ट्री लाइसेंस के लिए श्रमिकों की संख्या की सीमा पावर के साथ 10 से बढ़ाकर 20 और बिना पावर के 20 से बढ़ाकर 40 कर दी गई है।
ठेका श्रमिक: कॉन्ट्रैक्ट लेबर लाइसेंस की सीमा 20 से बढ़ाकर 50 कर्मचारी कर दी गई है, जिससे छोटे व्यवसायों पर नियामक बोझ कम होगा।
त्वरित अनुमोदन: कारखाने के निर्माण या विस्तार की अनुमति के लिए 30 दिन की समय सीमा निर्धारित की गई है, जिससे परियोजनाओं को तेजी से शुरू किया जा सकेगा।
सिंगल विंडो सिस्टम:
एकल पंजीकरण, रिटर्न, लाइसेंस: इलेक्ट्रॉनिक सिंगल रजिस्ट्रेशन, एकल रिटर्न और पांच वर्ष के लिए मान्य सिंगल लाइसेंस की राष्ट्रव्यापी व्यवस्था लागू की गई है। इससे प्रशासनिक लागत और प्रक्रियात्मक देरी कम होगी।
राष्ट्रव्यापी एकरूपता:
समान मानक: अब पूरे भारत में MSME कार्यस्थलों के लिए व्यावसायिक सुरक्षा और स्वास्थ्य के समान मानक अधिसूचित होंगे, जिससे राज्य-स्तरीय भिन्नताएं खत्म होंगी।
परिचालन में लचीलापन:
उच्च सीमा: बर्खास्तगी, छंटनी और बंद करने हेतु श्रमिक सीमा 100 से बढ़ाकर 300 कर्मचारियों तक कर दी गई है। इससे MSME बदलती आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार अपने संचालन को पुनर्गठित कर सकेंगे।
स्टैंडिंग ऑर्डर्स से मुक्ति: 300 से कम कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठान अब स्टैंडिंग ऑर्डर्स के प्रमाणन से मुक्त हैं, जिससे अनुपालन भार कम होगा।
निरीक्षण में पारदर्शिता:
इंस्पेक्टर-सह-फैसिलिटेटर: पारंपरिक ‘इंस्पेक्टर राज’ को खत्म करने के लिए इंस्पेक्टर-सह-फैसिलिटेटर मॉडल लाया गया है, जिसमें निरीक्षण यादृच्छिक और वेब-आधारित प्रणाली से होंगे।
तीसरे पक्ष का ऑडिट: स्टार्ट-अप या विशेष प्रतिष्ठानों के लिए तीसरे पक्ष के ऑडिट और प्रमाणन की व्यवस्था की गई है।
अपराधों का गैर-अपराधिककरण:
जुर्माने का प्रावधान: कई अपराधों को गैर-आपराधिक घोषित किया गया है, जिसमें आपराधिक दंड की जगह जुर्माने दिए जाएंगे। इससे छोटे फर्मों के लिए अनुपालन जोखिम कम होगा।
अनुपालन के लिए नोटिस: किसी भी कानूनी कार्रवाई से पहले नियोक्ताओं को 30 दिन का अनिवार्य नोटिस दिया जाएगा।
सामाजिक सुरक्षा का विस्तार:
ईपीएफओ प्रक्रिया में सरलीकरण: ईपीएफ प्राधिकरण की पूछताछ के लिए 5 साल की समय सीमा तय की गई है, और अपील के लिए जमा राशि को 40-70% से घटाकर 25% कर दिया गया है।
पारिवारिक परिभाषा का विस्तार: महिला कर्मचारियों के लिए परिवार की परिभाषा में सास-ससुर (आय स्तर के आधार पर) भी शामिल होंगे।
न्यूनतम वेतन और कल्याण:
सार्वभौमिक न्यूनतम वेतन: अब सभी कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन मिलेगा, जिसकी हर पांच वर्ष में समीक्षा होगी। न्यूनतम जीवन आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर यह तय किया जाएगा।
ओवरटाइम वेतन: सामान्य कार्य घंटों से अधिक काम के लिए दोगुना वेतन।
लैंगिक भेदभाव निषेध: भर्ती, वेतन या रोजगार की शर्तों में लिंग (ट्रांसजेंडर सहित) के आधार पर भेदभाव प्रतिबंधित होगा।
मुफ्त स्वास्थ्य जांच: प्रत्येक कर्मचारी को प्रति वर्ष मुफ्त स्वास्थ्य जांच का अधिकार।
ईएसआईसी कवरेज: ईएसआईसी का कवरेज पूरे भारत में लागू होगा; नोटिफाइड क्षेत्रों की अवधारणा समाप्त।
रोजगार पद्धतियों में लचीलापन:
निश्चित अवधि रोजगार (FTE): FTE कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों के समान वेतन और सामाजिक सुरक्षा लाभ मिलेंगे, जिससे अनौपचारिक रोजगार को औपचारिक रूप में बदला जा सकेगा।
हड़तालों का नियमन: अचानक हड़तालों को रोकने के लिए 14 दिन का नोटिस अनिवार्य होगा, और मध्यस्थता या ट्रिब्यूनल कार्यवाही के दौरान हड़ताल प्रतिबंधित रहेगी।
लचीले कामकाजी घंटे: सरकारें कार्य घंटे की सीमा तय करने में पूर्ण लचीलापन रखेंगी, जिससे उद्योगों को व्यवसाय की जरूरत के अनुसार काम के घंटे तय करने की स्वतंत्रता मिलेगी।
निष्कर्ष ये श्रम संहिताएं भारत के MSME पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त करेंगी, “सबका साथ, सबका विकास” के सिद्धांतों के अनुरूप 2047 तक विकसित भारत के विजन में योगदान देंगी। यह MSME के लिए सफलता का मार्ग प्रशस्त करेगा, जबकि श्रमिकों को उचित वेतन, सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, जिससे एक संतुलित और प्रगतिशील कार्य वातावरण का निर्माण होगा।
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