UP assembly election 2027
🗳️ यूपी चुनाव 2027: ओवैसी की एंट्री से बिगड़ेगा सपा का ‘गेम’? ‘वोट कटवा’ से ‘किंगमेकर’ बनने की फिराक में AIMIM, अखिलेश की बढ़ी टेंशन”
लखनऊ: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर अभी से सियासी बिसात बिछने लगी है। समीकरणों को साधने और नए गठजोड़ बनाने का दौर शुरू हो चुका है।
इस बीच, एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी यूपी के चुनावी दंगल में ताल ठोक दी है।
ओवैसी के हालिया बयानों और सक्रियता ने राज्य के सबसे बड़े विपक्षी दल यानी समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव की टेंशन बढ़ा दी है।
‘The Politics Again’ की इस विशेष राजनीतिक रिपोर्ट में आइए समझते हैं कि यूपी में ओवैसी का अब तक का रिकॉर्ड कैसा रहा है और 2027 में वे अखिलेश यादव के लिए कितनी बड़ी चुनौती बन सकते हैं:
पिछले दिनों ओवैसी ने कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों को एक बड़ा संदेश दिया है।
उनका कहना है कि भाजपा को रोकने के लिए विपक्ष को एकजुट होना होगा और अगर ‘विपक्षी गठबंधन’ AIMIM को उचित भागीदारी देता है, तो वे भी साथ आने को तैयार हैं।
अखिलेश की टेंशन: सबसे बड़ी चुनौती सपा प्रमुख अखिलेश यादव के सामने है। अखिलेश 2024 के लोकसभा चुनाव से ही PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की सफल पॉलिटिक्स कर रहे हैं।
ओवैसी की सक्रियता सीधे तौर पर इस ‘अल्पसंख्यक’ वोट बैंक में सेंधमारी कर सकती है। इसी आशंका के चलते अखिलेश यादव लगातार ओवैसी पर हमलावर रुख अपना रहे हैं।
भले ही ओवैसी की पार्टी ने बिहार (सीमांचल) में शानदार प्रदर्शन किया हो, लेकिन यूपी में अब तक उन्हें कोई बड़ी सफलता (सीट) नहीं मिली है। हालांकि, ‘वोट कटवा’ के रूप में उन्होंने विपक्ष का बड़ा नुकसान जरूर किया है:
यूपी चुनाव 2017: AIMIM ने 30 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन ‘मोदी लहर’ में पार्टी को मात्र 0.2 फीसदी (करीब 2 लाख) वोट मिले, जो नोटा (NOTA) से भी कम थे।
लोकसभा चुनाव 2019: सपा-बसपा महागठबंधन के चलते ओवैसी ने इस चुनाव में कोई उम्मीदवार नहीं उतारा और दूरी बनाए रखी।
यूपी चुनाव 2022: यह चुनाव टर्निंग पॉइंट रहा। AIMIM ने 95 से अधिक सीटों पर उम्मीदवार उतारे। पार्टी को 0.46 फीसदी (करीब 4.5 लाख) वोट मिले।
इस चुनाव में ओवैसी ने सपा के मुस्लिम वोट बैंक में ऐसी सेंधमारी की, कि कई सीटों पर सपा उम्मीदवार बहुत कम मार्जिन से हार गए और इसका सीधा फायदा भाजपा को मिला।
लोकसभा चुनाव 2024: ओवैसी ने अपना दल (कमेरावादी) की पल्लवी पटेल के साथ PDM (पिछड़ा, दलित, मुस्लिम) गठबंधन बनाया, लेकिन चुनाव में कुछ खास हासिल नहीं हुआ।
असदुद्दीन ओवैसी की असली रणनीति प्रदेश के ‘मुस्लिम लीडरशिप’ में आए खालीपन को भरना है।
सपा के कद्दावर मुस्लिम चेहरे आजम खान 2020 से जेल में हैं और शफीकुर्रहमान बर्क जैसे नेताओं की कमी खल रही है।
मुसलमानों के एक वर्ग में नाराजगी है कि अखिलेश यादव ने आजम खान के मुद्दे को गंभीरता से नहीं उठाया।
ओवैसी इसी नाराजगी का फायदा उठाकर खुद को पश्चिमी उत्तर प्रदेश और मुस्लिम बहुल इलाकों में एक मजबूत विकल्प के तौर पर पेश कर रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 2027 के चुनाव में अगर AIMIM को बहुजन समाज पार्टी (BSP) या आजाद समाज पार्टी (ASP) जैसे किसी दलित संगठन का साथ मिल गया, तो यह गठजोड़ यूपी की राजनीति में बड़े उलटफेर कर सकता है।
नोट: उत्तर प्रदेश की राजनीति के अंदरूनी समीकरणों, विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों और हर बड़ी सियासी हलचल की निष्पक्ष रिपोर्ट के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल ‘द पॉलिटिक्स अगेन’ (The Politics Again) पर।
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