कर्णप्रयाग और नगरासू गुरुद्वारा विवाद को लेकर उत्तराखंड की ओर कूच कर रहे निहंग संगठनों के जत्थे को पुलिस ने हिमाचल-उत्तराखंड सीमा पर ही रोक दिया है। (प्रतीकात्मक तस्वीर)
उत्तराखंड में फिर गर्माया कर्णप्रयाग-नगरासू गुरुद्वारा विवाद: निहंग सिखों के जत्थे को बॉर्डर पर रोका गया, रखी ये 3 बड़ी मांगें”
रुद्रप्रयाग: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
उत्तराखंड के चमोली जिले के कर्णप्रयाग और रुद्रप्रयाग के नगरासू गुरुद्वारा को लेकर उपजा विवाद एक बार फिर से तूल पकड़ता नजर आ रहा है।
‘The Politics Again’ की रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब के मोहाली स्थित ‘गुरुद्वारा सिंह शहीदां’ से निकला निहंग संगठनों (जत्थेबंदियों) का एक बड़ा जत्था गुरुवार को उत्तराखंड की ओर कूच कर रहा था।
हालात को बिगड़ने से रोकने के लिए पुलिस ने इस जत्थे को ‘हिमाचल प्रदेश-उत्तराखंड’ सीमा पर ही रोक दिया है। सीमावर्ती क्षेत्रों में भारी पुलिस बल और सुरक्षा एजेंसियों को तैनात कर दिया गया है।
दिलचस्प बात यह है कि एक दिन पहले ही वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई बैठक के बाद निहंग पक्ष के जत्थेदारों ने संतोष जताया था, लेकिन इसके बावजूद एक वर्ग अभी भी उत्तराखंड जाने की जिद पर अड़ा हुआ है।
उत्तराखंड पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद, निहंग नेता अजय सिंह ने कहा:
“हम केवल वाहेगुरु के दर्शन के लिए जा रहे हैं। हमारा उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं है। हम शांति से आगे बढ़ रहे हैं। सिख हमेशा सबकी रक्षा करते हैं, लेकिन अब हमारी अपनी सुरक्षा पर ही आंच आई है।”
वहीं, अकाली नेता जसदीप सिंह ने प्रशासन के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं और चेतावनी दी है कि जब तक उनके 4 साथी उनके साथ वापस नहीं लौटते, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा:
अधिकारी पर कार्रवाई: कर्णप्रयाग मामले में दर्ज मुकदमे की जांच करने वाले अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
पुलिसकर्मी हों निलंबित: इस मामले में दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों को तुरंत निलंबित किया जाए।
जिम्मेदारों पर एक्शन: जिन लोगों को बिना मुकदमे के थाने में बंद रखा गया, उसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कड़ी कार्रवाई हो।
इस पूरे विवाद की शुरुआत 16 जून को चमोली जिले के कर्णप्रयाग में हुई थी:
यहां सिख श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया था।
आरोप है कि विवाद के दौरान एक निहंग सिख ने तलवार से हमला कर दिया, जिससे एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया।
पुलिस ने इस मामले में हत्या के प्रयास (Attempt to murder) समेत कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर 4 निहंगों को गिरफ्तार किया था।
इसके बाद निहंग संगठनों ने पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई और सिख श्रद्धालुओं के साथ दुर्व्यवहार का आरोप लगाया।
कर्णप्रयाग की घटना के विरोध में 20 जून को कुछ निहंग सिख रुद्रप्रयाग के नगरासू गुरुद्वारे पहुंचे।
वहां उन्होंने गुरुद्वारे की छत पर कब्जा कर लिया और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
गुरुद्वारा प्रबंधन का आरोप था कि निहंगों ने 50-60 कमरों की मांग की थी, जिसे न मानने पर उन्होंने हंगामा किया और एक कर्मचारी को बंधक भी बनाया।
बाद में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश और पंजाब के सीएम भगवंत मान से बातचीत के बाद प्रशासन और निहंग प्रतिनिधियों के बीच बातचीत हुई, जिसके बाद छत पर डटे निहंग नीचे उतरे।
फिलहाल, कर्णप्रयाग विवाद से जुड़ी दोनों एफआईआर की विवेचना हरिद्वार पुलिस को ट्रांसफर कर दी गई है।
वहीं, सिख श्रद्धालुओं के साथ कथित मारपीट और उन्हें ‘बिना दस्तार’ (बिना पगड़ी) कोर्ट में पेश किए जाने के गंभीर आरोपों की जांच DIG यशवंत सिंह को सौंपी गई है, जिन्हें 2 सप्ताह में रिपोर्ट देनी है।
चारधाम यात्रा (Chardham Yatra) के सुचारू संचालन को देखते हुए उत्तराखंड प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट है ताकि कोई भी अप्रिय कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न न हो। प्रशासन सीमा पर रोके गए जत्थे पर लगातार नजर बनाए हुए है।
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